Saturday, 27 July 2019

पुरुषो की जटिल सेक्स समस्या फाइमोसिस (phimosis)


फाइमोसिस क्या है

फाइमोसिस से तात्पर्य पुरुषों से जुड़ी एक ऐसी समस्या है जिसमें लिंग के ऊपर की चमड़ी लिंग के शीर्ष या ग्लांस से पीछे नहीं हट पाती है। हर पुरुष में लिंग के ऊपर की चमड़ी को पीछे खिंचने की सीमा अलग अलग होती है। कुछ पुरुषों में यह पूरी तरह आसानी से पीछे खिंच जाती है जिसके कारण लिंग का गुलाबी रंग का शीर्ष स्पष्ट दिखायी देने लगता है। जबकि कुछ पुरुषों की फोरस्किन बहुत टाइट होती है और ग्लांस के चारों ओर इस तरह जकड़ी होती है कि उनके लिंग का सिर्फ मूत्र छिद्र ही दिखायी देता है।
 यह समस्या ज्यादातर छोटे बच्चों में होती है क्योंकि शुरूआत के कुछ वर्षों तक उनके लिंग की फोरस्किन ग्लांस से जुड़ी होती है, लेकिन बड़े होने के बाद भी यदि यह ऐसे ही बनी रहे तो पुरुषों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में तुंरत इलाज कराना ही बेहतर विकल्प होता है क्योंकि थोड़ी भी देरी करना किसी भी पुरूष को मुसीबत में डाल सकता है। चूंकि कुछ धर्म में खतना की प्रथा है इसलिए उस धर्म के बच्चों में फाइमोसिस कभी नहीं होती है क्योंकि एक बार खतना हो जाने के बाद फोर स्किन आसानी से आगे पीछे खिसकने लगती है।

फाइमोसिस होने के कारण  


बार-बार मूत्र मार्ग संक्रमण का होना 
फाइमोसिस की बीमारी उस पुरूष को होने की संभावना अधिक रहती है, जिसे बार-बार मूत्र मार्ग संक्रमण होता है।

त्वचा संक्रमण होना 
फिमोसिस की बीमारी उस स्थिति में हो सकती है, जब किसी पुरूष को त्वचा संक्रमण की समस्या होती है।हालांकि, इसका इलाज त्वचा संबंधी उपचार के माध्यम से किया जा सकता है।
 
एक्जिमा का होना
 यदि कोई पुरूष एक्जिमा से पीड़ित है, तो उसे फाइमोसिस होने की संभावना अधिक होती है। इसी कारण एक्जिमा से पीड़ित पुरूष को अपना इलाज सही से कराना चाहिए।

यौनिक संक्रमण का होना
यदि यौनिक गतिविधियों को बिना प्रोटेक्शन से किया जाए, तो इससे कई सारे संक्रमण हो सकते हैं। लिंग को बार-बार खींचने और हाथों से पकड़कर सीधा करने की कोशिश के कारण लिंग सूज जाता है जिसके कारण फाइमोसिस हो जाता है। यदि आपको बहुत कम उत्तेजना होती है तो इस कारण आपको फाइमोसिस हो सकता है। 
यदि आप मधुमेह रोगी हैं तो आपके लिंग के द्वार (tip) पर संक्रमण हो सकता है जिसके कारण फाइमोसिस होने की संभावना बढ़ सकती है।

 

फाइमोसिस के लक्षण क्या हैं?


किसी भी अन्य बीमारी की तरह फाइमोसिस के भी कुछ लक्षण होते हैं -
1-  रोग का सबसे महत्वपूर्ण लक्षण लिंग के सिर को खोलने में असमर्थता या ऐसा करने की कोशिश करते समय उत्पन्न होने वाली कठिनाइयां हैं।
2-  पेशाब करते समय दर्द होना, आमतौर पर इसे यूरिन इंफेक्शन का कारण समझता जाता है, लेकिन हर बार ऐसा सोचना गलत है क्योंकि कई बार यह फिमोसिस का लक्षण भी हो सकता है।
3-  पेशाब करते समय फोरस्किन गुब्बारे की तरह फैल जाती है जिसके कारण दर्द का अनुभव होता है।
4-  सेक्स करते समय उत्तेजना के बाद भी लिंग में दर्द होना।
5-  यदि किसी पुरूष के लिंग पर सूजन हो जाती है, तो उसे इसे नज़रअदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि यह फाइमोसिस का लक्षण हो सकता है।
6-  कई बार फाइमोसिस होने पर लिंग पर लाल दब्बे भी हो जाती है। 

यदि किसी पुरूष को लिंग में दर्द होता है और इसके साथ में पेशाब करते समय जलन भी होती है, तो उसे डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।

 

फाइमोसिस से बचाओ एवं उपचार कैसे करें?


हालांकि, फाइमोसिस के मरीजों की तादात दिन-प्रति-दिन बढ़ती जा रही है, किसी भी अन्य बीमारी की तरह फिमोसिस से बचाओ संभव है।


1. लिंग की सफाई करना-  फाइमोसिस की बीमारी शरीर की सफाई न करने की वजह से भी हो सकती है। इसी कारण सभी पुरूषों को यह कोशिश करनी चाहिए कि वे अपने शरीर (विशेषकर लिंग) की सफाई प्रतिदिन करें ताकि उसे कोई बीमारी न हो।
 
2.  पौष्टिक भोजन करना-  हमारे खान-पान का शरीर पर सीधा असर पड़ता है। यह बात फाइमोसिस के संदंर्भ में सटीक बैठती है, इसी कारण सभी पुरूषों को अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए और केवल पौष्टिक भोजन ही करना चाहिए।
 
3.  व्यायाम करना- सभी लोगों के लिए व्यायाम करना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि व्यायाम केवल उनकी मांसपेशियों को ही मजबूत नहीं बनाता है बल्कि उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Immunity System) को भी बेहतर बनाता है।
 
4.  वायरस या बैक्टीरिया से बचाव करना-  फाइमोसिस की बीमारी वायरस या बैक्टीरिया के संक्रमण की वजह से भी हो सकती है। सभी लोगों को यह कोशिश करनी चाहिए कि वे किसी वायरस या बैक्टीरिया के संपर्क में न आएं, हालांकि वे इसके लिए एंटीबायोटिक दवाईयों का सेवन कर सकते हैं।
 
5.  मलहम लगाना-  फाइमोसिस की बीमारी में पुरूष के लिंग में खुजली होती है।
अत: इसका इलाज मलहम का इस्तेमाल करके भी किया जा सकता है।
 
6.  यूरिन टेस्ट कराना- कई बार, डॉक्टर फाइमोसिस का इलाज करने के लिए पुरूष का यूरिन टेस्ट भी कराते हैं।इस टेस्ट के माध्यम से इस बात की पुष्टि की जा सकती है कि यह बीमारी यूरिन में किस हद तक बढ़ चुकी है।
 
7.  खतना कराना- अक्सर, डॉक्टर पुरूष को खतना कराने की भी सलाह देते हैं।
हालांकि, ऐसा उसी मामले में किया जाता है, जब पुरूष को उपचार के किसी अन्य तरीके से आराम नहीं मिलता है।


 

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Friday, 19 July 2019

पेनिस को सेहतमंद रखने के जरूरी उपाय


पेनिस को सेहतमंद रखने के जरूरी उपाय


सेहतमंद रहने के लिए आपको जितना अपने बॉडी के दूसरे पार्ट्स का ध्यान रखना चाहिए उतना ही ख्याल पेनिस का भी रखना चाहिए।, पेनिस के साथ-साथ टेस्‍टीकल्‍स यानि अंडकोष भी होते हैं उन्‍हें भी देखरेख की आवश्‍यकता होती है, इन्‍हें भी साफ रखना जरूरी होता है। शरीर के इन हिस्‍सों में गंदगी होती है और साफ न करने पर संक्रमण हो जाता है। यानि अपने प्राइवेट पार्ट्स को साफ रखना बहुत ज़रूरी होता है विशेषकर सेक्स करने के बाद नहीं तो इंफेक्शन होने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। शरीर के संवेदनशील हिस्‍सों को साफ और सूखा रखना चाहिए, ताकि आपको किसी भी प्रकार का संक्रमण न होने पाएं।
कुछ पुरूष सोचते हैं कि जननांग को पानी और साबुन से धो लेना ही पर्याप्‍त होता है, लेकिन ऐसा बिल्‍कुल नहीं है। एक्‍सपर्ट मानते हैं कि सिर्फ साबुन और पानी से ही नहीं बल्कि जननांग को साफ और बालरहित रखना भी आवश्‍यक होता है।

हर पुरूष को पेनिस साफ करते समय निम्‍न बातों को ध्‍यान में रखना चाहिए

नहाने के समय पेनिस को साफ करना न भूलें। अगर पेनिस का खतना (circumcised) नहीं हुआ है तो फोरस्किन को हटाकर साफ करने की ज़रूरत होती है। सफेद रंग का लिक्विड जो फोरस्किन के नीचे जम जाता है जिसको स्मेग्मा कहते हैं उसको साफ करना चाहिए नहीं तो हार्बर बैक्टिरीया हो सकता है। यहां तक कि इस बैक्टिरीया का इंफेक्शन आपके पार्टनर को भी हो सकता है। इसलिए नहाते समय पेनिस के स्किन के नीचे भी साफ करें ।
अगर आपको पेनिस के आस-पास के एरिया या प्यूबिक हेयर को शेव करना अच्छा नहीं लगता तो ट्रिम कर लें। क्योंकि कुछ लोग शेव करते समय उस एरिया को चोट पहुँचा देते हैं। इसलिए इस प्रॉबल्म से बचने के लिए 
प्यूबिक हेयर को ट्रिम करना ही सेफ होता है। इसके अलावा इस एरिया को साबुन और पानी से रोज साफ करें नहीं तो फंगल इंफेक्शन होने की बहुत ज्यादा संभावना रहती है।
अक्सर पुरूष एक आम गलती करते हैं वह ये है कि हमेशा टाइट अंडरवियर पहनते हैं। जब आप टाइट अंडरवियर पहनते हैं तब ये ऑर्गन सही तरह से सांस नहीं ले पाते हैं साथ ही टेस्टिकल में दबाव पड़ता है। रिसर्च के अनुसार टाइट अंडरवियर पहनने से स्पर्म काउन्ट लो होता है साथ ही टेस्टास्टरोन का लेवल कम होने के कारण इंफर्टिलिटी की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए रात को अंडरवियर पहन कर न सोयें और पेनिस को अच्छी तरह से सांस लेने दें।
सबसे ज़रूरी और महत्वपूर्ण बात याद रखने की ये है कि कभी भी ज्यादा गर्म पानी से न ही नहायें और न ही स्टीम बाथ लें ।  टेस्टिकल्स का टेम्परेचर बॉडी के नॉर्मल टेम्परेचर से दो डिग्री कम ही होता है इसलिए गर्म पानी में बैठने पर इसके फंक्शन में प्रॉबल्म होता है। इसलिए हमेशा अपने प्राइवेट पार्ट्स को ठंडे पानी से धोयें । स्पर्म काउन्ट को बढ़ाने के लिए और गर्म पानी के साइड इफेक्ट को कम करने के लिए ठंडे पानी में 15 मिनट तक बैठने की सलाह दी जाती है जिससे कि प्राइवेट पार्ट्स ठंडे पानी में डुबे रहें।

पेनिस को साफ करने के लिए कुछ बातों को अवश्‍य ध्‍यान में रखना चाहिए

Ø किस प्रकार करे सफाई और धुलाई

पेनिस के आस पास का स्‍थान बहुत संवेदनशील होता है जिसे काफी केयर की आवश्‍यकता होती है। पेनिस के आसपास सफाई रखने के लिए साबुन या वी-वॉश का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
 संक्रमण न हों, इसके लिए पेनिस और आसपास के हिस्‍से को गुनगुने पानी से धो लें। साबुन को हाथों में अच्‍छे से मलें और उसे पेनिस पर लगाकर अच्‍छे से धो लें। धोने के बाद तौलिए से पोंछ लें।

Ø बालो को ट्रिम करें

पेनिस के आसपास के बालों को हटाने के लिए उन्‍हें छोटी कैंची से ट्रिम कर लें। इससे उनमें पसीना नहीं भरेगा और न ही संक्रमण होगा। कई बार बड़े हुए बालों की वजह से गंदगी हो जाती है और बैक्‍टीरिया पनपते हैं।

Ø सेक्‍स करने से पहले और बाद में धुलाई करें

सेक्‍स करने से पहले और बाद में पेनिस को धुलना कतई न भूलें। दोनों ही पार्टनरों को सेक्‍स से पहले और बाद में योनि को अवश्‍य धुलना चाहिए। वरना, स्‍पर्म के फैलने से वहां ड्राईनेस हो जाती है और संक्रमण भी हो जाता है। जहां भी स्‍पर्म गिरा हो, वहां भी साबुन से धुल लेना चाहिए।

Ø हस्‍तमैथुन के बाद धुलाई करें

हस्‍तमैथुन करने के बाद भी पेनिस को अच्‍छी तरह धुल लेना चाहिए। इससे संक्रमण होने का खतरा नहीं रहता है।

Ø खतना पुरूषों को रखनी चाहिए विशेष देखभाल

अगर आपका खतना हुआ हो, तो आपको पेनिस की विशेष देखभाल करनी चाहिए। आपको पेनिस की स्किन को अच्‍छे से साफ करना चाहिए और तौलिए से पोंछ भी लेना चाहिए। वरना खतने के कारण त्‍वचा अधिक संक्रमण की चपेट में आ सकती है।

Ø रात में अंडरवियर न पहनें

सारा दिन पेनिस कपड़े में रहता है, ऐसे में आप रात्रि को उसे खुला भी छोड़ सकते हैं यानि रात को अंदर के वस्‍त्र न पहनें या अंडरवियर आदि को उतार दें। इससे वहां पसीना नहीं होगा। दिन में कॉटन अंडरवियर पहनें, साटन या अन्‍य प्रकार के फैब्रिक के अंडरवियर न पहनें।

Ø जांच करते रहना भी जरूरी है

अपने जननांग और अंडकोष की जांच करते रहें, अगर किसी प्रकार का कोई परिवर्तन या  अवांछित ग्रोथ नजर आती है तो तुरंन्त डॉक्‍टर से सम्‍पर्क करें।



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Saturday, 13 July 2019

लिंग के रोग (Panis Disorders)


लिंग के रोग (Panis Disorders)
पेनिस (लिंग) रोग (Panis Disorders) पुरुषों के लिए बहुत गंभीर समस्या है। यह समस्या पुरुष के सम्पूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं । वास्तव में  ऐसी  कई सामान्य बीमारियां हैंजो लिंग को काफी हद तक प्रभावित कर सकती हैं। और आगे चलकर यौन संक्रमित संक्रमण का कारण बनती हैं। अतः लिंग से सम्बंधित समस्या एक पुरुष के सम्पूर्ण जीवन को खतरे में डाल सकती है। प्रत्येक पुरुष को पेनिस (लिंग) से सम्बंधित रोग और उनके लक्षणों के बारे में जानकारी होना अतिआवश्यक है। पेनिस (लिंग) के रोग क्या हैंइनके लक्षण क्या हैंकारणप्रकारउपचार और बचाव की जानकारी दी जा रही है।

लिंग के रोग (Panis Disorders) क्या हैं

पेनिस (लिंग) के रोग पुरुषों में लिंग से सम्बंधित विभिन्न समस्याएं हैंजो यौन समस्याओं का कारण बनते हैं।
एक स्वस्थ व्यक्ति के पास स्वस्थ लिंग होने की निम्न विशेषताएं पाई जाती हैं जैसे – मूत्र त्यागने में सक्षमतरल पदार्थ में संतुलन बनाए रखनायौन संबंध रखने में सक्षम और गर्भ में वीर्य स्थापित करने में सक्षम होना।
लेकिन लिंग के सीधा होने वाली कठिनाईपूर्ण यौन संभोग करने में असमर्थ तथा लिंग में झुकाव ये सभी सामान्य स्थितियाँ लिंग और यौन जीवन को प्रभावित कर सकती है।
पेनिस (लिंग) रोग के लक्षण 
पेनिस रोग (Panis disease) लिंग के आधारशाफ्ट या सिरे को प्रभावित कर सकते हैं। यह फोरस्किन (foreskin) या लिंग की चमड़ी को भी प्रभावित करते है। अतः पेनिस (लिंग) रोग के प्रकारों के आधार पर निम्न लक्षण प्रकट हो सकते हैं ।
Ø  लिंग में दर्द
Ø  लिंग क्षेत्र में खुजली होना
Ø  जलन महसूस होना
Ø  लिंग की नोक पर सूजन
Ø  मूत्र या वीर्य में रक्त की उपस्थिति
Ø  निचली कमर में दर्द होना
Ø  वीर्यपात के दौरान दर्द होना
Ø  लिंग को खड़ा करने या रखने में समस्याएं
Ø  लिंग में घाव आना
Ø  बुखार आना
Ø  लगातार पेशाब आना
Ø  मूत्र त्याग करने में दर्द और जलन महसूस होना
Ø  पेशाब सम्बन्धी तीव्र इच्छा
Ø  मूत्रमार्ग (Urethra) में दर्द होना
Ø  लिंग से रिसाव होना

पेनिस (लिंग) के रोग के कारण

पेनिस के रोग विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के कारण उत्पन्न हो सकते हैंजैसे –
Ø  शराब का अत्यधिक सेवन करने से
Ø  किसी ऐसे व्यक्ति के साथ यौन संबंध रखने सेजिसे पहले से ही संक्रमण हो
Ø  असुरक्षित सेक्स करने से
Ø  अवैध दवाओं का अत्यधिक लम्बे समय तक सेवन करने से
Ø  एक से अधिक भागीदारियों के साथ यौन संबंध रखने से
Ø  लिंग (panis) या रीढ़ की हड्डी में चोट लगने से
Ø  एक कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली होने पर
Ø  लिंग की नियमित सफाई न करने से
Ø  सेक्स गतिविधियों के दौरान लिंग को नुकसान होने से
Ø  हार्मोन असंतुलनविशेष रूप से टेस्टोस्टेरोन (testosterone) की कमी के कारण ।

पेनिस के रोग के प्रकार 

जब लिंग (पेनिस) में कोई समस्या उत्पन्न होती हैतो यह समस्या यौन जीवन के साथ-साथ सम्पूर्ण स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है। लिंग (Panis) को प्रभावित करने वाली कुछ सबसे सामान्य स्थितियां निम्न हैं:
 प्रियापिज्म

यह समस्या लिंग में स्थिर दृढंता (Priapism) का कारण बनती है। प्रियापिज्म (Priapism) एक गंभीर स्थिति हैजिसमें एक आदमी का लिंग चार घंटे से अधिक समय तक खड़ा रहता है या अपनी वास्तविक स्थिति में नहीं आता है। यह काफी दर्दनाक हो सकता हैतथा यह घंटों या कई दिनों तक रह सकता है। इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाने की ज़रूरत होती है।
फाइमोसिस 
एक ऐसी स्थिति जिसमें लिंग के सिर को कवर करने वाली अतिरिक्त त्वचा (foreskin) बहुत अधिक टाइट होती है। जिसके कारण इसे वास्तविक स्थिति से हटाकर लिंग के सिरे को देखना मुश्किल हो जाता है। फाइमोसिस (Phimosis) का इलाज करने के लिए सर्जरी का उपयोग किया जा सकता है।
 पैराफिमोसिस 
 यह तब होता हैजब फोरस्किन (foreskin) या चमड़ीलिंग के सिर के पीछे फंस जाता हैऔर अपने वास्तविक स्थान पर वापस नहीं आ सकती है। यह चिकित्सा आपातकालीन स्थिति हैजो इलाज नहीं किए जाने पर गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।
पेरोनी रोग 
यह एक ऐसी स्थिति हैंजो लिंग के भीतरी अस्तर पर घावऊतक में कठोर गांठ के अतिरिक्त लिंग के खड़ा होने पर एक तरफ झुकने का कारण बनती है। इस बीमारी का कारण ज्ञात नहीं है। उपचार के बिना भी यह बीमारी ठीक हो जाती है। लेकिन गंभीर मामलों में सर्जरी का आवश्यकता पड़ती है।
 रेट्रोग्रेड स्खलन 
 इस समस्या का संबंध उस स्थिति से हैजब संभोग किए जाने के दौरान वीर्यलिंग की नोक से बाहर आने की बजाय मूत्राशय में प्रवेश करता है। यह एक “शुष्क संभोग” की ओर संकेत करता है। चूंकि रेट्रोग्रेड स्खलन (Retrograde ejaculation) हानिरहित होता हैलेकिन यह पुरुष बांझपन (male infertility) का कारण बन सकता है।
पेनिस में सूजन बैलेनाइटिस 

 बैलेनाइटिस (Balanitis) को लिंग के सिर या फोरस्किन (foreskin) की सूजन या संक्रमण के रूप में जाना जाता है। यह लिंग में लालिमारिसाव, खुजली और दर्द का कारण बनता है। यह स्थिति गंभीर नहीं हैपरन्तु दर्दनाक हो सकती है। इसे दवाओं का उपयोग करके ठीक किया जा सकता है।

क्रोनिक नॉनबैक्टीरियल प्रोस्टटाइटिस 
क्रोनिक नॉनबैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस एक ऐसी स्थिति हैजो पुरुषों में निचले मूत्र पथ और पौरुष ग्रंथि (prostate) में दर्द और सूजन का कारण बनती है।

पुरुष गुप्त रोग जननांग हरपीज 
जेनिटल हर्पीज़ (Genital Herpes) एक यौन संक्रमित बीमारी है। यह हर्पस घावों (herpes sores) या दाद जैसे घावों का कारण बनती हैजो दर्दनाक फफोले (तरल पदार्थ से भरे हुए) के रूप में हो सकते हैं।
 यूरेथ्राइटिस 
यूरेथ्राइटिस (Urethritis) एक ऐसी स्थिति हैजिसमें मूत्रमार्ग (urethra) या ट्यूबजो मूत्राशय से मूत्र को शरीर के बाहर ले जाती हैमें सूजन और परेशान का कारण बनती है। यह समस्या मूत्रमार्ग (urethra) में संक्रमण के कारण उत्पन्न होती है।
पुरुष खमीर संक्रमण 
यीस्ट संक्रमण (Yeast infections) महिलाओं में एक सामान्य समस्या हैलेकिन यह संक्रमण पुरुषों में भी हो सकता हैयह यौन संचारित बीमारी है। लिंग की नोक पर लालिमाखुजली और जलन इसके लक्षणों को प्रगट करते हैं। यीस्ट संक्रमण (Yeast infections) का इलाज ओवर-द-काउंटर एंटीफंगल मलहम (antifungal ointment) के साथ किया जा सकता है।
लिंग का रोग सिफलिस 
सिफलिस (Syphilis), ट्रेपेनेमा पैलिडम (Treponema pallidum) नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाला एक यौन संचारित रोग (sexually transmitted disease) है। प्रारंभिक संक्रमण की अवस्था में यह आमतौर पर लिंग या अंडकोश की थैली पर एक साधारणगोल आकर में और दर्द रहित अल्सर (छाले) का कारण बनता है। लेकिन समय के साथ यह शरीर के अन्य हिस्सों में फैलता हैऔर कई अंगों को नुकसान पहुंचाता है।

पेनिस कैंसर 

लिंग कार्सिनोमा (Carcinoma) या लिंग कैंसर (penile cancer) एक काफी दुर्लभ स्थिति है। यह त्वचा पर या लिंग के ऊतकों में अनियमित और दर्द रहित गांठ या अल्सर (छाले) के रूप में शुरू होता है। यह आमतौर पर लिंग के बाकी हिस्सों में तेजी से बढ़ता है।
अतः लिंग से सम्बंधित अधिकतर मामलों में उपचार संभव हैं। इनमें से कुछ स्थितियों को अच्छी स्वच्छता रखकर रोका जा सकता है। चूंकि लिंग से सम्बंधित कुछ स्थितियां चिकित्सा आपातकालीन स्थिति हैंइसलिए इन समस्याओं के लक्षणों को पूरी तरह से जानना महत्वपूर्ण होता है।

पेनिस रोग होने पर डॉक्टर को कब दिखायें ?


लिंग (Panis) से सम्बंधित निम्न समस्याएं उत्पन्न होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए:
Ø  लिंग में दर्दसूजन या कोमलता आने पर
Ø  इरेक्‍शन (erection) या लिंग के खड़े होने का समय, 4 घंटे या उससे अधिक तक रहने पर
Ø  एक फोरस्किन (foreskin) या लिंग की चमड़ी का बहुत टाइट होने पर
Ø  मूत्र या वीर्य में रक्त निकलने पर
Ø  एक असामान्य रिसाव या स्खलन होने पर
Ø  लिंग के क्षेत्र में खुजलीफफोलेघाव या छोटे लाल धब्बे आने पर

लिंग में दर्द की रोकथाम
लिंग में दर्द (Panis Pain) विकसित होने की संभावनाओं को कम करने के लिए निम्न उपाय अपनाये जा सकते हैंजैसे कि:
Ø  यौन संबंध रखते समय कंडोम का उपयोग करें
Ø  सक्रिय संक्रमण (active infection) वाले किसी भी व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने से बचना चाहिए
Ø  यौन संभोग के दौरान लिंग के झुकाव या घुमाव वाली किसी भी तरह की गतिविधियों से बचना चाहिए।
Ø  संक्रमण या फोरस्किन (foreskin) से सम्बंधित समस्याओं को कम करने के लिए फोरस्किन या लिंग की त्वचा के नीचे परिशुद्ध करण (circumcision) या सफाई करनी चाहिए।

पेनिस के रोग को दूर करने के उपाय 
लिंग स्वास्थ्य को बनाए रखने एवं लिंग से सम्बंधित समस्याओं को रोकने के लिए निम्न कदम उठाये जा सकते हैं:

लिंग को साफ रखें 

कम साबुन का उपयोग कर धीरे-धीरे लिंग को पानी से साफ करना चाहिए। तथा यदि संभव हो तो फोरस्किन के नीचे भी साफ करना सुनिश्चित करें।

नियमित रूप से लिंग की जांच करें

 प्रत्येक व्यक्ति को नियमित रूप से सभी यौन अंगों जैसे कि अंडकोष और अंडकोश की थैली (Scrotum) आदि में असामान्यता की जाँच करनी चाहिए।

सेक्स भागीदारों को कम करें

 अधिक व्यक्तियों के साथ यौन संबंध रखने से बचें तथा बच्चे के लिए प्रयास ना करने के दौरान प्रत्येक बार सेक्स करते समय कंडोम का प्रयोग करें।

धूम्रपान बंद करें 

धूम्रपान मानव के सम्पूर्ण स्वास्थ्य और लिंग (Panis) के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है। अतः धूम्रपान और शराब के सेवन से बचना चाहिए।

स्वास्थ्य प्रबंधन

 विभिन्न चिकित्सकीय स्थितियां और दवाएं का प्रभाव सम्पूर्ण स्वास्थ्य पर होता है जो कि लिंग के कार्य को भी प्रभावित कर सकती हैं।
खेल और अन्य गतिविधियों के दौरान प्रत्येक व्यक्ति को लिंग (Panis) की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए सुरक्षात्मक सामग्री का उपयोग करना चाहिए।
यदि कोई व्यक्तिलिंग (Panis) में किसी भी तरह के बदलाव का अनुभव कर रहा हो तो उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

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