मंगलवार, 1 अक्तूबर 2013

प्यार के लिए अपनाएँ कमजोरी भी----

प्यार के लिए अपनाएँ कमजोरी भी----
हर व्यक्ति अपने प्यार और साथी की एक छवि बनाकर रखता है और जीवन में जब भी कोई व्यक्ति उसे इस छवि से मिलता-जुलता मिलता है तो वह उसकी ओर आकर्षित होने लगता है। दोनों ही एक-दूसरे की पसंद-नापसंद का ध्यान रखते हैं और बेहद करीब आ जाते हैं। दिन बीतने के साथ ही औपचारिकताएँ खत्म होने लगती हैं और दोनों खुलकर एक-दूसरे के सामने आने लगते हैं। फिर एक दिन जब आप अपने साथी की किसी ऐसी आदत, मानसिकता, व्यवहार या कुंठा आदि से अचानक रूबरू होते हैं, जिनकी आपने अपेक्षा नहीं की थी, तो आप हतप्रभ-से रह जाते हैं। इस वक्त आप बड़ी मुश्किल से अपनी नफरत छुपा पाते हैं। आप उससे दूर होने की सोचने लगते हैं पर हो नहीं पाते हैं क्योंकि उस एक कमजोरी के अलावा उसकी बाकी शख्सियत आपको अच्छी लगती है। उसका साथ अच्छा लगता है। ऐसे में उस प्यार को कैसे बरकरार रखा जाए? अपने प्यार करने वालों की कमजोरियों को समझते हुए उसे स्वीकार करना फायदेमंद लव-मंत्र है।
जीवन के हर पहलू में हम एक आदर्श स्थिति को मापदंड बनाकर चलते हैं। उस धरातल पर जब कुछ खरा नहीं उतरता है तो हमें बड़ी निराशा मिलती है और हम उसके आलोचक बन जाते हैं। जीवन का कौन-सा ऐसा क्षेत्र है जहाँ हमें शिकायत नहीं रहती? माँ-बाप से लेकर बच्चे, यार-दोस्त हर किसी में हमें नुक्स दिखते हैं किंतु हम इसके बावजूद काम चलाना सीख जाते हैं। दरअसल, उनकी कमजोरियों को अनदेखा कर हम उनके साथ खुश होने के रास्ते ढूँढ़ लेते हैं।
सच तो यह है कि जिस प्रकार दूसरे हमें परिपूर्ण नहीं लगते हैं उसी प्रकार हम भी दूसरों के लिए आदर्श नहीं हो सकते हैं। दोनों ही इस सच्चाई को स्वीकार करते हुए आगे चलते हैं तो प्यार की गाड़ी सुचारू रूप से चलती जाती है अन्यथा एक-दूसरे की कमियाँ गिनाने का सिलसिला चल पड़ता है। यह बताने की जरूरत नहीं कि कमियाँ बताना अपने-आप में एक कमजोरी व कमी है। इस तू-तू, मैं-मैं का अंजाम क्या होता है यह हम सभी जानते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि हम जिसे प्यार करते हैं, उसे मन ही मन पूजना चाहते हैं पर कमियों से दो-चार होने के बाद हमारा सपना टूटने लगता है और हमारे मन में प्यार करने वाले के प्रति आदर कम होने लगता है। अगर सब्र और समझदारी से काम लें तो यह मनोदशा थोड़े ही दिनों में सुधर सकती है। जाति, धर्म, म हिला-पुरुष, वर्ग-व्यवस्था आदि से संबंधित विचारों एवं पूर्वाग्रहों से भी आप विचलित से हो जाते हैं पर इस आधार पर रिश्ता तोड़ देना कोई अक्लमंदी नहीं है। हाँ, दोनों को ही एक-दूसरे के साथ विचारों का आदान-प्रदान खुले दिल से करना चाहिए। हो सकता है सामने वाले के पूर्वग्रह आपके अन्य विचारों के कारण धीरे-धीरे समाप्त या कम हो जाए। हम हर रोज ही जीना सीखते हैं। प्यार में आगे बढ़ने का यह मूल मंत्र है।
कई लोग बिल्कुल ही अव्यविस्थत से होते हैं तो कुछ जरूरत से ज्यादा ही व्यवस्थित होते हैं। कोई खूब फिजूलखर्ची होता है तो कोई बिल्कुल कंजूस। कोई सेहत को लेकर बेहद जागरूक है तो कोई बेइंतहा लापरवाह है। कोई व्यावहारिक है तो कोई अतिभावुक एवं संवेदनशील। पर ये सारी खूबियाँ या कमियाँ ऐसी नहीं हैं कि इनके लिए बहुत ज्यादा हाय-तौबा मचाई जाए। यदि हमारे नजरिए में व्यापकता है तो हम अपने साथी की कमजोरियों को बहुत ही सम्मान के साथ स्वीकार कर सकते हैं। ऐसा करने से रिश्ते को मजबूती मिलती है। कई बार दूसरे की कमजोरियाँ ही आपके जीवन में नए आयाम जोड़ती है। मिसाल के तौर पर यदि आप फिजूलखर्च हैं तो आपके साथी की कंजूसी आप पर भी अंकुश लगाने का काम करती है और आप पैसे का सही उपयोग करना सीखते हैं। यदि आप हर बात को लेकर अति चाक-चौबंद रहते हैं तो दूसरे की बेफिक्री से थोड़ी राहत में रहना भी सीखते हैं। जिंदगी का मजा बुत के साथ जीवन जीने में नहीं है बल्कि विविधता में एकरूपता महसूस करने में है। हाँ, ऐसी कमजोरी जिससे आपका जीना दुश्वार हो रहा हो, दिन-रात तनाव रहता हो, शारीरिक व मानसिक हानि पहुँच रही हो तो बेशक उस रिश्ते से किनारा कर लें। कमजोरियों का उलाहना देने के बजाय उसे स्वीकार करते हुए, मुस्कुराते हुए रिश्ते को निभाना बहुत ही अच्छा लव-मंत्र है।

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