Saturday, 8 June 2019

पुरुष बांझपन (Male Infertility)




पुरुष बांझपन के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव

पुरुषों में स्पर्म की गुणवत्ता और उसकी मात्रा गर्भ धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है हर दंपत्ति अपने जीवन में संतान का सुख चाहता है लेकिन कई महिलाओं को प्राकृतिक रूप से गर्भ धारण करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अगर 1 साल नियमित प्रयास करने पर भी गर्भधारण में सफलता नहीं मिले तो इसे इनफर्टिलिटी कहते हैं  आमतौर पर ये देखा गया है कि सोसाइटी में इनफर्टिलिटी को सिर्फ महिलाओं से जुड़ी समस्या समझा जाता है लेकिन निःसंतान दंपत्तियों में 30-40 % मामलों में पुरुष नि: संतानता की वजह हो सकते हैं ।

जब पुरुष का स्पर्म काउंट कम हो या उसके स्पर्म एग को फर्टिलाइज करने के योग्य न हों तब उसे मेल इनफर्टिलिटी कहते हैं।
इसके अलावा पुरुषों में बांझपन की समस्या के पीछे खराब जीवनशैली, बीमारी, चोट, गंभीर स्वास्थ्य समस्या आदि कारक जिम्मेदार  होते हैं । 

पुरुष बांझपन के कारण

मेल इनफर्टिलिटी के लिए तीन (या अधिक) प्राथमिक कारक हो सकते हैं । 
ओलिगोजोस्पर्मिया (शुक्राणुओं की कम संख्या), टेराटोजोस्पर्मिया (शुक्राणुओं की असामान्य रूपरेखा) और स्पर्म ट्रांसपोर्ट डिसआर्डर । 
मेल फैक्टर इनफर्टिलिटी के करीब 20 प्रतिशत मामलों में स्पर्म ट्रांसपोर्ट डिसआर्डर ही जिम्मेदार होते हैं । 

पुरुष का सीमेन (Semen) एक दूधिया तरल पदार्थ जैसा होता है जो संभोग के चरम अवस्था पर लिंग (penis) से निकलता है । इसी सीमेन में पुरुष का स्पर्म होता है । जब पुरुष के स्पर्म की संख्या कम होती है तो वह महिला के अंडे से नहीं मिल पाता है इस कारण पुरुष महिला को प्रेगनेंट करने में असमर्थ हो जाता है।

यदि पुरुष का स्पर्म असामान्य आकार (abnormal size) का होता है तब भी वह महिला के अंडे के साथ निषेचित नहीं हो पाता है । इसके अलावा यदि पुरुष का सीमेन असामान्य है तो वह स्पर्म को प्रभावी तरीके से पहुंचा नहीं पाता है ।

वेरिकोसिल (varicocele) के कारण भी पुरुषों में बांझपन की समस्या हो जाती है । वेरिकोसिल नसों में एक प्रकार का सूजन है जिसके कारण पुरुष का वृषण (testicle) या अंडकोश सूख जाता है और वे बांझपन के शिकार हो जाते हैं । यह समस्या होने पर स्पर्म कमजोर हो जाते हैं ।

पुरुषों के गुप्तांगों में इंफेक्शन होने से भी उन्हें बांझपन की समस्या हो सकती है । कुछ इंफेक्शन ऐसे होते हैं जो स्पर्म बनने में बाधा उत्पन्न करते हैं और स्पर्म की नली को अवरूद्ध कर देते हैं । 

अधिवृषण (epididymis) और पुरुष के अंडकोश (testicles) में सूजन होने या यौन संचारित संक्रमण जैसे गोनोरिया एवं एचआईवी होने के कारण भी पुरुष वीर्य़कोष क्षतिग्रस्त हो जाता है जिसके कारण शुक्राणु पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते हैं । 

यदि किसी पुरुष को ट्यूमर की समस्या हो तो हार्मोन का उत्पादन करने वाली ग्रंथियां जैसे पिट्यूटरी ग्लैंड और उसके प्रजनन अंग इससे सीधे प्रभावित होते हैं । इसके कारण पुरुष बांझ हो जाता है । 

पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की कमी एवं अन्य हार्मोन संबंधी दिक्कतों के कारण भी उन्हें बांझपन की समस्या हो सकती है

स्पर्म काउंट में कमी होना,  शुक्राणु का बनना लेकिन बाहर नहीं आ पाना 
। 
Hormone deficiency के चलते पुरुषों में Testosterone की मात्रा घट जाती है जिससे sperm count कम या nil यानि शून्य भी हो सकता है ।

Anemia, Thyroid Diabetes जैसी बीमारियों से भी पुरुषों की fertility पर काफी असर पड़ता है ।

इन सभी कारणों में सबसे मुख्य कारण कम स्पर्म काउंट को माना गया है तो आइये जनते हैं स्पर्म काउंट से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी और साथ ही अगर पुरुष में स्पर्म की मात्रा कम हो तो क्या हैं उसके इलाज़।

स्पर्म काउंट कम होना


पुरुषों में स्पर्म की गुणवत्ता और उसकी मात्रा गर्भ धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है 
। 
 स्पर्म काउंट 15 मिलियन या इससे अधिक होना सामान्य माना जाता है लेकिन 15 मिलियन से कम होने पर स्पर्म काउंट असमान्य होने के श्रेणी में आता है ।

अधिक रेडिएशन और एक्सरे के प्रभाव से भी पुरुषों में स्पर्म बनना कम हो जाता है जिससे वे महिला को गर्भवती करने में असमर्थ हो जाते हैं । 

अधिक एल्कोहल के सेवन, धूम्रपान, शरीर का वजन बढ़ना एवं ड्रग्स के सेवन से भी पुरुषों को बांझपन हो सकता है । 

पुरुष बांझपन के लक्षण

पुरुषों में बांझपन का मुख्य लक्षण यह है कि वह असुरक्षित यौन संबंध बनाने के बाद भी  महिला को गर्भवती नहीं कर पाते हैं । पुरुषों के शरीर में पहले से ही बांझपन के कुछ लक्षण जैसे हार्मोन का असंतुलन, वृषण की नसें फैल जाना या शुक्राणु नली का अवरूद्ध हो जाना, आनुवांशिक विकार आदि संकेत उन्हें महसूस होते हैं लेकिन वे इसपर शुरूआत में ही अधिक ध्यान नहीं दे पाते हैं । 
पुरुषों में बांझपन के लक्षण निम्न हैं:-

यौन संबंध बनाने में समस्या, स्खलित होने में कठिनाई और स्खलन (ejaculation) में कम मात्रा में तरल पदार्थों का निकलनासेक्स करने की इच्छा में कमी, उत्तेजना में कमी (erectile dysfunction) आदि पुरुषों में बांझपन के लक्षण हो सकते हैं । 

वृषण (testicle) और इसके आसपास की जगहों में दर्द, सूजन और गांठ की समस्या बांझपन का लक्षण हो सकता है । 

बार-बार श्वसन तंत्र में इंफेक्शन होना, सूंघने की क्षमता में कमी आदि बांझपन के लक्षण होते हैं । 

पुरुषों में असामान्य रूप से स्तन का विकास (gynecomastia), शरीर और चेहरे पर बालों का कम होना गुणसूत्र या हार्मोनल असामान्यता का लक्षण है । जिससे वे बांझ हो सकते है । 

पुरुषों के प्रति मिली लीटर सीमेन में शुक्राणुओं को संख्या 15 लाख से कम होना या स्खलन के दौरान कुल शुक्राणुओं की संख्या 39 लाख से कम होना पुरुषों में बांझपन का संकेत है 

पुरुष बांझपन का निदान

सबसे पहले डॉक्टर पुरुष का शारीरिक परीक्षण करते हैं और कुछ टेस्ट के जरिए पुरुषों में बांझपन की समस्या का निदान करते हैं डाक्टर पुरुषों के सीमेन का टेस्ट करते हैं और स्पर्म के गुणवत्ता और संख्या का पता लगाते हैं । 
इसके अलावा पेनिस से तरल पदार्थ निकालकर संक्रमण की जांच की जाती है ।
 फिर लिंग, अंडकोश (scrotum) और प्रोस्टेट ग्रंथि की जांच करते हैं। 
पुरुषों में बांझपन के जांच के लिए सीमेन का परीक्षण करना बहुत आवश्यक होता है । बांझपन के निदान के लिए निम्न टेस्ट किए जाते हैं 

ब्लड टेस्ट

टेस्टोस्टीरोन के स्तर और अन्य हार्मोन की जांच करने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है 

सीमेन की जांच

सीमेन का सैंपल लिया जाता है और इसकी सांद्रता, रंग एवं गुणवत्ता का परीक्षण किया जाता है 

अल्ट्रासाउंड

अल्ट्रासाउंड के जरिए अंदरूनी समस्याओं और खराब स्खलन के बारे में पता लगाया जाता है 
पुरुष बांझपन का इलाज- पुरुषों बांझपन दूर करने का इलाज बहुत सामान्य तरीके से किया जाता है । इलाज से पहले डॉक्टर बांझपन का निदान करते हैं और उसके कारणों के बारे में पता लगाते हैं । फिर इसी आधार पर पुरुषों में बांझपन का इलाज किया जाता है 

अधिक स्पर्म के उत्पादन के लिए पुरुषों को आयुर्वेद  दवाएं दी जाती हैं 

इसके अलावा  आयुर्वेद दवाओं के द्वारा ही पुरुषों में सेक्स के लिए उत्तेजना को भी बढ़ाया जाता है 

इंफेक्शन को दूर करने के लिए आयुर्वेद एंटीबायोटिक्स दिया जाता है 
हार्मोन असंतुलन को दूर करने के लिए हार्मोनल आयुर्वेद दवाएं दी जाती  है 

इसके अलावा भी बांझपन (banjhpan ) को दूर करने के लिए कई प्रकार के उपचार किये  जाते हैं । 

यदि किसी पुरुष में स्पर्म की संख्या कम है तो कृत्रिम तरीके से वीर्यारोपण (insemination) किया जाता है । इस प्रक्रिया में कई बार स्खलन कराकर स्पर्म एकत्र किया जाता है । इसके बाद इसे मैनुअली उस स्पर्म को महिला के गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब में प्रवेश कराया जाता है 
पुरुषों में बांझपन को दूर करने के लिए विट्रो फर्टिलाइजेशन (VF) भी एक तरीका है । इस प्रक्रिया में पुरुषों के स्पर्म और महिलाओं के अंडे को एक प्रयोगशाला में निषेचित किया जाता है उसके बाद निषेचित अंडे को महिला के गर्भाशय में रखा जाता है 

यदि टेस्ट में यह पता चलता है कि किसी पुरुष के शरीर में स्पर्म बिल्कुल नहीं बन रहा है तो दाता शुक्राणु (doner sperm) की  सहायता से महिला को गर्भवती कराया जाता है । इस प्रक्रिया में स्पर्म बैंक से डोनर स्पर्म लिया जाता है और कृत्रिम वीर्यारोपण से महिला के गर्भाशय में डाला जाता है 

पुरुषों में बांझपन से बचाव

आमतौर पर पुरुषों में आनुवांशिक समस्या और बीमारी के कारण हुए बांझपन से बचने का कोई उपाय नहीं है । लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर पुरुषों में बांझपन की संभावना को जरूर कम किया जा सकता है 
यौन संचारित संक्रमण से होने वाले रोगों से बचें और यह समस्या हो जाए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं 
नशीली दवाओं और ड्रग्स के सेवन से बचें 
विषाक्त और हानिकारक पदार्थों (toxins) के संपर्क में आने से बचें 
जहां तक संभव हो रेडिएशन से दूर रहें 
अधिक और लगातार एल्कोहल का सेवन करने से बचें 
अधिक देर तक गर्म पानी में स्नान करने से बचें, इससे वृषण गर्म हो सकता है 
अंडरवियर थोड़ी ढीली पहनें 
मानसिक तनाव से दूर रहें और वजन को नियंत्रित रखें 


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Monday, 27 May 2019

इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष)


इरेक्टाइल डिसफंक्शन  (स्तंभन दोष)


जब कोई पुरुष संभोग के समय अपने गुप्तांग में पर्याप्त इरेक्शन या स्तंभन लाने में नाकामयाब हो जाता है या फिर उसको बरक़रार नहीं रख पाता,  यद्यपि पुरुष अपनी सहयोगी साथी के साथ यौन क्रिया करने की तीव्र इच्छा रखता है, किन्तु लिंग में ढीलेपन (तनाव की कमी) के कारण वह यौन सम्बन्ध नहीं बना पाता, यदि वह अपने भरपूर प्रयासों से यौन क्रिया करता भी है तो वह तनाव प्राप्त नहीं कर पाता और थकान, पसीने और कुंठा से भर जाता है तब उस स्तिथि को इरेक्टाइल डिसफंक्शन या स्तंभन दोष कहते है इरेक्टाइल डिसफंक्शन लाइलाज नहीं है, इसे उपचारित किया जा सकता है। कभी-कभार संतोषजनक संभोग के लिए गुप्तांग में इरेक्शन ना ला पाना कोई असामान्य बात नहीं हैं | परन्तु अगर यह अक्सर होता आ रहा है (लगभग 50 प्रतिशत वक़्त) तो यह परेशानी का संकेत हो सकता है नज़रअंदाज़ करने पर इरेक्टाइल डिसफंक्शन न केवल संतोषजनक संभोग करने में बाधा डालता है परन्तु एक दम्पति के बीच दूरियाँ भी पैदा कर देता है | इसके साथ-साथ पुरुष के स्वाभिमान को भी भारी ठेस पहुँचती है |  स्तंभन दोष कभी-कभी हृदय संबंधी बिमारियों का संकेत भी हो सकता है | इसीलिए इस चीज़ को दबाने के बजाय डॉक्टर से मदद लेनी चाहिए |”
इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) के कारण

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से पीड़ित अधिकांश लोग चिड़चिडे हो जाते हैं और उनका कॉन्फिडेंस भी कम हो जाता है। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की वजह शारीरिक या मानसिक हो सकती है। अगर किसी खास समय इरेक्शन हो और सेक्स के दौरान नहीं तो यह समस्या मानसिक होती है। खास समय का मतलब सुबह सोकर उठने पर, पेशाब करते वक्त या सेक्स के बारे में सोचने आदि समय पर यदि इरेक्शन नही होता है तो समस्या शारीरिक स्तर पर है।
       संभोग के लिए गुप्तांग को उत्तेजित करना कई चीज़ों पर निर्भर करता है यह एक पेचीदा क्रिया है जिसमें मस्तिष्क, होर्मोनेस, गुप्तांग में रक्त का बहाव, नसें, मांसपेशियाँ और पुरुष की भावनाएँ सभी एक एहम भूमिका निभाती हैं | इनमें से अगर किसी एक में भी दिक्कत आ जाए तो यह परेशानी उत्पन्न हो सकती है | इरेक्टाइल डिसफंक्शन कैसे होता है, यह समझने के लिए हमे पहले यह समझना होगा की गुप्तांग में स्तंभन कैसे होता  है गुप्तांग कई दलदले और नरम मांसपेशियों से बना हुआ है | संभोग के दौरान मस्तिष्क की नसें एक केमिकल छोड़ती है जिससे गुप्तांग में रक्त का बहाव बढ़ जाता है | ऐसा होने पर वे मांसपेशियाँ उस रक्त को गुप्तांग के अंदर रोक लेती है जिससे वह इरेक्ट और मज़बूत हो जाता है | संभोग के पश्चात मस्तिष्क की नसें फिर से गुप्तांग को सिग्नल भेजतीं हैं जिस्से रक्त बाहर आ जाता है और स्तंभन खत्म हो जाता है | इस क्रिया में शामिल किसी भी हिस्से में परेशानी आने पर इरेक्टाइल डिसफंक्शन हो सकता है |

हृदय सम्बंधित कारण (cardiovascular causes)

पेनिस के सख्त होने का मुख्य कारण उसमें खून का बहाव होता है। जब कभी भी लिंग में खून के बहाव में कमी आती है, तो उसमें पूरी सख्ती नही आ पाती और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन शुरू हो जाता है।
इसमें सबसे आम कारण है arteriosclerosis जिसमें गुप्तांग में मौजूद रक्तवाहिनी (arteries) किनी कारणों की वजह से सख़्त हो जाती हैं | सख़्त होने के कारण वे बंद हो जाते है जिससे सही मात्रा में रक्त गुप्तांग तक नहीं पहुँच पाता | इसकी वजह से गुप्तांग में स्तंभन नहीं आ पाता |
जिनसे arteriosclerosis होने की सम्भावना बढ़ जाती है :  
  • अधिक से ज़्यादा वज़न रखना (Obesity)
  • डायबिटीज
  • शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ज़्यादा होना
  • उच्च रक्त चाप होना (high blood pressure)
  • धूम्रपान करना
  • दिल की बीमारी होना

नसों से संबंधित कारण (neurological causes)

कई बार किन्हीं कारणों की वजह से गुप्तांग से जुड़े हुए नसों में आघात पहुँच जाता है जिससे फिर स्तंभन दोष उत्पन्न होता है |                                                                                                                                       
प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी कराने पर या रीढ़ की हड्डी पर आघात पहुँचने पर भी इरेक्टाइल डिसफंक्शन हो सकता है |”
इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) से बचाओ

तनाव को दूर करें

बहुत से पुरुष ऐसे होते हैं जो अधिक  तनाव लेने पर स्तंभन दोष के शिकार हो जाते है   
  अक्सर मनोवैज्ञानिक परेशानियों जैसे डिप्रेशन (depression), एंग्जायटी (anxiety)  के कारण पुरुष उचित समय पर इरेक्शन नहीं प्राप्त कर पाते | यह इरेक्टाइल डिसफंक्शन का एक प्रमुख कारण है |    तनाव के कारण शरीर में कई हार्मोन्स का स्तर बढ़ जाता है, जिनमें एड्रीनलीन और कॉर्टिसोल प्रमुख होते हैं । इनकी वजह से शरीर में कई अनचाहे बदलाव होते हैं और नर्वस सिस्टम की कार्यप्रणाली गड़बड़ा जाती है तथा इम्यून सिस्टम भी कमजोर पड़ जाता है । कभी-कभी पुरुष अपने पार्टनर को संतुष्टि देने के लिए  भी अधिक तनाव ले लेते हैं जिससे संभोग के दौरान परफॉर्म नहीं कर पाते |”

डायबिटीज को  काबू करें

डायबिटीज इरेक्टाइल डिसफंक्शन होने का एक बहुत ही आम कारण है | मधुमेह ग्रस्त 50 से 60 प्रतिशत लोग इरेक्टाइल डिसफंक्शन से ग्रस्त होते हैं । मधुमेह, इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या का सबसे प्रमुख कारण है। हालांकि ऐसे रोगियों के हार्मोन असंतुलन को ठीक करके उनके स्वस्थ यौन जीवन को दोबारा लाया जा सकता है ।                                                                                                                                                अध्ययनों के अनुसार तकरीबन 36 प्रतिशत मधुमेह रोगी 'हाइपोगोनाडोट्रॉपिक हाइपोगोनाडिज्म' नामक विशेष स्थिति से ग्रस्त हैं। इनमें सेक्स ग्रंथियों के उत्तेजित होने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है।    डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो शरीर की नसों, आँखों और किड्नीस पर असर डालती हैं, ख़ास तौर पर तब जब काफ़ी समय से शुगर पर नियंत्रण न किया गया हो  तीन तरीकों से यह बीमारी पुरुष के संभोग करने की क्षमता पर असर डाल सकती है 
1.      अगर किसी पुरुष का ब्लड शुगर काफ़ी लम्बे समय से अनियंत्रित रहा है तो इससे स्वचल नसों को गंभीर नुक्सान पहुँचता है (autonomic neuropathy) | नसों को नुकसान पहुँचने के कारण वे सही से गुप्तांग की मांसपेशियों को सिग्नल नहीं भेज पाते जिससे इरेक्शन नहीं हो पाता  इस स्तिथि में स्तंभन दोष के अलावा पुरुषों को ये लक्षण भी महसूस हो सकते है असाधारण रूप से पसीना आना (ख़ास तौर पर खाते वक़्त), अचानक से उठके बैठने पर सर घूमना, घबराहट होना (palpitations) और अचानक अचानक से कब्ज़ या दस्त हो जाना 
2.      डायबिटीज से arteriosclerosis भी बढ़ने लगती है | “डायबिटीज होने पर गुप्तांग की रक्तवाहिनी के सख़्त होने की संभावना बढ़ जाती है 
3.      डायबिटीज के साथ-साथ अगर मोटापा भी हो तो अक्सर हॉर्मोन्स में असंतुलन आ जाता है  “मोटापा के कारण पुरुष में मौजूद टेस्टोस्टेरोन की मात्रा कम हो सकती है जिससे इरेक्टाइल डिसफंक्शन हो सकता है 

                            इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) का उपचार

 अगर स्तंभन दोष होने का कारण तनाव, डिप्रेशन या एंग्जायटी से जुड़ा हुआ है तो उस स्तिथि में हम मरीज़ को psychiatrist की मदद लेने का सुझाव देते है 
जहाँ तक की संभोग की बात है, गुप्तांग को उत्तेजित करने के लिए दवाइयों और इंजेक्शंस का इस्तेमाल किया जा सकता है   
संभोग करते वक़्त स्तंभन पाने के लिए कुछ आसान से यंत्रों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है । इन यंत्रों से पुरुष अपने गुप्तांग में पर्याप्त इरेक्शन पा सकते है और उसको बरक़रार भी रख सकते है   इनमे से एक यंत्र है गुप्तांग पर पम्प (penis pump)  यह एक खोखला ट्यूब है जो बैटरी से चलता है  इस ट्यूब को गुप्तांग के ऊपर रख कर पम्प की सहायता से हवा बहार निकाल दी जाती है जिससे एक वैक्यूम बन जाता है यह वैक्यूम रक्त को गुप्तांग के अंदर खींच लाता  है जिससे वह इरेक्ट हो जाता है इसके बाद  एक तरह के रिंग का इस्तेमाल करके उस इरेक्शन को बरक़रार रखा जाता है  
अगर दवाइयों से इरेक्टाइल डिसफंक्शन ठीक न हो पाए तो सर्जरी भी एक उपाय हो सकता है | पीनाइल प्रॉस्थेसिस या पीनाइल इम्प्लांटेशन एक क्रिया है जिससे ये बीमारी ठीक हो सकती है  इस क्रिया में गुप्तांग के भीतर यंत्र लगाए जाते है जो उसको इरेक्ट होने में मदद करता है
टेस्टोस्टेरोन की मात्रा कम होने पर डॉक्टर के निर्देशन में टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (testosterone replacement therapy) अपनाने से यह परेशानी ठीक हो सकती है 
अंत में कारण चाहे जो भी हो, ऐसे वक़्त में एक पुरुष को सबसे ज़्यादा अपने परिवार और दोस्तों की ज़रूरत होती है । भावनात्मक सहायता मिलने से उनको इस परेशानी से जूझने की हिम्मत मिलती है  
यह बीमारी पुरुष के लिए शर्मिंदगी ला सकती है इसीलिए ज़रूरी है कि ऐसे समय में आप अपने अपनों से बात करें और मन में कोई दुविधा न रखें” 
हर परेशानी का कोई न कोई इलाज होता है  इसीलिए चिंता करने के बजाए ज़रूरी है कि हम उस परेशानी को सुलझाने के लिए सही मेडिकल सुझावों को मानें 

स्तम्भन दोष या नामर्दी के  लिए आयुर्वेदिक उपचार :-

 

हार्मोन्स के स्तर में बदलाव के कारण भी यह समस्या हो सकती है । यदि हॉर्मोन की कमी के कारण इरेक्टाइल डिस्फंक्शन हो रहा है तो, हॉर्मोन थेरेपी की मदद से इसे 2 से 3 महीनों के अंदर ठीक किया जा सकता है ।
प्रजनन अंगों को फिर से जीवंत करने के लिए हर्बल औषधियों का सेवन करें 
ऐसे औषधीय यानि हर्बल तेलों से शरीर की मालिश करें जो श्रम से क्लांत शरीर को राहत दे और कामोद्दीपक के रूप में भी कार्य करे 
मानसिक थकान को दूर करने और तनाव से निपटने के लिए योग और ध्यान का नियमित अभ्यास करें 
प्रतिदिन कम से कम 8 घंटे की अच्छी नींद लें 
शराब, तंबाकू, हेरोइन आदि का सेवन ना करें 
नित्य व्यायाम करें 
गर्म, ज्यादा मसालेदार और कड़वे भोजन से बचें 
मिष्ठान्न, दुग्ध उत्पाद, मेवे, और उड़द दाल का सेवन करें 
अपने आहार में थोड़ा घी जोड़ें 
दो संभोगों के बीच चार दिनों का अंतर रखना अच्छा है 



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