Saturday, 22 June 2019

Sex Education ( यौन शिक्षा )



यौन  शिक्षा (सेक्स एजुकेशन )

सेक्स का सही ज्ञान उतना ही जरूरी है, जितना कि दूसरे विषयों का ज्ञान । हमारे देश में मेडिकल कॉलेज तक में सेक्स एजुकेशन नहीं दिया जाता, जिसके परिणामस्वरूप सेक्स संबंधी अंधविश्वास, भ्रांतियां और इससे जुड़ी कई समस्याएं उत्पन्न होती है।

सेक्स एजुकेशन (Sex Education) क्या है-

व्यक्ति के शरीर की यौन संरचना, यौन क्रियाएं, यौन प्रजनन, शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव, सुरक्षित यौन संबंध, प्रेगनेंसी, माहवारी और बर्थ कंट्रोल के बारे में बच्चों और किशोर लड़के लड़कियों को बताना सेक्स एजुकेशन कहलाता है।

 भारतीय समाज में आमतौर पर घरों में बच्चों को यौन शिक्षा नहीं दी जाती है लेकिन बच्चों के साथ बढ़ते यौन उत्पीड़न और किशोरावस्था में बलात्कार की घटनाओं के कारण बच्चों को जागरूक करने के लिए स्कूलों में सेक्स एजुकेशन देने की शुरूआत की गयी है। कई स्थानों पर बच्चो को नुक्कड़ नाटक और विभिन्न तरह के कार्यक्रम आयोजित करके सेक्स एजुकेशन दी जाती है।

यदि सही उम्र में यौन शिक्षा दी जाए तो किशोर मातृत्व, अनचाहे गर्भ, यौन अपराध, गुप्त रोग तथा एड्‍स जैसी गंभीर और लाइलाज बीमारियों से बचा जा सकता है। साथ ही सेक्स संबंधी समस्याएं जैसे- हस्तमैथुन से उत्पन्न अपराधबोध, नपुंसकता, स्वप्नदोष, धातु रोग और लिंग के आकार को लेकर विभिन्न भ्रांतियों से भी आसानी से मुक्त हुआ जा सकता है।

बदलते परिवेश और युवाओं की जिज्ञासाओं को देखते हुए 9वीं-10वीं कक्षा से सेक्स एजुकेशन दिया जा सकता है क्योंकि 13-14 वर्ष की उम्र में लड़के-लड़कियों में शारीरिक परिवर्तन होते हैं। 
सही यौन शिक्षा मिलने से लड़के-लड़कियां अपने शारीरिक परिवर्तनों से घबराएंगे नहीं, नकारात्मक रूप से नहीं सोचेंगे और शार‍ीरिक परिवर्तनों को सहज रूप से लेकर जिम्मेदार नागरिक बनेंगे।

दुर्भाग्य से हमारे देश में सेक्स संबंधी वैज्ञानिक व तार्किक पहुलओं पर खुलेआम चर्चा नहीं होती।                    इस विषय पर बात करना भी वर्जित माना गया, जबकि गुप्तांग भी शरीर के वैसे ही अंग हैं, जैसे ‍कि अन्य अंग । 

यौन समस्याओं का कारण भले ही मानसिक हो अथवा शारीरिक, लेकिन एक बात की कमी सभी व्यक्तियों में समान रूप से पाई गई है, वह है यौन शिक्षा का अभाव ।

सेक्स एजुकेशन न होने से व्यक्ति सेक्स संबंधी अनेक मानसिक परेशानियों से घिर जाता है, जो कि वास्तव में होती ही नहीं हैं। आधी-अधूरी जानकारी के कारण व्यक्ति ऐसी समस्या को स्वयं विकराल बनाकर आत्मग्लानि का शिकार हो जाता है।

अक्सर माता-पिता बच्चों को सेक्स के बारे में यह सोचकर कोई जानकारी देना ज़रूरी नहीं समझते कि उन्हें भी तो उनके माता-पिता ने इस बारे में कुछ नहीं बताया था  तो क्या इससे उनके सेक्स जीवन पर कोई बुरा प्रभाव पड़ा,  फिर आज तो ज़माना इतना एडवांस हो गया है कि उम्र से पहले ही बच्चों को सब कुछ पता चल जाता है फिर अलग से कुछ बताने-समझाने की ज़रूरत ही क्या है,  लेकिन अक्सर हमारी यही सोच बच्चों के लिए हानिकारक साबित होती है

हम अपने बच्चों को सेक्स शिक्षा दें या न दें, उन्हें अश्‍लील पत्र-पत्रिकाओं, टीवी, फ़िल्म, इंटरनेट, यहां तक कि शौचालय की दीवारों से भी सेक्स संबंधी ऐसी कई आधी-अधूरी व उत्तेजक जानकारियां मिल ही जाती हैं, जो उन्हें गुमराह करने के लिए काफ़ी होती हैं. उस पर उनका चंचल मन अपने शरीर की अपरिपक्वता को देखे-जाने बिना ही सेक्स को लेकर कई तरह के प्रयोग करने के लिए मचलने लगता है और कई मामलों में वे इसे हासिल भी कर लेते हैं और नतीजा  अनेक शारीरिक-मानसिक बीमारियां, आत्मग्लानि, पछतावा  और पढ़ाई, करियर का नुक़सान सो अलग । 

लेकिन हमारी विडंबना ये है कि 21वीं सदी के जेट युग में जीते हुए भी अभी तक हम ये नहीं तय कर पा रहे हैं कि हम अपने बच्चों को सेक्स एज्युकेशन दें या न दें और दें तो कब और कैसे ? जबकि अब समय आ गया है कि सेक्स एजुकेशन दें या न दें से परे हम ये सोचें कि कैसे और किस उम्र से बच्चों को सेक्स शिक्षा दी जाए । 

 सेक्स एजुकेशन क्यों ज़रूरी है-

यूं तो हमारे न बताने पर भी बच्चों को दोस्तों, पत्र-पत्रिकाओं या फिर इंटरनेट के ज़रिए सेक्स की जानकारी मिल ही जाती है, फिर भी क्यों हमें उन्हें सेक्स एजुकेशन देना चाहिए, आइए जानते हैं-
1-  उन्हें अपने शरीर के बारे में संपूर्ण जानकारी हो सके.
2- वे लड़का-लड़की दोनों के ही साथ कंफ़र्टेबल होकर बातचीत व व्यवहार कर सकें.
3- उनके साथ या किसी अन्य के साथ हो रहे सेक्सुअल शोषण, बलात्कार आदि को समझ सकें और उसे रोकने में सहयोग कर सकें.
4- किशोरावस्था में होनेवाले शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, सेक्सुअल बदलावों को जानने-समझने के लिए तैयार हो सकें.
5- आगे चलकर जब उनके मन में सेक्स की भावना उत्पन्न हो, तो उसे हेल्दी तरी़के से ले सकें तथा इसे लेकर उनके मन में कोई अपराध भावना न जन्म ले.
6- एसटीडी (सेक्सुअली ट्रांसमीटेड डिसीज़) से बचाव को लेकर जागरुक हो सकें.
7- आगे चलकर एक सुखद वैवाहिक जीवन जी सकें तथा आदर्श अभिभावक की ज़िम्मेदारी निभाने के लायक बन सकें। 

स्कूलों में सेक्स शिक्षा दी जाए या नहीं-

बच्चों को सेक्स शिक्षा देना बेहद ज़रूरी है, लेकिन स्कूलों में यदि सेक्स शिक्षा दी जाए तो निम्न बातों पर ध्यान देना ज़रूरी है-

1- सेक्स शिक्षा वही शिक्षक दें, जिनकी इस विषय पर अच्छी पकड़ हो तथा जो बच्चों के सवालों का जवाब वैज्ञानिक तथ्यों के साथ अर्थपूर्ण तरी़के से दे सकें। 
2- प्यूबर्टी पीरियड के शुरू होने से पहले सेक्स शिक्षा दी जाए। 
3- बच्चों को सेक्स शिक्षा देते समय भाषा तथा शब्दों पर विशेष ध्यान दिया जाए। 
4- धार्मिक या सांस्कृतिक मान्यताओं से परे वैज्ञानिक व सामाजिक मापदंडों को ध्यान में रखकर सेक्स शिक्षा दी जाए। 
5- लड़के-लड़कियों को एक साथ सेक्स शिक्षा दी जाए, ताकि आगे चलकर इस मुद्दे पर बात करते समय वे हिचकिचाएं नहीं। 
6- सेक्स शिक्षा देते समय स्केचेज़, डायग्राम, चार्ट, स्लाइड्स आदि का प्रयोग किया जाए, नग्न तस्वीरों, पोर्नोग्राफ़ी आदि का बिल्कुल भी प्रयोग न हो। 
7- बच्चों को उनके सवाल लिखकर देने का सुझाव भी दें, ताकि बच्चे पूछने से हिचकिचाएं नहीं तथा शिक्षक उनके मन को अच्छी तरह जान-समझ सकें। 
8- सेक्स शिक्षा हमेशा ग्रुप में दी जाए, अकेले नहीं। 


अधिक जानकारी के लिए Dr.B.K.Kashyap से संपर्क करें 9305273775

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Saturday, 8 June 2019

पुरुष बांझपन (Male Infertility)




पुरुष बांझपन के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव

पुरुषों में स्पर्म की गुणवत्ता और उसकी मात्रा गर्भ धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है हर दंपत्ति अपने जीवन में संतान का सुख चाहता है लेकिन कई महिलाओं को प्राकृतिक रूप से गर्भ धारण करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अगर 1 साल नियमित प्रयास करने पर भी गर्भधारण में सफलता नहीं मिले तो इसे इनफर्टिलिटी कहते हैं  आमतौर पर ये देखा गया है कि सोसाइटी में इनफर्टिलिटी को सिर्फ महिलाओं से जुड़ी समस्या समझा जाता है लेकिन निःसंतान दंपत्तियों में 30-40 % मामलों में पुरुष नि: संतानता की वजह हो सकते हैं ।

जब पुरुष का स्पर्म काउंट कम हो या उसके स्पर्म एग को फर्टिलाइज करने के योग्य न हों तब उसे मेल इनफर्टिलिटी कहते हैं।
इसके अलावा पुरुषों में बांझपन की समस्या के पीछे खराब जीवनशैली, बीमारी, चोट, गंभीर स्वास्थ्य समस्या आदि कारक जिम्मेदार  होते हैं । 

पुरुष बांझपन के कारण

मेल इनफर्टिलिटी के लिए तीन (या अधिक) प्राथमिक कारक हो सकते हैं । 
ओलिगोजोस्पर्मिया (शुक्राणुओं की कम संख्या), टेराटोजोस्पर्मिया (शुक्राणुओं की असामान्य रूपरेखा) और स्पर्म ट्रांसपोर्ट डिसआर्डर । 
मेल फैक्टर इनफर्टिलिटी के करीब 20 प्रतिशत मामलों में स्पर्म ट्रांसपोर्ट डिसआर्डर ही जिम्मेदार होते हैं । 

पुरुष का सीमेन (Semen) एक दूधिया तरल पदार्थ जैसा होता है जो संभोग के चरम अवस्था पर लिंग (penis) से निकलता है । इसी सीमेन में पुरुष का स्पर्म होता है । जब पुरुष के स्पर्म की संख्या कम होती है तो वह महिला के अंडे से नहीं मिल पाता है इस कारण पुरुष महिला को प्रेगनेंट करने में असमर्थ हो जाता है।

यदि पुरुष का स्पर्म असामान्य आकार (abnormal size) का होता है तब भी वह महिला के अंडे के साथ निषेचित नहीं हो पाता है । इसके अलावा यदि पुरुष का सीमेन असामान्य है तो वह स्पर्म को प्रभावी तरीके से पहुंचा नहीं पाता है ।

वेरिकोसिल (varicocele) के कारण भी पुरुषों में बांझपन की समस्या हो जाती है । वेरिकोसिल नसों में एक प्रकार का सूजन है जिसके कारण पुरुष का वृषण (testicle) या अंडकोश सूख जाता है और वे बांझपन के शिकार हो जाते हैं । यह समस्या होने पर स्पर्म कमजोर हो जाते हैं ।

पुरुषों के गुप्तांगों में इंफेक्शन होने से भी उन्हें बांझपन की समस्या हो सकती है । कुछ इंफेक्शन ऐसे होते हैं जो स्पर्म बनने में बाधा उत्पन्न करते हैं और स्पर्म की नली को अवरूद्ध कर देते हैं । 

अधिवृषण (epididymis) और पुरुष के अंडकोश (testicles) में सूजन होने या यौन संचारित संक्रमण जैसे गोनोरिया एवं एचआईवी होने के कारण भी पुरुष वीर्य़कोष क्षतिग्रस्त हो जाता है जिसके कारण शुक्राणु पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते हैं । 

यदि किसी पुरुष को ट्यूमर की समस्या हो तो हार्मोन का उत्पादन करने वाली ग्रंथियां जैसे पिट्यूटरी ग्लैंड और उसके प्रजनन अंग इससे सीधे प्रभावित होते हैं । इसके कारण पुरुष बांझ हो जाता है । 

पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की कमी एवं अन्य हार्मोन संबंधी दिक्कतों के कारण भी उन्हें बांझपन की समस्या हो सकती है

स्पर्म काउंट में कमी होना,  शुक्राणु का बनना लेकिन बाहर नहीं आ पाना 
। 
Hormone deficiency के चलते पुरुषों में Testosterone की मात्रा घट जाती है जिससे sperm count कम या nil यानि शून्य भी हो सकता है ।

Anemia, Thyroid Diabetes जैसी बीमारियों से भी पुरुषों की fertility पर काफी असर पड़ता है ।

इन सभी कारणों में सबसे मुख्य कारण कम स्पर्म काउंट को माना गया है तो आइये जनते हैं स्पर्म काउंट से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी और साथ ही अगर पुरुष में स्पर्म की मात्रा कम हो तो क्या हैं उसके इलाज़।

स्पर्म काउंट कम होना


पुरुषों में स्पर्म की गुणवत्ता और उसकी मात्रा गर्भ धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है 
। 
 स्पर्म काउंट 15 मिलियन या इससे अधिक होना सामान्य माना जाता है लेकिन 15 मिलियन से कम होने पर स्पर्म काउंट असमान्य होने के श्रेणी में आता है ।

अधिक रेडिएशन और एक्सरे के प्रभाव से भी पुरुषों में स्पर्म बनना कम हो जाता है जिससे वे महिला को गर्भवती करने में असमर्थ हो जाते हैं । 

अधिक एल्कोहल के सेवन, धूम्रपान, शरीर का वजन बढ़ना एवं ड्रग्स के सेवन से भी पुरुषों को बांझपन हो सकता है । 

पुरुष बांझपन के लक्षण

पुरुषों में बांझपन का मुख्य लक्षण यह है कि वह असुरक्षित यौन संबंध बनाने के बाद भी  महिला को गर्भवती नहीं कर पाते हैं । पुरुषों के शरीर में पहले से ही बांझपन के कुछ लक्षण जैसे हार्मोन का असंतुलन, वृषण की नसें फैल जाना या शुक्राणु नली का अवरूद्ध हो जाना, आनुवांशिक विकार आदि संकेत उन्हें महसूस होते हैं लेकिन वे इसपर शुरूआत में ही अधिक ध्यान नहीं दे पाते हैं । 
पुरुषों में बांझपन के लक्षण निम्न हैं:-

यौन संबंध बनाने में समस्या, स्खलित होने में कठिनाई और स्खलन (ejaculation) में कम मात्रा में तरल पदार्थों का निकलनासेक्स करने की इच्छा में कमी, उत्तेजना में कमी (erectile dysfunction) आदि पुरुषों में बांझपन के लक्षण हो सकते हैं । 

वृषण (testicle) और इसके आसपास की जगहों में दर्द, सूजन और गांठ की समस्या बांझपन का लक्षण हो सकता है । 

बार-बार श्वसन तंत्र में इंफेक्शन होना, सूंघने की क्षमता में कमी आदि बांझपन के लक्षण होते हैं । 

पुरुषों में असामान्य रूप से स्तन का विकास (gynecomastia), शरीर और चेहरे पर बालों का कम होना गुणसूत्र या हार्मोनल असामान्यता का लक्षण है । जिससे वे बांझ हो सकते है । 

पुरुषों के प्रति मिली लीटर सीमेन में शुक्राणुओं को संख्या 15 लाख से कम होना या स्खलन के दौरान कुल शुक्राणुओं की संख्या 39 लाख से कम होना पुरुषों में बांझपन का संकेत है 

पुरुष बांझपन का निदान

सबसे पहले डॉक्टर पुरुष का शारीरिक परीक्षण करते हैं और कुछ टेस्ट के जरिए पुरुषों में बांझपन की समस्या का निदान करते हैं डाक्टर पुरुषों के सीमेन का टेस्ट करते हैं और स्पर्म के गुणवत्ता और संख्या का पता लगाते हैं । 
इसके अलावा पेनिस से तरल पदार्थ निकालकर संक्रमण की जांच की जाती है ।
 फिर लिंग, अंडकोश (scrotum) और प्रोस्टेट ग्रंथि की जांच करते हैं। 
पुरुषों में बांझपन के जांच के लिए सीमेन का परीक्षण करना बहुत आवश्यक होता है । बांझपन के निदान के लिए निम्न टेस्ट किए जाते हैं 

ब्लड टेस्ट

टेस्टोस्टीरोन के स्तर और अन्य हार्मोन की जांच करने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है 

सीमेन की जांच

सीमेन का सैंपल लिया जाता है और इसकी सांद्रता, रंग एवं गुणवत्ता का परीक्षण किया जाता है 

अल्ट्रासाउंड

अल्ट्रासाउंड के जरिए अंदरूनी समस्याओं और खराब स्खलन के बारे में पता लगाया जाता है 
पुरुष बांझपन का इलाज- पुरुषों बांझपन दूर करने का इलाज बहुत सामान्य तरीके से किया जाता है । इलाज से पहले डॉक्टर बांझपन का निदान करते हैं और उसके कारणों के बारे में पता लगाते हैं । फिर इसी आधार पर पुरुषों में बांझपन का इलाज किया जाता है 

अधिक स्पर्म के उत्पादन के लिए पुरुषों को आयुर्वेद  दवाएं दी जाती हैं 

इसके अलावा  आयुर्वेद दवाओं के द्वारा ही पुरुषों में सेक्स के लिए उत्तेजना को भी बढ़ाया जाता है 

इंफेक्शन को दूर करने के लिए आयुर्वेद एंटीबायोटिक्स दिया जाता है 
हार्मोन असंतुलन को दूर करने के लिए हार्मोनल आयुर्वेद दवाएं दी जाती  है 

इसके अलावा भी बांझपन (banjhpan ) को दूर करने के लिए कई प्रकार के उपचार किये  जाते हैं । 

यदि किसी पुरुष में स्पर्म की संख्या कम है तो कृत्रिम तरीके से वीर्यारोपण (insemination) किया जाता है । इस प्रक्रिया में कई बार स्खलन कराकर स्पर्म एकत्र किया जाता है । इसके बाद इसे मैनुअली उस स्पर्म को महिला के गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब में प्रवेश कराया जाता है 
पुरुषों में बांझपन को दूर करने के लिए विट्रो फर्टिलाइजेशन (VF) भी एक तरीका है । इस प्रक्रिया में पुरुषों के स्पर्म और महिलाओं के अंडे को एक प्रयोगशाला में निषेचित किया जाता है उसके बाद निषेचित अंडे को महिला के गर्भाशय में रखा जाता है 

यदि टेस्ट में यह पता चलता है कि किसी पुरुष के शरीर में स्पर्म बिल्कुल नहीं बन रहा है तो दाता शुक्राणु (doner sperm) की  सहायता से महिला को गर्भवती कराया जाता है । इस प्रक्रिया में स्पर्म बैंक से डोनर स्पर्म लिया जाता है और कृत्रिम वीर्यारोपण से महिला के गर्भाशय में डाला जाता है 

पुरुषों में बांझपन से बचाव

आमतौर पर पुरुषों में आनुवांशिक समस्या और बीमारी के कारण हुए बांझपन से बचने का कोई उपाय नहीं है । लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर पुरुषों में बांझपन की संभावना को जरूर कम किया जा सकता है 
यौन संचारित संक्रमण से होने वाले रोगों से बचें और यह समस्या हो जाए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं 
नशीली दवाओं और ड्रग्स के सेवन से बचें 
विषाक्त और हानिकारक पदार्थों (toxins) के संपर्क में आने से बचें 
जहां तक संभव हो रेडिएशन से दूर रहें 
अधिक और लगातार एल्कोहल का सेवन करने से बचें 
अधिक देर तक गर्म पानी में स्नान करने से बचें, इससे वृषण गर्म हो सकता है 
अंडरवियर थोड़ी ढीली पहनें 
मानसिक तनाव से दूर रहें और वजन को नियंत्रित रखें 


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