Friday, 16 April 2021

चंद्रप्रभा वटी के उपयोग और फायदे





चंद्रप्रभा वटी क्या है? – What is Chandraprabha Vati?


आयुर्वेद में चंद्रप्रभा वटी एक बहुत ही प्रसिद्ध और उपयोगी वटी है। इसके नाम से ही उसके गुणों का भी पता चलता है। चंद्र यानी चंद्रमा, प्रभा यानी उसकी चमक, अर्थात् चंद्रप्रभा वटी के सेवन से शरीर में चंद्रमा जैसी कांति या चमक और बल पैदा होता है। इसलिए शारीरिक कमजोरी पैदा करने वाली लगभग बीमारियों में अन्य दवाओं के साथ चंद्रप्रभा वटी भी दी ही जाती है।
 
चंद्रप्रभा वटी के उपयोग और फायदे (Uses And Benefits Of Chandraprabha Vati )
 
चंद्रप्रभा वटी है मधुमेह में फायदेमंद ( Benefits of Chandraprabh Vati for Diabetes )

 चंद्रप्रभा वटी का उपयोग मधुमेह (Diabetes) के नियंत्रण के लिए करते हैं। डायबिटीज या मधुमेह के मरीजों के लिए यह दवा बहुत फायदेमंद है।


चंद्रप्रभा वटी ठीक करती है किडनी सम्बन्धी रोग – (Benefits of Chandraprabh Vati for Kidney related disorders )

किडनी के खराब होने पर मूत्र की उत्पत्ति बहुत कम होती है जो शरीर में अनेक रोग उत्पन्न करता है एवं मूत्राशय में विकृति होने पर मूत्र आने पर जलन, पेडू में जलन, मूत्र का रंग लाल होना या अधिक दुर्गन्ध होना इन सब में चन्द्रप्रभा वटी अति उपयोगी है। इससे गुर्दों की कार्यक्षमता बढ़ती है जो शरीर को साफ करते हैं। बढ़े हुए यूरिक एसिड (Uric acid) और यूरिया (Urea) आदि तत्वों को यह शरीर से बाहर निकालती है। अगर आप किडनी रोगों से पीड़ित हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेकर चंद्रप्रभा वटी का उपयोग करें
 
चंद्रप्रभा वटी है मूत्र सम्बन्धी विकारों में लाभदायक (Uses of Chandraprabh Vati in Urinary track inflammation )

यह वटी पेशाब की परेशानियों और वीर्य विकार की काफी लाभकारी तथा प्रसिद्ध दवा है। मूत्र आने पर जलन, रुक–रुक कर कठिनाई से मूत्र आना, मूत्र में चीनी आना, मूत्र में एल्ब्युमिन जाना (Albuminuria), मूत्राशय की सूजन तथा लिंगेन्द्रिय की कमजोरी इससे शीघ्र ठीक हो जाती है।


पतंजलि चंद्रप्रभा वटी से बढ़ाएं शारीरिक और मानसिक शक्ति ( Chandraprabh Vati works like a tonic )

पतंजलि चंद्रप्रभा वटी के नियमित सेवन से शारीरिक तथा मानसिक शक्ति मे वृद्धि होती है। यह थोड़े से श्रम से हो जाने वाली थकान और तनाव आदि को कम करती है, शरीर में स्फूर्ति लाती है और स्मरण शक्ति (memory) को बढ़ाती है। चंद्रप्रभा वटी के फायदे को देखते हुए इसे सम्पूर्ण स्वास्थ्य टॉनिक के रूप मे प्रयोग किया जाता है। इसके साथ लोध्रासव या पुनर्नवासव का भी प्रयोग करना चाहिए। टॉनिक होने के अलावा चंद्रप्रभा वटी शरीर को विभिन्न प्रकार के टॉक्सिन (toxins) से मुक्त करने का भी काम करती है।


वीर्य सम्बन्धी रोगों में चंद्रप्रभा वटी के लाभ (Chandraprabh Vati improves Sperm Quality )

पुरुषों में अधिक शुक्र क्षरण या स्त्रियों में अधिक रजस्राव होने से शारीरिक कान्ति नष्ट हो जाती है, शरीर का रंग पीला पड़ना, थोड़े ही परिश्रम से जल्दी थक जाना, आँखे अन्दर धँस जाना, भूख न लगना आदि विकार पैदा हो जाते है ऐसे में इस वटी का प्रयोग करने से लाभ मिलता है। यह रक्तादि धातुओं की पुष्टि करती है। यह स्पर्मकाउंट (sperm count) को बढ़ाती है, ब्लड सेल यानी रक्त कोशिकाओं का शोधन तथा निर्माण करती है। स्वप्नदोष (Nightfall) या शुक्रवाहिनी नाड़ियों के कमजोर पड़ जाने पर इसे गुडुची के क्वाथ से लेना चाहिए।
 
स्त्री रोगों में चंद्रप्रभा वटी के लाभ (Benefits of Chandraprabha Vati for women)

स्त्री रोगों के लिए भी यह एक अच्छी दवा है। यह गर्भाशय की कमजोरी दूर कर उसे स्वस्थ बनाती है। गर्भाशय के बढ़े आकार, उसकी रसौली, बारंबार गर्भपात आदि समस्याओं में चंद्रप्रभा वटी का सेवन रामबाण का काम करता है। यह गर्भाशयसंबंधी रोगों को दूर कर गर्भाशय को बल प्रदान करती है। अधिक मैथुन या अधिक संतान होने अथवा विभिन्न रोगों से गर्भाशय के कमजोर हो जाने, कष्ट के साथ मासिक धर्म आना (period pain), लगातार 10-12 दिन तक रजस्राव होना इन सब में चन्द्रप्रभा वटी को अशोक घृत या फलघृत के साथ लेना चाहिए।


चंद्रप्रभा वटी एक अच्छी दर्दनिवारक भी है (Chandraprabha Vati relieves pain )

दर्द से राहत दिलाने में भी चंद्रप्रभा वटी फायदेमंद है। यूरिक एसिड कम करने के गुण के कारण जोड़ों के दर्द, गठिया वात के दर्द, जोड़ों के सूजन आदि को यह कम और समाप्त करती है। इसके सेवन से स्त्रियों में मासिक धर्म की अनियमितताएं भी ठीक होती हैं और उसके कारण होने वाले पेड़ू के दर्द, कमर दर्द आदि में आराम मिलता है।


चंद्रप्रभा वटी के अन्य लाभ (Other Benefits of Chandraprabha Vati )

मंदाग्नि, अजीर्ण, भूख न लगना कमजोरी महसूस करना इन सब में चंद्रप्रभा वटी लाभ करती है। मल–मूत्र के साथ वीर्य का गिरना, बार–बार मूत्र आना, ल्यूकोरिया (leukorrhea) , वीर्य दोष, पथरी (kidney stone), अंडकोषों में हुई वृद्धि, पीलीया (jaundice), बवासीर (Piles), कमर दर्द (backache), नेत्ररोग तथा स्त्री-पुरुषों के जननेन्द्रिय से संबंधित रोगों को यह ठीक करती है।


चंद्रप्रभा वटी का उपयोग कैसे करें – (How to use Chandraprabha Vati)

सामान्यतः इसकी गोलियां बनी होती हैं और दो-दो गोलियां सुबह-शाम सामान्य पानी या दूध के साथ लेनी चाहिए। कमजोरी आदि की स्थिति में इसे दूध के साथ लिया जाना चाहिए अथवा वैद्य की सलाह के अनुसार ही इसका सेवन करना चाहिए।

Tuesday, 16 March 2021

सफेद मूसली के फायदे और उपयोग (Safed Musli Benefits andUses )





सफेद मूसली का परिचय (Introduction of Safed Musli)


सफेद मूसली (safed musli) को शक्तिवर्द्धक जड़ी बूटी माना जाता है, इसलिए आयुर्वेद में औषधि के रूप में इसका बहुत इस्तेमाल किया जाता है। सफेद मूसली की जड़ और बीज, विशेष रूप से औषधि के रूप में बहुत फायदेमंद होते हैं। इसकी जड़ों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम आदि अत्यधित मात्रा में पाए जाते हैं। इस लेख में हम आपको सफेद मूसली के अनजाने गुणों के बारे में विस्तार से बतायेंगे|


सफेद मूसली क्या है? (What is Safed Musli?)

मूसली फूल सफेद रंग के होते हैं। इसकी जड़ मोटी तथा गुच्छों में होती है। इसका कंद (bulb) मीठा, कामोत्तेजक और कफ को कम करने में मदद करता है। यह स्तनों में दूध को बढ़ाने में मदद करता है। यहां तक सफेद मूसली मोटापा या ओबेसिटी (obesity), अर्श या पाइल्स (piles), सांसों के रोग, खूनी की कमी या एनिमिया (anemia) में भी लाभ पहुंचाता है। आप इसका लाभ ह्रदय विकार (heart disease) तथा डायबिटीज (diabetes) जैसे रोगों में भी ले सकते हैं।

सफेद मूसली का वानस्पतिक नाम Chlorophytum borivilianum (क्लोरोफायटम बोरिबिलिएनम्) है। सफेद मूसली Liliaceae (लिलिएसी) कुल का है।



सफेद मूसली के फायदे उपयोग (Safed Musli Benefits and Uses )
 
ब्रेस्टमिल्क को बढ़ाने में उपयोगी सफेद मूसली (Safed Musli Increase Breast Milk)

माताओं के स्तनों में दूध बढ़ाने के लिए सफेद मूसली फायदे का लाभ उठाना चाहिए। इसके लिए सफेद मूसली का प्रयोग इस तरह से करना चाहिए। 2-4 ग्राम सफेद मूसली के चूर्ण में बराबर भाग मिश्री मिला लें। इसे दूध के साथ सेवन करें। इससे स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।
 
दस्त को रोकने में सफेद मूसली के फायदे (Safed Musli Benefits to Fight Diarrhoea )

सफेद मूसली का सेवन करने पर दस्त की परेशानी से निजात मिल सकता है। 2-4 ग्राम सफ़ेद मूसली की जड़ के चूर्ण को दूध में मिला लें। इसका प्रयोग करने से दस्त, पेचिश तथा भूख की कमी जैसी परेशानियों में लाभ मिलता है।
 
पेट की बीमारी में सफेद मूसली के फायदे (Safed Musli to Treat Digestive Disorder)

पेट में गड़बड़ी, पेट दर्द, खाना ना खाने की इच्छा, दस्त जैसी समस्याएं होने पर सफेद मूसली का सेवन करें। इसके लिए सफेद मूसली के कंद के चूर्ण का सेवन करना चाहिए। 1-2 ग्राम कंद (bulb) के चूर्ण का सेवन करने से दस्त, पेट की गड़बड़ी, पेट दर्द और भूख ना लगने की समस्या ठीक होती है।

मूत्र संबंधी समस्या में सफेद मूसली के फायदे (Safed Musli Powder Benefits in Urinary Disease)

कई लोग को पेशाब करते समय दर्द होता है। इस रोग में मूसली बहुत फायदेमंद होता है। मूसली जड़ के चूर्ण को 1-2 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इससे राहत मिलती है।

सुजाक रोग में सफेद मूसली चूर्ण के फायदे ( Safed Musli Benefits in Gonorrhea )

सुजाक एक तरह का बैक्टीरियल इंफेक्शन से संबंधित रोग है, जो यौन संपर्क के कारण होता है। अगर इसका समय पर इलाज ना किया गया तो नपुंसक होने की संभावना भी रहती है। सफेद मूसली के चूर्ण का सेवन करने से सुजाक में लाभ मिलता है।
 
ल्यूकोरिया में सफेद मूसली के फायदे (Benefits of Safed Musli in Leucorrhea )

ल्यूकोरिया महिलाओं को होने वाली एक बीमारी है। इस रोग के कारण महिलाओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। आप सफेद मूसली का प्रयोग करके ल्यूकोरिया को ठीक करने में मदद पा सकते हैं। इसको ठीक करने के लिए 1-2 ग्राम सफेद मूसली के कंद चूर्ण का सेवन करें।
 
कमजोरी दूर करने में सफेद मूसली के फायदे (Safed Musli Helps to Fight Weakness)

कभी-कभी असंतुलित आहार नहीं ले पाने, या फिर अन्य कारणों से लोगों को शारीरिक कमजोरी की शिकायत हो जाती है। इसमें सफेद मूसली चूर्ण का सेवन करने से लाभ मिलता है। सफेद मूसली के कंद के 2-4 ग्राम चूर्ण में मिश्री मिला लें। इसे दूध के साथ सेवन करें। सफेद मूसली का उपयोग सामान्य कमजोरी तथा लिंग से संबंधित कमजोरी दूर करने में होती है।
 
शुक्राणु (sperm) दोष को करे कम सफेद मूसली (Safed Musli Benefits to Boost Sperm Quality)

· कई पुरुषों में शुकाणु दोष की समस्या होती है, और इसके कारण वे काफी परेशान रहते हैं। शुक्राणु की कमी, पेशाब में जलन आदि रोगों में सफेद मूसली का प्रयोग लाभ पहुंचाता है। आप 2-4 ग्राम मूसली के चूर्ण में, समान मात्रा के शर्करा डाल लें। इसे गाय के दूध के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है।

· 1-2 ग्राम जड़ के चूर्ण में समान मात्रा में मिश्री मिला लें। इसका सेवन करने से कमजोरी दूर होती है, और वीर्य दोष (Semen) ठीक होता है।

· सफेद मूसली की जड़ के 1-2 ग्राम चूर्ण में बराबर भाग में मिश्री मिला लें। इसका सेवन करने से सामान्य शारीरिक दुर्बलता और शुक्र-दुर्बलता की परेशानी ठीक होती है।
 
गठिया के दर्द में सफेद मूसली के फायदे ( Safed Musli Benefits to Get Relief from Rheumatoid Arthritis)

गठिया के लिए सफेद मूसली बहुत फायदेमंद होता है। सफेद मूसली के कंद (bulb) को पीसकर लगाने, या सफ़ेद मूसली चूर्ण का सेवन करने से गठिया के दर्द से आराम मिलता है।
 
कामेच्छा को बढ़ाने में लाभकारी सफेद मूसली (Safed Musli Benefits in Sexual Dysfunction)

कई बार काम के तनाव के कारण, या किसी शारीरिक समस्या के कारण, या फिर दवा के साइड इफेक्ट के कारण सेक्स करने की इच्छा में कमी आ जाती है। सफेद मूसली के साथ, समान मात्रा में गुडूची सत्त्, कौंञ्च बीज, गोखरू, सेमलकंद, आँवला तथा शर्करा लें। इनका चूर्ण बना लें। इसे 2-4 ग्राम की मात्रा को घी तथा दूध में मिलाकर पीने से सेक्स करने की इच्छा बढ़ती है। पुरूषों के इस यौन समस्या में सफेद मूसली का उपयोग बहुत लाभकारी होता है।
 
सफेद मूसली का उपयोगी भाग (Useful Part of Safed Musli)

आयुर्वेद में सफेद मूसली के कंद, जड़ और बीज का प्रयोग औषधि के लिए सबसे ज्यादा किया जाता है।
 
सफेद मूसली का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Consume Safed Musli )

बीमारी के लिए सफेद मूसली का सेवन और इस्तेमाल कैसे करना चाहिए, इसके बारे में पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए सफेद मूसली का उपयोग कर रहे हैं, तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

-2-4 ग्राम सफेद मूसली का सेवन चिकित्सक के परमर्शानुसार कर सकते हैं।
 
सफेद मूसली कहां पाया या उगाया जाता है? (Where is Safed Musli Found or Grown?)

यह पश्चिमी हिमालय, पंजाब, उत्तराखण्ड में लगभग 1600 मीटर की ऊंचाई तक मिलता है। मध्य भारत में इसकी खेती की जाती है। दो तरह के पौधों का प्रयोग सफेद मूसली (swet musli) के लिए किया जाता है जो गुणों में लगभग समान होते हैं।




Thursday, 4 March 2021

गोखरू के फायदे और उपयोग (Benefits and Uses of Gokshura )





गोखरू के फायदे और उपयोग (Benefits and Uses of Gokshura )


गोखरू के सामान्य फायदों  के बारे में तो सुना है लेकिन ये किस तरह और कौन-कौन से बीमारियों के लिए फायदेमंद है और गोखरू का उपयोग कैसे करना चाहिए चलिये इसके बारे में जानते हैं।

लो स्पर्म काउन्ट में फायदेमंद गोखरू -

अगर स्पर्म काउन्ट कम होने के कारण आपके पिता बनने में समस्या उत्पन्न हो रही है तो गोखरू का सेवन इस तरह से करें। गोखरू के 20 ग्राम फलों को 250 मिली दूध में उबालकर सुबह शाम पिलाने से स्पर्म या वीर्य संबंधी समस्याएं कम होती है। इसके अलावा 10 ग्राम गोखरू एवं 10 ग्राम  शतावरी को 250 मिली दूध के साथ उबालकर पिलाने से स्पर्म का काउन्ट और क्वालिटी बढ़ती है तथा शरीर को शक्ति मिलती है।

 पेशाब संबंधी बीमारी में गोखरू के फायदे-

मूत्र संबंधी बहुत तरह की समस्याएं आती हैं, जैसे- मूत्र करते समय दर्द और जलन, रुक-रुक पेशाब आना, कम पेशाब आना आदि। ऐसे समस्याओं में गोखरू बहुत काम आता है।

· 20-30 मिली गोखरू काढ़ा  में 125 मिग्रा यवक्षार या मधु (एक चम्मच) डालकर दिन में दो-तीन बार पिलाने से मूत्र संबंधी समस्याओं में लाभ होता है।

· गोखरू की जड़ (10-15 ग्राम) और समान मात्रा में चावलों को एक साथ अच्छी तरह मिलाकर पानी में उबालकर पिलाने से मूत्रवृद्धि होती है।

· 2 ग्राम  गोखरू चूर्ण में 2-3 नग काली मिर्च और 10 ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह, दोपहर और शाम सेवन करने से मूत्र संबंधी समस्याओं में लाभ होता है।
 
सिरदर्द में गोखरू काढ़ा के फायदे -

आजकल के तनाव भरे जिंदगी में सिर दर्द की बीमारी का शिकार ज्यादा से ज्यादा लोग होने लगे हैं। 10-20 मिली गोखरू काढ़ा (Gokhru kadha) को सुबह-शाम पिलाने से पित्त के बढ़ जाने के कारण जो सिर दर्द होता है उससे आराम मिलता है। इस तरह गोखरू का उपयोग करने से लाभ होगा।

दमा से दिलाये राहत -

आजकल के प्रदूषण भरे वातावरण के कारण बहुत लोग दमे का शिकार होने लगे हैं। गोखरू का सेवन इस तरह से करने पर दमे से जल्दी आराम मिलता है। 2 ग्राम गोखुर के फल चूर्ण  को 2-3 नग सूखे अंजीर के साथ दिन में तीन बार कुछ दिनों तक लगातार सेवन करने से दमा में लाभ होता है। गोक्षुर तथा अश्वगंधा  को समान मात्रा में लेकर उसके सूक्ष्म चूर्ण में 2 चम्मच मधु मिलाकर दिन में दो बार 250 मिली दूध के साथ सेवन करने से सांस संबंधी समस्या एवं कमजोरी में लाभ मिलता है।


हाजमा बढ़ाये गोखरू का काढ़ा -

गोखरू का काढ़ा पिलाने से जिसकी हजम शक्ति कमजोर है उसको खाना हजम करने में आसानी होती है। गोखरू के 30-40 मिली गोखरू काढ़ा (Gokhru Kadha) में 5 ग्राम पीपल के चूर्ण का मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पीने से पाचन-शक्ति बढ़ती है। यह गोखरू का उपयोग बहुत ही फायदेमंद है।


दस्त रोकने में फायदेमंद- 

अगर मसालेदार खाना खाने के बाद दस्त हो रहा है तो गोखरू बहुत काम आता है। 500 मिग्रा गोक्षुरफल चूर्ण (गोखरू चूर्ण ) को मट्ठे के साथ दिन में दो बार खिलाने से अतिसार और आमातिसार में लाभ होता है।


पथरी या अश्मरी में गोखरू के फायदे -

आजकल के जीवनशैली और प्रदूषित आहार के कारण पथरी की समस्या से लोग परेशान रहते हैं। गोखरू के सेवन से पथरी को प्राकृतिक तरीके से निकालने में मदद मिलती है। 5 ग्राम गोखरू चूर्ण  को 1 चम्मच मधु के साथ दिन में तीन बार खाने के बाद ऊपर से बकरी का दूध पिलाने से अश्मरी टूट-टूट कर निकल जाती है।


गर्भाशय शूल या यूटेरस के दर्द में गोखरू के फायदे -

अगर किसी कारण गर्भाशय में दर्द हो रहा है तो गोखरू का सेवन बहुत गुणकारी  होता है। 5 ग्राम गोखरू फल, 5 ग्राम काली किशमिश और दो ग्राम मुलेठी इनको पीसकर सुबह शाम सेवन करने से गर्भाशय के दर्द से राहत मिलती है।
 
आमवात या रूमाटाइड के दर्द से दिलाये आराम गोखरू का उपयोग -

उम्र के बढ़ने के साथ जोड़ो में दर्द से सब परेशान रहते हैं। गोखरू फल में समान भाग सोंठ चतुर्थांश का काढ़ा बनाकर सुबह एवं रात में सेवन करने से कमर दर्द, जोड़ो के दर्द से आराम मिलती है।


चर्मरोग में गोखरू के फायदे 

आज के प्रदूषण भरे वातावरण में त्वचा रोग होना लाज़मी हो गया है। गोखुर फल को पानी में पीसकर त्वचा में लेप करने से खुजली, दाद आदि त्वचा संबंधी रोगों में लाभ  होता है।
 

 
ज्वर या बुखार में गोखरू के फायदे 

अगर मौसम के बदलने के साथ-साथ बार-बार बुखार आता है तो गोखरू का सेवन बहुत फायदेमंद  हैं। 15 ग्राम गोखरू पञ्चाङ्ग को 250 मिली जल में उबालकर, काढ़ा (Gokhru Kadha) बना लें। काढ़ा को चार बार पिलाने से ज्वर के लक्षणों से राहत मिलती है। इसके अलावा 2 ग्राम पतंजलि गोखरू पञ्चाङ्ग चूर्ण के नियमित सेवन करने से बुखार कम होता है।


रक्तपित्त ((कान-नाक से खून बहना) में गोखरू के फायदे -

अगर रक्तपित्त के समस्या से पीड़ित हैं तो गोखरू का ऐसे सेवन करने से लाभ मिलता है। 10 ग्राम गोखुर को 250 मिली दूध में उबालकर पिलाने से रक्तपित्त में लाभ होता है।
 
गोखरू का उपयोगी भाग (Useful Parts of Gokhru)
 
गोखरू का औषधि के रूप में पत्ता, फल, तना और पञ्चाङ्ग का प्रयोग किया जाता है।
 
गोखरू का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए?

बीमारी के लिए गोखरू के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए गोखरू का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

चिकित्सक के परामर्शानुसार-

गोखरू चूर्ण -3-6 ग्राम और गोखरू काढ़े -20-40 मिली का सेवन कर सकते हैं।
 
यह वनस्पति भारतवर्ष के सभी प्रदेशों, विशेषत गर्म प्रदेशों में बहुत से पाई जाती है।




Friday, 26 February 2021

लिंग (पेनिस) पर होने वाले छोटे-छोटे दाने कही यौन संचारित बीमारी की तरफ इशारा तो नहीं ? जाने डॉ0 बी0 के0 कश्यप (sexologist ) से -



लिंग (पेनिस) पर होने वाले छोटे-छोटे दाने कही यौन संचारित बीमारी की तरफ इशारा तो नहीं ? जाने डॉ0 बी0 के0 कश्यप (sexologist ) से -


कई बार पुरुषों के लिंग पर छोटे-छोटे दाने हो जाते हैं, जिसे वे सामान्य दाना समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। आप ये जान लें कि पेनिस पर पिंपल्स या रेड बंप्स की समस्या कई बार किसी गंभीर इंफेक्शन या यौन संचारित बीमारी की तरफ भी इशारा करते हैं।

पेनिस  के प्रति लापरवाही आपके लिए हानिकारक और अनहेल्दी हो सकता है। इससे लिंग की सेहत प्रभावित हो सकती है। कई बार पुरुषों के लिंग पर छोटे-छोटे दाने हो जाते हैं, जिसे पुरुष सामान्य दाना या फोड़े समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। आप ये जान लें कि पेनिस पर पिंपल्स या रेड बंप्स की समस्या (Pimples on male penis) कई बार किसी गंभीर इंफेक्शन (penis infectleion) या यौन संचारित बीमारी (Sexually transmitted disease) की तरफ भी इशारा करते हैं। इसके साथ ही कई बार लिंग पर कई अन्य कारणों से भी दानें, फोड़े या संक्रमण हो सकते हैं। जानें, लिंग पर छोटे बंप्स (Bumps) या पिंपल्स होने के अन्य कारण क्या हैं:-
 
पेनिस में फोर्डाइस स्पॉट्स (Fordyce Spots)

फोर्डाइस स्पॉस्ट (Fordyce Spots) सफेद-पीले धब्बे होते हैं, जो आपके होंठों के किनारे या आपके गालों के अंदर हो सकते हैं। साथ ही पुरुषों के लिंग  या अंडकोश (Scrotum) पर दिखाई दे सकते हैं। यह महिलाओं की लेबिया (labia) पर भी हो सकता है। ये स्पॉट्स बढ़ी हुए तेल ग्रंथियां होती हैं, जो पूरी तरह से सामान्य, हानिरहित और दर्द रहित होते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, फोर्डाइस स्पॉस्ट 70 से 80 प्रतिशत वयस्कों में होते हैं। यह लिंग या आंतरिक सतह पर भी स्थित होते हैं। ये लाल या सफेद रंग के होते हैं। यह खुद ब खुद ठीक हो जाता है।

सावधानी :-

बेशक, ऐसी समस्याएं दर्दरहित होती हैं, लेकिन यदि आप अपने जननांगों पर धब्बे पाते हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करें। वे Fordyce स्पॉट की बजाय STD के लक्षण भी हो सकते हैं।

पर्ली पेनाइल पेप्युल्स (Pearly Penile Papules)

पर्ली पेनाइल  पेप्युल्स पुरुषों के लिंग के मुंह पर होता है। यह एक अदृश्य दाने जैसा होता है, जो लगभग प्रत्येक पुरुषों के पेनिस (Penis problem) पर इस जगह पर मौजूद होता है। जब यह दाने बड़े हो जाते हैं, तो दर्द होने लगता है। इन बड़े दानों को ही पर्ली पेनाइल पेप्युल्स कहते हैं। हालांकि, इसमें ना तो पस होता है, ना खुजली, ना रक्तस्राव और ना ही ये बहुत ज्यादा हानिकारक होता है। रंग भी मांसपेशियों की ही तरह होता है। ये दाने एक या एक से अधिक पंक्ति में होते हैं। ये होता क्यों है, इसके कारण मालूम (penis ke rog aur ilaj in hindi) नहीं, लेकिन यह कोई यौन संबंध बनाने से होना वाला रोग नहीं है।

मॉल्युस्कम कॉन्टेजियोसम (Molluscum Contagiosum)

मॉलुस्कम कन्टेजियोसम देखने में पेनिस की त्वचा के रंग समान होते हैं। हालांकि, इसमें भी दर्द या खुजली नहीं होती है और धीरे-धीरे खुद ही ठीक हो जाते हैं।

जेनाइटल वॉर्ट्स (Genital Warts)

जेनाइटल वॉर्ट्स को खतरनाक माना गया है, क्योंकि ये कई बार यौन संचारित बंप्स होते हैं। इनमें दर्द नहीं होता, ये त्वचा के रंग के समान ही होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे ये बढ़ने लगते हैं। फिर ये समूह में घाव के रूप में बदल जाते हैं। ऐसी समस्या आपको दिखे, तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

लिंग में खुजली होना (Itching In Penis)

खुजली की समस्या सिर्फ शरीर की त्वचा पर ही नहीं, बल्कि प्राइवेट पार्ट्स पर भी हो सकती है। यह एक कॉमन प्रॉबल्म है, जो पुरुषों और महिलाओं दोनों को हो सकता है। पुरुषों के जन्नांग में खुजली होने से घाव हो सकते हैं। इसमें पिंपल्स जैसे दाने होते हैं, जिसमें आपको खुजली महसूस होती है। डॉक्टर की सलाह जरूर लें, क्योंकि इसे नजरअंदाज करने से इंफेक्शन बढ़ कर आसपास की त्वचा को भी प्रभावित कर सकता है।

Tuesday, 16 February 2021

सेक्स टाइमिंग, पौरुष शक्ति और वीर्य बढ़ाने के घरेलू उपाय:




सेक्स टाइमिंग, पौरुष शक्ति और वीर्य बढ़ाने के घरेलू उपाय:


सेक्स पावर बढ़ाने के लिए घरेलू उपायों को अधिक कारगर माना जाता है। ये नेचुरल चीजें आसानी से मिल जाती हैं। इसलिए इनका सेवन करना सही होता है। मगर किसी को पौरुष शक्ति (सेक्शुअल पॉवर) बढ़ाने के घरेलू उपायों की सही जानकारी नहीं होने पर वे अंग्रेजी दवाओं या नीम-हकीम के चक्कर में पड़ जाते हैं।

ऐसे में पैसे के साथ सेहत को भी नुकसान पहुंचता है। जीवन या पैसे दोनों को दाव पर लगाने से बचाने से पहले एक बार इन घरेलू चीजों के बारे में जान लें ताकि आपकी सेक्स टाइमिंग या सेक्स पावर बढ़ जाए। आप अपनी सेक्स लाइफ का आनंद भरपूर तरीके से ले सकें। इन चीजों को खाने से यदि फायदा न हुआ तो यकीनन नुकसान भी नहीं पहुंचने वाला है। चलिए हम इस तरह की कुछ चीजों के बारे में जान लेते हैं।

कमजोर पौरुष शक्ति के कारण सेक्स लाइफ बोरिंग हो जाती है। इस वजह न आप खुश रह सकेंगे और न ही आपकी पार्टनर। यदि आपको ऑर्गेज्म चाहिए तो सेक्स पावर बढ़ानी चाहिए। इसको प्राकृतिक तरीके से बढ़ाएं ताकि आगे चलकर आपके शरीर पर किसी प्रकार का दुष्प्रभाव न हो। अक्सर लोग इस खुशी के लिए खतरनाक दवाइयों का सेवन करना शुरू कर देते हैं। इस वजह से बाद में वे कई प्रकार की बीमारी का शिकार हो जाते हैं।
 
सेक्स पावर कम होने के कारण

यौन शक्ति कम होने के कई कारण हैं। मानसिक और शारीरिक दो मुख्य कारक माने जाते हैं। अब आपको अपने कारण को समझना होगा। उसके अनुरूप ही उपचार करना चाहिए। ये घरेलू उपाय उन पुरुषों के लिए अधिक कारगर हैं जो शारीरिक रूप से दुर्बल होते हैं। वैसे अधिकतर पुरुष शारीरिक कमजोरी के कारण सेक्स लाइफ का आनंद नहीं ले पाते हैं।

· अनहेल्दी फूड (Junk Foods)

· प्रोटीन की कमी (Less Protein)

· स्ट्रेस भरी लाइफ (Stressful Life)

· नशीले पदार्थों का अत्याधिक सेवन (Drug Addiction)

अगर आपको उपरोक्त में से किसी भी चीज की आदत है तो उसको फौरन छोड़ें। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो शायद ये घरेलू उपचार भी काम न करें। इसलिए इस तरह की अनहेल्दी आदतों को छोड़ दें।

· लिंग साइज के बारे में सोचना

· पोर्न साइट देखकर क्रेजी होना

· घंटों सेक्स करने के बारे में सोचना

कई लोग इस तरह की गलतफहमी में भी घिर जाते हैं। इस वजह से भी अपनी सेक्स पावर को अनदेखा कर देते हैं जबकि उनका सब कुछ ठीक होता है। इसलिए अपनी सेक्स परफॉर्मेंस का सही आकलन करें।

घरेलू उपाय: 


1. छुहारा ( Chuhare / Dry Dates)

छुहारे में कैल्शियम की मात्रा भरपूर मिलती है। सेक्स पावर बढ़ाने के लिए इसका नियमित रूप से सेवन करना लाभकारी होता है। छुहारे को दूध में उबालकर रात में खाने से यौन इच्छा और यौन शक्ति बढ़ सकती है। सेक्स पावर बढ़ाने के लिए रोजाना 100 ग्राम छुहारे खाएं। इसके अलावा आप खजूर का सेवन भी कर सकते हैं।
 
2. आंवला (Amla)

आंवले को सेहतमंद बताया गया है। आंवला के सेवन से आंख, बाल को फायदा मिलता है। इसके अलावा आंवले का सेवन सेक्स पावर बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। अगर सेक्स लाइफ बेहतर करने के लिए इसका सेवन करना चाहते हैं तो आंवले के चूर्ण में एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार खाएं।
 
3. अश्वगंधा (Ashwagandha)

यह एक सदियों पुरानी रसायन औषधि है। इसके सेवन से खासतौर पर शुक्र धातु की मात्रा काफी बढ़ जाती है। अश्वगंधा टेस्टोस्टेरॉन (Testosterone) को बूस्ट करने का काम करती है। अश्वगंधा का इस्तेमाल अधिकतर पुरुष सेक्स पावर बढ़ाने के लिए करते हैं। इससे वाकई फायदा भी मिलता है। इसके बेहतर परिणाम के लिए आधा चम्मच अश्वगंधा के चूर्ण को दूध के साथ सुबह-शाम लें।
 
4. उड़द की दाल

चना, मूंग, मसूर, अरहर दाल की तरह उड़द की दाल को बहुत कम लोग खाना पसंद करते हैं। मगर अब आप इसका सेवन करने से खुद को रोक नहीं सकते हैं। उड़द की दाल का इस्तेमाल यौन शक्ति बढ़ाने में मदद करता है। आधा चम्मच उड़द की दाल को कौंच (Kaunch) के साथ पीसकर खाएं। इसके अलावा आप खाने में भी इस दाल का सेवन करें।
 
5. लहसुन और प्याज का सेवन

हम हर दिन सब्जी के साथ लहसुन और प्याज का सेवन करते हैं। लेकिन इसका इस्तेमाल अलग तरीके से करना फायदेमंद हो सकता है। लहसुन को सेक्स शक्ति बढ़ाने में कारगर माना जाता है। हर दिन लहसुन की दो-तीन कलियां खाने से फायदा मिल सकता है। इसके अलावा प्याज भी सेक्स शक्ति बढ़ा सकती है। खासतौर पर सफेद प्याज का सेवन करना सही माना जाता है। सलाद में भी इसका उपयोग कर सकते हैं।
 
6. शिलाजीत

आयुर्वेद में शिलाजीत को सेक्सवर्धक और वीर्यवर्धक औषधि माना गया है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार शिलाजीत का सेवन दूध के साथ शुरू कर सकते हैं। शिलाजीत खरीदते वक्त नकली-असली का पहचान कर लें तब जाकर फायदा मिल सकता है।

डिस्क्लेमर : यदि आप दिल की बीमारी या मधुमेह से परेशान हैं तो किसी भी तरह की चीजों के सेवन से पहले एक बार डॉक्टर की परामर्श अवश्य लें।




Monday, 18 January 2021

संबंध बनाते समय क्या आप को भी होती है अपने परफॉर्मेंस की चिंता तो ये तरीके आजमायें -



यौन संबंध बनाते समय क्या आप को भी होती है अपने  परफॉर्मेंस की चिंता, तो  ये तरीके आजमायें -


रिलेशनशिप में कपल्स एक दूसरे की खुशी और संतुष्टि का ध्यान रखते हैं। शारीरिक संबंध बनाने के दौरान वो अपनी परफॉर्मेंस के बारे सोचते रहते हैं ताकि वो अपने पार्टनर का पूरा साथ दे सकें।        वो चाहते हैं कि पार्टनर, सेशन को पूरी तरह से एंजॉय करे। उनके उस सुख के लिए अपने प्रदर्शन को लेकर चिंतित रहते हैं। कई बार यह चिंता लोगों में विकार बन जाता है।
सेक्शुअल मेडिसीन रिव्यू में प्रकाशित शोध की मानें तो 9 से 25 फीसदी पुरुष स्तंभन दोष व शीघ्रपतन होने संबंधी चिंता से परेशान रहते हैं। वहीं 6 से 16 फीसदी महिलाओं में यौन संबंध स्थापित करने की इच्छा बड़ी अड़चन बनती है। यदि आप भी शारीरिक संबंध के दौरान अपनी परफॉर्मेंस के बारे में ही चिंतित रहते हैं तो इन टिप्स की मदद से आप उन पलों का बेहतर ढंग से आनंद ले सकते हैं।

शारीरिक संबंध बनाते समय चिंता को रखें खुद दूर - 

व्यक्ति जब किसी मामले को लेकर तनाव और अवसाद में रहता है तो इसका सीधा असर उसकी सेक्स लाइफ पर पड़ता है। सेक्शुअल मेडिसीन रिव्यू में प्रकाशित शोध के अनुसार शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा के दौरान जब चिंता या तनाव रहता है तो वह शरीर के नर्व सिस्टम को प्रभावित करता है। यदि कपल्स अपने परफॉर्मेंस को लेकर इस चिंता करने की आदत पर काबू पा लें तो उनकी सेक्स लाइफ काफी बेहतर हो सकती है। 

मेडिकल चेकअप करवाएं -

यदि किसी व्यक्ति को गठिया, शुगर या एंडोमेट्रियोसिस से जुड़ी परेशानी है तो वह शारीरिक संबंध बनाने के दौरान तनाव में आ सकते हैं। 
फिजिकल रिलेशन के समय में रक्त संचार प्रभावित होता है। ऐसी स्थिति में एक बार शारीरिक जांच जरूर करवा लेनी चाहिए। यदि इंटिमेट पलों के दौरान तनाव के सही कारणों का पता चल जाए तो उस स्थिति में सुधार लाना ज्यादा आसान होगा। 

अपने शरीर को समझें 

पार्टनर के सामने अपनी शारीरिक बनावट को लेकर कई लोग खुद को हीन समझने लगते हैं। वहीं कई बार संबंध बनाने के समय अपने शरीर के प्रदर्शन को लेकर लोग शर्म करने लगते हैं। रिलेशनशिप में एक दूसरे पर भरोसा करना बहुत जरुरी है। साथ ही आपको अपने शरीर की बनावट को लेकर खुद सहज होना होगा। 

फिजिकल रिलेशनशिप से जुड़ी शिक्षा 

वर्तमान समय में भी लोग शारीरिक संबंध से जुड़ी किसी भी तरह की दिक्कत पर खुल कर बात नहीं करते हैं और डॉक्टर के पास जाने से भी हिचकिचाते हैं। इस वजह से कई बार छोटी सी परेशानी बड़ी समस्या बन जाती है। इस बारे में सही जानकारी होना जरुरी है। 

पार्टनर से करें बात 

आपको अपने पार्टनर के साथ खुलकर बातचीत करनी चाहिए। इंटिमेट होने से पहले अच्छा संवाद काफी मदद करता है। आप फिजिकल रिलेशन के बारे में क्या सोचते हैं उस पर चर्चा करें और साथ ही पार्टनर की राय भी जानें। आप पार्टनर से जितनी शर्म रखेंगे आपकी परफॉर्मेंस पर उतना ही असर पड़ेगा। 

तनाव से बचने और मन शांत रखने के लिए टिप्स 

यदि आपका मन शारीरिक संबंध में अपने प्रदर्शन को लेकर परेशान रहता है तो आपको योग तथा ध्यान का सहारा लेना चाहिए। आपको अपने
खानपान में ज्यादा तेल या वसायुक्त भोजन को शामिल नहीं करना चाहिए।


चंद्रप्रभा वटी के उपयोग और फायदे

चंद्रप्रभा वटी क्या है? – What is Chandraprabha Vati? आयुर्वेद में चंद्रप्रभा वटी एक बहुत ही प्रसिद्ध और उपयोगी वटी है। इसके नाम से ही उसके...