Sunday, 26 January 2020

वैवाहिक जीवन की यौन समस्याएं और समाधान



वैवाहिक जीवन की यौन समस्याएं और समाधान –

शादीशुदा जीवन में सेक्स का विशेष महत्त्व होता है क्योंकि कई मामलों में से शादी टूटने का अहम कारण सेक्स समस्याएं या अंसतुष्ट वैवाहिक जीवन या खराब सेक्स लाइफ को माना जाता है। शादी के बाद शरीर की अन्य समस्याओं की तरह ही सेक्स संबंधी समस्याएं भी आम मानी जाती हैं। सेक्स करने के दौरान संतुष्ट ना होना या संतुष्ट ना कर पाना या फिर शादी के बाद महिला या पुरुष में सेक्स करने की उत्तेजना ना होना जैसी अनेक सेक्स समस्याएं हैं जो आम हैं।
पुरुषों के पेनिस में टाइटनेस ना आना, महिलाओं की योनि में सूखापन जैसी बहुत सी सेक्स समस्याएं हैं, जिनके बारे में अक्सर महिलाएं और पुरुष चर्चा नहीं करना चाहते। सेक्स समस्याओं के चलते अगर समय पर उचित सलाह और चिकित्सा न मिल पाए तो व्यक्ति हीन भावना और डिप्रेशन का शिकार हो सकता है। ऐसी सेक्स समस्याएं अगर सॉल्व न की जायें तो इसकी परिणाम रिश्ता टूटने तक जा सकता है। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं  शादी के बाद आने वाली सबसे कॉमन सेक्स समस्याओं और उनके उपाय के बारे में।

1. शादी के बाद पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन

शारीरिक संबंध बनाते समय किसी भी तरह की समस्याए आए तो रिश्तों में बिखराव आ सकता है। इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ED) (नपुंसकता या स्तंभन दोष) भी एक ऐसी ही समस्या हैं सेक्स करने के लिए पेनिस में तनाव न आना या आते ही जल्दी से पेनिस का ढीला पड़ जाना इरेक्टाइल डिस्फन्क्शन कहलाता है। लिंग में तनाव ना आने का सबसे बड़ा कारण चिंता और टेंशन लेना माना जाता है काम का अधिक बोझ और सही खान पान ना होना भी इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ED) का कारण होता है।


पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन का समाधान

अक्सर पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या मानसिक होती है, इसीलिए इसका समाधान भी आपके पास होता है इरेक्टाइल डिसफंक्शन से बचने के लिए सेक्स करने से पहले खुश रहें अधिक देर तक फोरप्ले करें अपने अंगों को अपने साथी को छूने दें हो सकता है इससे आपके लिंग का ढीलापन दूर हो जाये। अगर इन सब से बात न बने तो साइकोलॉजिस्ट के पास जायें अगर फिर भी इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या बनी रहे तो आप किसी अच्छे सेक्सोलॉजिस्ट के पास जा सकते हैं।


2. महिलाओं सेक्स के समय दर्द भरा सेक्सुअल इंटरकोर्स

यह महिलाओं की आम समस्या है। शादी के बाद इंटरकोर्स के दौरान अधिक दर्द होना भी कई महिलाओं को सेक्स करने से दूर करता है। इसके पीछे योनि में सूखापन, सूजन या किसी प्रकार का इंफेक्शन आदि कारण हो सकते है।


महिलाओं सेक्स के समय दर्द भरा सेक्सुअल इंटरकोर्स का समाधान

सेक्स करते समय आपके पति को मालूम होना चाहिए कि कब आपको दर्द हो रहा है और कब आप सेक्स करने में सहयोग दे रहीं है। जिसमें महिला साथी भी सेक्स का पूरा आनंद उठा सके, इसके लिए आप अलग अलग सेक्स पोजीशन में सेक्स करके ट्राय करके देख सकते है जिस पोजीशन में आप अधिक सहज महसूस करें उसमे सेक्स करें ऐसा करने पर यह समस्या उत्पन्न नहीं होगी। साथ ही सेक्स करते समय आप लुब्रिकेंट भी इस्‍तेमाल कर सकते है जो महिला साथी के दर्द को कम करेगा और सेक्स को अधिक आनंदमय बनायेगा। अगर इन सब चीजों के करने के बाद भी आराम ना मिले या इंटरकोर्स करने के दौरान लगातार अधिक दर्द हो तो आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

3. शादी के बाद पुरुषों में प्रीमैच्योर इजेकुलेशन

अक्सर सेक्स करने के दौरान पुरुष स्खलन होने के बाद पुरुष साथी की उत्तेजना शांत हो जाती है और उसकी महिला साथी की कामोत्तेजना बनी रहती है अगर सेक्स करते समय, जल्दी पुरुष का वीर्य बहार निकल जाए तो इसे प्रीमैच्योर इजेकुलेशन कहा जाता है। यह स्थिति शादी के बाद सेक्स लाइफ खराब कर देती है। लेकिन यह अक्सर कोई बीमारी न होकर अधिक उत्तेजना या फिर मन की स्थिति भी होती है जिसका उपचार बहुत ही आसान है।

प्रीमैच्योर इजेकुलेशन से बचने के उपाय

अक्सर जब व्यक्ति सेक्स शुरू करता है तो अधिक एक्साइटमेंट के कारण प्री मच्योर इजेकुलेशन होना एक आम बात है। यह बीमारी आपकी मानसिक स्थिति पर अधिक निर्भर करती है। इसका उचित कारण ढूढने की जरूरत होती है। इसके लिए आप नीम- हकीम के पास जाने से बचें और किसी अच्छे सेक्स विशेषज्ञ से इसके कारण को जानकर इसका सही इलाज करवाएं।

4. शादी के बाद महिलाओं में लुब्रिकेशन की कमी

सेक्स करने के लिए महिला की योनि में प्राकृतिक  चिपचिपा पदार्थ उत्पन होता है जिसे उत्तेजना का पैमाना माना जाता है। शादी के बाद उम्र बढ़ने के साथ ही महिलाओं में प्राकृतिक लुब्रिकेशन की कमी सामान्य है, लेकिन यदि कम उम्र या नयी शादी के बाद में किसी महिला इसकी कमी की शिकायत होती है, तो इस समस्या का इलाज करना चाहिए। सेक्स करते समय अगर लुब्रिकेशन में कमी रहती है तो इंटरकोर्स काफ़ी तकलीफ़देह हो सकता है।

महिलाओं में लुब्रिकेशन की कमी का समाधान

सेक्स से पहले लंबा फोरप्ले इसका इलाज है। क्योकि पार्टनर का टच लुब्रिकेशन में काफी असरदार होता है। लेकिन अगर पार्टनर के छूने के बाद भी बात न बने तो ऐसे लुब्रिकेंट भी उपलब्ध हैं जिनका इस्तेमाल आप सेक्स करते समय लुब्रिकेशन के लिए कर सकते हैं।

5. महिलाओं में सेक्स की इच्छा में कमी

शादी के बाद यह समस्या आम तौर पर महिलाओं में देखने को मिलती है। महिलाओं में कामेच्छा की कमी डिप्रेशन, थकान या तनाव की वजह से हो सकती है। कई महिलाओं को शरीर के कुछ ख़ास हिस्सों पर छूने या चूमने से दर्द भी महसूस होता है या ऐसा करना उन्हें अच्छा नहीं लगता। महिलाओं में कामेच्‍छा की कमी के कई कारण हो सकते हैं।

महिलाओं में सेक्स सेक्स की इच्छा में कमी समाधान

इसका इलाज किसी नीम- हकीम के पास न होकर आपके पार्टनर के पास ही है। पारिवारिक कलह व रिश्तों में टेंशन न हो, इसका खास ध्यान रखें। आपके पति को चाहिए कि वो पहले अपने साथी की जरूरत को समझें। महिलाओं को उत्तेजित करने का कम आपके पार्टनर का होता है इसके लिए आप महिला के गुप्त अंग को छूकर उससे उत्तेजित कर सकते हैं।

6. शादी के बाद गुप्त अंगों में इंफेक्शन होना

अक्सर गुप्त अंग में खुजली और इन्फेक्शन एक और कॉमन सेक्स समस्या है। यह इंफेक्शन मुख्यतः ठीक तरह से योनि की सफाई ना करने आदि के कारण हो जाती है।

शादी के बाद गुप्त अंगों में इंफेक्शन का समाधान

यह समस्या शादी के बाद सेक्स करने के बाद साफ-सफाई रखने और सेक्स के दौरान कंडोम के प्रयोग से ठीक हो जाती है। अगर साफ सफाई के बाद भी समस्या लगातार बनी रहे तो जल्दी ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

7. महिलाओं में चरम सुख (ऑर्गाज्म) ना होना या देर से होना

सेक्स के दौरान महिलाओं को चरम सुख ना मिलना भी एक आम सेक्स समस्या है। यह समस्या मानसिक तनाव का कारण हो सकती है। महिलाओं में लम्बे समय तक ऑर्गाज्म ना होने के कारण कई अन्य प्रकार की शारीरिक समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।

चरम सुख (ऑर्गाज्म) पाने के उपाय

इसका सबसे बड़ा कारण है सेक्स के लिए महिला का ठीक से एक्साइटेड न होना हो सकता है। चरम सुख पाने के लिए सेक्स से पहले लंबा फोरप्ले करना चाहिए।

8. शादी के बाद महिलाओं में वेजाइनल पेन होना

ऐसा शादी की शुरूआती दिनों में अधिक होता है सेक्स के दोरान महिलाओ को नाभि के नीचे और प्यूबिक एरिया के आस-पास दर्द महसूस होता है। ऐसे में क्लाइमैक्स यानि ऑर्गाज्म नहीं हो पाता है।

महिलाओं में वेजाइनल पेन का समाधान

इसके बचने के लिए लिए सेक्स के समय पोजीशन और साथी के हाव-भाव का ध्यान रखना जरूरी होता है। अगर ऐसा करने से भी बात न बने तो डाक्टर की सलाह लें।

9. शादी के बाद इंपोटेंसी यानि नपुंसकता का होना

नपुंसकता के लिए मोटापा, शुगर की बीमारी, हाई ब्लडप्रेशर, आदि कारण प्रमुख होते हैं। इसके अलावा लम्बे समय से सिगरेट, तंबाकू और एल्कोहल का सेवन करने से भी सेक्स के लिए इरेक्शन में समस्या हो सकती है।

नपुंसकता का समाधान

इस समस्या से बचने के लिए आप अपने मोटापे के स्तर और शुगर लेवल के साथ रक्तचाप को नियंत्रित रखें। साथ ही नियमित रूप से एक्सरसाइज योगा और मैडिटेशन करें। ऐसा करने पर भी यदि समस्या का समाधान न हो तो आपको इसके लिए किसी सेक्सोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।

10. सेक्स की पसंद और नापसंद में अंतर

शादी के बाद दोनों पार्टनर की सेक्स को लेकर अलग-अलग पसंद और नापसंद हो सकती है इससे भी सेक्सुअल रिलेशन बनाने में समस्या आ सकती है।

सेक्स की पसंद और नापसंद का समाधान

शादी के बाद जरूरी है कि आप अपने पार्टनर के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ें। और अपनी और उनकी सेक्स को लेकर पंसद और नापंसद के बारे में पहले ही बात कर लें उसके बाद सेक्स करें। अक्सर जब सेक्स के बारे में खुलकर बातचीत की जाती है तो सेक्स को सुखद और यादगार बनाने में मदद मिलती है।


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Sunday, 19 January 2020

अवसाद (डिप्रेशन) आपका यौन जीवन ख़राब कर देता हैं:



अवसाद (डिप्रेशन) आपका यौन जीवन ख़राब कर देता हैं:-


वसाद (डिप्रेशन) आपके जीवन को कई तरह से प्रभावित कर सकता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपकी सेक्स ड्राइव को भी कम कर सकता है। हाँ यह सच है। डिप्रेशन का असर आपकी सेक्स लाइफ को भी बर्बाद कर सकता है। एक शोध से पता चला है कि यदि आप पुराने अवसाद से पीड़ित हैं, तो आपको स्तंभन दोष (Erectile dysfunction) जैसी यौन समस्याएं होने की अधिक संभावना है। साथ ही, अवसाद का इलाज करने के लिए उपयोग की जाने वाली दवाएं भी आपके कामेच्छा (Libido) पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।


 अवसाद (डिप्रेशन) यौन जीवन को कैसे प्रभावित करता है?


जब आप अवसाद से पीड़ित होते हैं, तो आप असहाय और निराशा की भावना का अनुभव करते हैं। ये नकारात्मक भावनाएँ आपके यौन जीवन सहित आपके दैनिक कार्य को भी प्रभावित करती हैं। यह समस्या कई दिनों से लेकर हफ्तों तक बनी रह सकती है। आपकी यौन इच्छा आपके मस्तिष्क से उत्पन्न होती है। यह आपके शरीर को न्यूरोट्रांसमीटर (रसायन जो आपके मस्तिष्क के दूतों के रूप में कार्य करते हैं) के माध्यम से आपके यौन अंगों तक रक्त के प्रवाह को बढ़ाने का संदेश देता है। अवसाद इन रसायनों को प्रभावित करता है, जिससे मस्तिष्क के लिए अपने यौन अंगों को संकेत भेजना मुश्किल हो जाता है जैसे ही आप सेक्स करने की इच्छा व्यक्त करते हैं।

अवसाद (डिप्रेशन) सेक्स में रुचि को कम कर सकता है


कई शोधों में यह भी कहा गया है कि जो लोग अवसाद से ग्रस्त होते हैं वे सेक्स में रुचि खोने लगते हैं, भले ही आपका साथी आपको कितना सहज महसूस कराता हो, लेकिन अगर आप अवसाद से पीड़ित हैं तो आपको वह खुशी नहीं मिलेगी। आप वह नहीं कर पाएंगे जो आपको करना चाहिए।
ऐसी स्थिति में, ध्यान रखें कि यदि आपको कभी लगता है कि आप अवसाद से पीड़ित हैं और सेक्स में रुचि कम हो रही है, तो अवसाद का इलाज करने के साथ-साथ किसी सेक्सोलॉजिस्ट से संपर्क करें। मनोवैज्ञानिक और सेक्सोलॉजिस्ट दोनों रिश्तों से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने में आपकी मदद करेंगे।
  

अवसाद (डिप्रेशन)  प्रकृति में बदलाव का कारण बन सकता है


सेक्स हमारे शरीर की जरूरत है, जो समय-समय पर बहुत जरूरी है। सेक्सोलॉजिस्ट मानते हैं कि हर 15 दिन में एक बार सेक्स करना चाहिए। लेकिन जब यह संभव नहीं होता है, तो यह हमारी प्रकृति पर भी सीधा प्रभाव डालता है।
सेक्स शरीर की जरूरतों में से एक है जिसे एक निश्चित समय के बाद किया जाना चाहिए। क्योंकि यह न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक संतुष्टि भी प्रदान करता है। लेकिन जब कोई व्यक्ति अवसाद की चपेट में होता है, तो वह उस तरह से सेक्स के आनंद को महसूस नहीं कर पाता है जैसा कि एक सामान्य व्यक्ति कर सकता है। ऐसे में इसका सीधा असर व्यक्ति के स्वभाव में जलन और उदासी के रूप में देखा जाता है। जब एक महिला अपनी इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध बनाने में सक्षम नहीं होती है तो यह उसके स्वभाव को भी प्रभावित करता है। यही कारण है कि अवसाद को समय रहते नियंत्रित किया जाना चाहिए।

अवसाद (डिप्रेशन)  के कारण रिश्ते में लड़ाई-झगड़े बढ़ सकते हैं


डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति की सेक्स लाइफ न केवल खराब होती है, बल्कि इससे रिश्ते में कई तरह की समस्याएं भी आती हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि सेक्स एक रिश्ते में प्यार और निकटता बढ़ाने के लिए एक पुल का काम करता है। एक समय के बाद संबंध सेक्स पर निर्भर हो जाता है। लेकिन जब अवसाद शरीर से टकराता है, तो महिला सेक्स के दौरान या यौन इच्छा के लिए अपना 100% देने में असमर्थ होती है।
अपने लिए सोचें कि अगर आपके साथी में सेक्स की तीव्र इच्छा है लेकिन उसी समय दूसरा साथी इसके लिए मना कर रहा है, तो रिश्ते में तनाव किस स्तर तक आ सकता है। ऐसी स्थिति में रिश्ते में लड़ाई, नोक-झोंक बढ़ जाना और गलतफहमी होना आम बात हो गई है। अंत में, परिणाम यह होता है कि दंपति में दूरी बढ़ने लगती है और आदमी शारीरिक सुख के लिए दूसरा विकल्प तलाशने लगता है।
निष्कर्ष
इसमें कोई संदेह नहीं है कि अवसाद शरीर का ऐसा दुश्मन है जो व्यक्ति को बहुत खोखला बना देता है। नींद की कमी, भूख न लगना, आत्मविश्वास की कमी, उदास रहना या चिड़चिड़ापन अवसाद के कुछ सामान्य लक्षण हैं। क्योंकि यह आपके यौन जीवन को प्रभावित करता है और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है। अगर आपको इनमें से कोई भी 2 या 3 लक्षण अपने अंदर दिखे तो बिना देर किए सेक्सोलॉजिस्ट से संपर्क करें।

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Saturday, 11 January 2020

इनफर्टिलिटी ( शुक्राणुओं की कमी) की समस्या का मुख्य कारण आपकी ख़राब लाइफ स्टाइल हो सकती है -


इनफर्टिलिटी ( शुक्राणुओं  की कमी) की समस्या का मुख्य कारण आपकी ख़राब लाइफ स्टाइल हो सकती है -



पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्या का मुख्य कारण शुक्राणुओं की संख्या में कमी होना होता है। रोज की कुछ आम आदतें भी पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या को प्रभावित कर सकती हैं। रोजाना इन आदतों की वजह से शुक्राणुओं का उत्पादन बहुत कम हो जाता है।

किसी भी पुरुष की फर्टिलिटी सामान्य तौर पर उसके स्पर्म काउंट पर निर्भर करती है। अगर किसी व्यक्ति में शुक्राणुओं की संख्या कम है या उसके शुक्राणुों की गुणवत्ता खराब है तो उस व्यक्ति का दांप्त्य जीवन इससे प्रभावित हो सकता है। पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्या का मुख्य कारण शुक्राणुओं की संख्या में कमी होना हो सकता है।
किसी भी पुरुष में शुक्राणुओं का उत्पादन ना होने की कई वजहें हो सकती है जैसे ड्रग्स का सेवन करना, मस्ल्स बढ़ाने के लिये सप्लीमेंट्स का सेवन करना, एल्कोहल या सही खानपान ना होना। ऐसी ही कुछ रोजाना की आदते हैं जो पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या को कम कर सकती हैं।
अधिक मात्रा में पनीर का सेवन: 
साल 2014 में आए एक शोध में पता चला है कि अधिक पनीर के सेवन से पुरुषों के शरीर में शुक्राणुओं की संख्या कम हो सकती है। खासकर वो लोग जो धूम्रपान करते हैं या पहले करते थे। हालांकि कम वसा वाला आहार जैसे दूध का सेवन करने से स्पर्म काउंट में बढ़ोतरी होती है।
बहुत अधिक मीठे पेय पदार्थ:
मीठे पेय पदार्थ का सेवन भी आपके शुक्राणुओं की संख्या के लिये हानिकारक हो सकती हैं। मीठे पेय पदार्थों का अत्यधिक सेवन करने से पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या कम होने लगती है, खासतौर पर उन पुरुषों में जो पतले हैं। साथ ही इन पदार्थों का जरुरत से ज्यादा सेवन फॉलिकल स्टीमुलेटिंग हार्मोन(एफएसएच) की मात्रा को भी घटाता है। यह हार्मोन स्पर्म के उत्पादन के लिये जिम्मेदार होते हैं।
गर्म पानी से नहाना:
 गर्म पानी से नहाने से भी शुक्राणओं की संख्या और उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्योंकि इसके कारण टेस्टिकल्स(अंडकोष) का तापमान बढ़ जाता है जिससे स्पर्म काउंट पर बुरा असर पड़ता है। निजी अंगो को साफ करने के लिये ठंडे पानी का इस्तेमाल करें जिससे इस समस्या से बचाव होगा और निजी अंगो को स्वस्थ रख पाएंगे।
अधिक टीवी देखना:
अगर टीवी देखना आपका पसंदीदा टाइम-पास है तो आपको इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है। एक शोध जर्नल में छपे शोध पत्र में कहा गया है कि जो पुरुष 20 घंटे से ज्यादा समय तक टीवी देखते हैं उनमें शुक्राणु की संख्या(sperm concentration) बाकी लोगों की तुलना में 44 प्रतिशत कम होता है। 
सोया का अधिक सेवन:

 साल 2008 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, सोया का अधिक मात्रा में सेवन करने से शुक्राणुओं के उत्पादन और गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। खासतौर पर वो लोग जो मोटापे का शिकार है, अगर सोया का अधिक सेवन करते हैं तो यह आदत उनमें शुक्राणुओं की संख्या पर बुरा असर डाल सकती है। हालांकि सोया की मात्रा से भरपूर आहार खाने से पुरुषों के शुक्राणुओं, ऐजाकुलेशन और मोर्फोलॉजी पर कोई असर नहीं होता है।


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Saturday, 4 January 2020



पहली बार यौन संबंध बनाते समय शीघ्रपतन होना ये पुरुषो की आम समस्या है:-

पहली बार यौन संबंध बनाना काफी पुरुषों के लिए काफी तनावपूर्ण होता है क्योंकि उनके ऊपर दबाव अधिक होता है। यौन संबंध के दौरान पुरुषों को अच्छा प्रदर्शन करना पड़ता है ताकि वो अपनी महिला साथी को पूरी तरह से संतुष्ट कर पाए। कुछ समस्याओं की वजह वो लंबे वक्त नहीं ले पाते हैं।

हर इंसान अपने पार्टनर के साथ बनाए पहली बार यौन संबंध को नहीं भूलते हैं क्योंकि वो पल उनके लिए बहुत खास होता है। इस पल का हर कोई आनंद उठाता है। लेकिन पहली बार यौम संबंध बनाना काफी आशंकित हो सकता है, खासकर पुरुषों के लिए। हर किसी के पास अपने पहले यौन संबंध से जुड़ी कुछ यादें होती हैं। यह विभिन्न कारणों से लंबे समय तक नहीं रह पाता है। यौन संबंध के दौरान, पुरुषों को अच्छा परफॉर्म करना पड़ता है, लेकिन दुर्भाग्य से कुछ पुरुष जल्दी से इजैकुलेट हो जाते हैं। यह कई लोगों के लिए आम समस्या होती हैं। लेकिन अगर यह समस्या आपको अक्सर देखने को मिलती है तो आपको डॉक्टर से परामर्श करने की जरूरत है

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन:
यह पुरुषों में एक आम समस्या होती है जिसके कारण वो यौन संबंध का पूरी तरह आनंद नहीं उठा पाते हैं। यह समस्या बड़ी नहीं होती है लेकिन इसकी वजह से पुरूषों पर दबाव बना रहता है। लेकिन इस समस्या का पल खुद निकाला जा सकता है। शुरूआती दौर में ये परेशान करता है, लेकिन धीरे-धीरे ये परेशानी कम हो जाती है। लेकिन यदि ये समस्या समय के साथ बढ़ती जाए तो आपको डॉक्टर से परामर्श करने की जरूरत है। ये एक कारण होता है जिसकी वजह से पुरूष यौन संबंध बनाते वक्त कम समय लेते हैं।

शीघ्रपतन(प्रीमैच्योर इजैकुलेशन):
पहली बार यौन संबंध बनाते वक्त पुरूष अपनी परफॉर्मेंन्स को लेकर बहुत चिंतित और परेशान रहते हैं जिसके कारण उन्हें प्रीमैच्योर इजैकुलेशन की समस्या हो जाती है। इसलिए, बिस्तर पर बेहतर परफॉर्म करने के दबाव के कारण उन्हें प्रीमैच्योर इजैकुलेजशन हो जाता है। इसके अलावा, पुरुष इस समस्या को अपने साथी के साथ नहीं शेयर कर पाते हैं और इसलिए ये समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा, समय से पहले प्रीमैच्योर इजैकुलेशन अधिक उत्तेजना के कारण होता है।

नियंत्रण शक्ति के बारे में कम जानकारी:


यदि आप पहली बार यौन संबंध बना रहे हैं तो यह स्पष्ट है कि आपको पहले कोई अनुभव नहीं हुआ है और इस वजह से आप अपनी उत्तेजना को नियंत्रित करने में विफल हो सकते हैं। यही कारण है कि यौन संबंध बनाते वक्त पुरूष कम समय लेते हैं। लेकिन, यह समस्या समय के साथ कम हो जाती है। जितना अधिक आप यौन संबंध बनाएंगे उतनी आपको जानकारी होगी।

इन समस्याओं के कारण पुरूष पहली बार यौन संबंध बनाते वक्त कम समय लेते हैं। पुरुषों को हमेशा याद रखना चाहिए कि मास्टरबेशन करना और यौन संबंध बनाना दोनों अलग बात होती है। इसलिए, अगर किसी व्यक्ति को मास्टरबेशन करते समय अधिक समय लगता है तो यह इस बात को नहीं दर्शाता है कि पहली बार यौन संबंध बनाते वक्त अधिक समय लगे। लेकिन अगर यह समस्या जल्दी खत्म नहीं होती है तो आपको अपने डॉक्टर से परामर्श करने की जरूरत है।


Sunday, 22 December 2019


 सेक्स टाइमिंग बढ़ाना चाहते है तो करें लाइफस्टाइल में बदलाव :-


सेक्स के दौरान अपने पार्टनर की अपेक्षा जल्दी से क्लाइमेक्स पर पहुँच जाना एक बहुत कॉमन बात है, तो इसकी वजह से खुद को कम न आँकें। खुशकिस्मती से, ऐसे वो सारे लोग, जो इस तरह से जल्दी क्लाइमेक्स पर पहुँच जाते हैं, वो बेड पर ज्यादा वक़्त तक ठहरे रहना सीख सकते हैं। एक्सर्साइजेज़ और लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव लाने से, इसके ऊपर कंट्रोल पाने में मदद मिल सकती है और लंबे समय तक टिके रहने के लिए ऐसी बहुत सारी टेक्निक्स मौजूद हैं, जिन्हें आप सेक्स के दौरान यूज कर सकते हैं। क्लाइमेक्स को कंट्रोल करने वाले प्रोडक्ट्स और दवाइयों को भी इस्तेमाल करके देखा जा सकता है। अगर आपका पार्टनर बहुत जल्दी रुक जाता है, तो उसके साथ मिलकर, एक टीम की तरह, इस टॉपिक पर  बात करें। उसके ऊपर सारा दोष मढ़ने से बचें और उसे ये मालूम होने दें, कि आप उसके साथ मिलकर फिजिकल और इमोशनल इंटिमेसी को सुधारने के लिए  काम करना चाहते हैं।


लाइफस्टाइल में बदलाव करना 

रिलेक्स रहें और खुद को प्रोत्साहित करें: चिंता और अपने ऊपर भरोसे की कमी, मूड को बरबाद करने की सबसे बड़ी वजह होती हैं, तो इसलिए आशावादी नजरिया अपनाने की कोशिश करें। सेक्स की तरफ कोन्फ़िडेंस, सेल्फ रिस्पेक्ट और पॉज़िटिव एटिट्यूट के साथ अप्रोच करना, आप दोनों ही पार्टनर के बीच में एक काफी बड़ा बदलाव ला सकता है। अपने परफ़ोर्मेंस से जुड़े हुए नेगेटिव विचारों को अपने  ऊपर मत हावी होने।


मास्टरबेशन के दौरान लंबे वक़्त तक टिके रहें:
मास्टरबेशन के दौरान जल्दी से जल्दी क्लाइमेक्स पर पहुँचने की कोशिश करना भी आपके शरीर को जल्दी से रुकने या सबकुछ जल्दी खत्म करने की आदत डाल देता है। हफ्ते में कुछ बार और सेक्स के कुछ घंटे पहले मास्टरबेशन करना, क्लाइमेक्स को कुछ वक़्त तक आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है, खासकर कि अगर आप मास्टरबेट करते वक़्त लंबे वक़्त तक बने रहने की प्रैक्टिस करते आ रहे हों।


पेल्विक फ्लोर (pelvic floor) एक्सर्साइज़ करना शुरू करें: शीघ्रपतन (ejaculation) को कंट्रोल करने वाली मसल्स की एक्सर्साइज़ करना, आपको लंबे वक़्त तक टिकाए रखने में मदद करेगा। इन मसल्स की पहचान करने के लिए, यूरिन करते वक़्त बीच में रुक जाएँ और उन मसल्स को टाइट कर लें, जो गैस को पास होने से रोकती हैं। इनकी एक्सर्साइज़ करने के लिए, इन्हें 3 सेकंड्स के लिए टाइट करके रखने की कोशिश करें, 3 सेकंड्स के लिए रिलेक्स करें, फिर इसे 5 से 10 बार दोहराएँ।

इन एक्सर्साइजेज़ को शुरुआत में लेटकर या बैठकर करना आसान लगेगा, लेकिन इन्हें खड़े होकर भी करने की कोशिश करें। जब आप मसल्स को स्ट्रेंथ दे रहे हों, रोजाना 10 रिपीटीशन के 3 सेट्स करने का लक्ष्य बनाएँ।

एक्सर्साइज़ करते वक़्त नॉर्मल तरीके से साँस लें और अपनी साँसों को रोककर रखने से बचें।

अल्कोहल या और दूसरे ड्रग्स को लेना कम करें: अल्कोहल और इसी तरह के दूसरे सब्सटेन्स प्रीमेच्योर इजेक्यूलेशन (शीघ्रपतन), इरेक्टाइल डिसफंक्शन (erectile dysfunction) और परफ़ोर्मेंस से जुड़ी दूसरी प्रॉब्लम्स को खड़ा कर देती हैं। सेक्स से पहले ड्रग्स और अल्कोहल को लेना अवॉइड करें और इनके इस्तेमाल के ऊपर रोक या कमी करने की कोशिश करें।

अगर हो सके, तो एक रेगुलर सेक्सुअल पार्टनर की तलाश करें: अगर आप आमतौर पर सिर्फ डेट किया करते हैं, तो अब किसी एक के साथ सेटल होने का फ़ैसला कर लें। किसी एक ही इंसान के साथ इंटिमेट होना, सेक्स के दौरान और ज्यादा कम्फ़र्टेबल और कॉन्फिडेंट बनने में मदद कर सकता है। जब आप किसी के साथ कम्फ़र्टेबल होते हैं, तो ऐसे में उसके साथ मिलकर सेक्स लाइफ के ऊपर सुधार करने के बारे में बात करने में ज्यादा परेशानी नहीं होती है। 
सेक्स के दौरान टेक्निक्स का इस्तेमाल करके देखना 

पहले अपने पार्टनर को एक्साइटेड करने की कोशिश करें: खुद को एक्साइटेड किए बिना, अपने पार्टनर को कुछ अटेन्शन दें या उन्हें आपके सेंसिटिव पार्ट्स को छूने दें। इस तरह से वो आपके एक्साइटमेंट के लेवल से मेल खा सकेंगे और दोनों एक ही वक़्त पर क्लाइमेक्स तक पहुँच सकेंगे।

धीमे मूवमेंट्स यूज करें: अपना वक़्त लेकर आगे बढ्ने से आपको देर तक टिके रहने में मदद मिलेगी, इसलिए डेस्टिनेशन तक पहुँचने की कोशिश की बजाय, अपनी जर्नी को अहमियत देने की कोशिश करें। सेक्स को एक जल्दबाज़ी में खत्म किए जाने वाला काम समझने के बजाय, इसे एक सेन्सुअल डांस की तरह समझने की कोशिश करें।

नई पोजीशन्स अपनाकर देखें: पोजीशन बदलना, आपको उस मौजूदा स्थिति के ऊपर फिर से फोकस करने में मदद कर सकता है और आपके एक्साइटमेंट लेवल को रीसेट कर सकता है। इसके साथ ही नई पोजीशन्स को इस्तेमाल करने से आपके शरीर को इसके नॉर्मल रूटीन से हटके कुछ करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, अगर ऐसी कोई एक पोजीशन है, जो हमेशा आपके लिए कमाल का काम करती है,  तो उसे आखिर के लिए बचाए रखें।
जब आपको क्लाइमेक्स आता नजर आए, तब धीमी, गहरी साँसें लें: क्लाइमेक्स को भांपते ही अपनी साँसों को धीमा करने की वजह से ओर्गेज़्म रिफ़्लेक्स रुक जाता है। हल्की, धीमी साँसें लें और साँस लेते वक़्त अपने पेट को बढ़ाएँ। अपनी साँसों को 2 या 3 सेकंड्स के लिए रोककर रखें, फिर धीरे-धीरे साँसों को छोड़ें

जब तक कि आपको क्लाइमेक्स जाता हुआ नजर न आ जाए, तब तक इस तरह से धीमी साँसें लेना जारी रखें।

एक पल के लिए किसी और चीज़ के बारे में सोचें: जब आप करीब जाते हुए नजर आएँ, तो उस वक़्त पर कुछ ऐसी चीज़ के बारे में सोचकर खुद को डिस्ट्रेक्ट करने की कोशिश करें, जो नॉन-सेक्सुयल हों, जैसे कि आपका काम, एक टीवी शो, या स्कूल। अपने ध्यान को कुछ वक़्त के लिए भटकाने से आपको धीमा पड़ने में और रिलेक्स होने में मदद मिल सकती हैअपना सारा वक़्त बस किसी और चीज़ के बारे में सोचते हुए ही न बिता दें। आपको अभी भी उस पल में शामिल रहना है और आपके पार्टनर को खुश करने की कोशिश भी करना है।

ब्रेक्स लेने की कोशिश करें: इस स्टॉप एंड स्टार्ट मेथड में, जब आप आखिरी पल आता महसूस करते हैं, उस वक़्त जरा सी देर के लिए अपने पार्टनर से दूर जाना शामिल है। लगभग 30 सेकंड्स का एक ब्रेक लें, फिर दोबारा सेक्स करना शुरू कर दें। इस स्टॉप एंड स्टार्ट टेक्निक को उस वक़्त तक रिपीट करते रहें, जब तक कि आप और आपका पार्टनर, दोनों ही क्लाइमेक्स तक पहुँचने को तैयार न हो जाएँ।
आप ब्रेक के दौरान गहरी साँसें ले सकते हैं या फिर किसी और चीज़ के बारे में भी सोच सकते हैं।

एक मोटा कंडोम पहनें: अपने लोकल ड्रगस्टोर में क्लाइमेक्स कंट्रोल कंडोम्स की तलाश करें। ये काफी मोटे होते हैं और कुछ ब्रांड्स में एक तरह का नंबिंग एजेंट होता है, जो कुछ वक़्त के लिए सेंसिटिविटी को कम करने में मदद करता है।

एक कपल्स थेरेपी लेने के बारे में सोचें: परफ़ोर्मेंस से जुड़ी हुई परेशानियों की वजह से रिश्तों के ऊपर एक तरह का तनाव सा बन जाता है। हालांकि इस परिस्थिति को एक टीम की तरह अप्रोच करना फायदेमंद होता है, लेकिन फिर भी आपको अपनी सारी फीलिंग्स को लेकर भी ईमानदार रहना होगा, जिसमें आपकी हताशा भी शामिल है। कपल्स काउंसलिंग आपके और आपके पार्टनर के बीच के कॉम्प्लेक्स इमोशन्स को सुलझाने में मदद करेगी और साथ ही उन सारी समस्याओं को समझने में मदद करेगी, जो आपकी इंटिमेसी पर असर डाल रही है।
आप जब काउंसलिंग के ऊपर डिस्कस कर रहे हों, तो इसे नेगेटिव ढंग से न लें। इसकी बजाय, आप कुछ ऐसा बोल सकते हैं, “हम दोनों अलग-अलग तरह के इमोशन्स को फील कर रहे हैं और मुझे लगता है, कि एक काउंसलर हमें एक नया नजरिया देने में मदद कर सकता है। अपनी फीलिंग्स को एक-दूसरे के ऊपर निकालने के बजाय, बेहतर होगा अगर हम अपनी फीलिंग्स को समझ लें।”


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