रविवार, 23 अप्रैल 2023

क्या लिंग को लंबा-मोटा करना जरूरी है जानिए डॉ0 बी0 के0 कश्यप (sexologist) से



क्या लिंग को लंबा-मोटा करना जरूरी है जानिए डॉ0 बी0 के0 कश्यप (sexologist) से -

आज पुरुष अपने लिंग का आकार बढ़ाने (Penis Enlargement) के लिए क्या कुछ नहीं करते हैं। यह एक नहीं अधिकतर भारतीय पुरुषों की समस्या होती जा रही है।

सेक्सोलॉजिस्ट (Sexologist) कहते हैं, ‘अधिकतर भारतीय पुरुष अपने लिंग का आकार बढ़ाने (Penis Size) के लिए परेशान दिखते हैं। अपने पेनिस के साइज से वे संतुष्ट नहीं हो पाते, इस कारण वे बहुत से उपाय आजमाते हैं।’
कई बार वे पेनिस एनलार्जमेंट के लिए क्रीम, तेल या वैक्यूम पंप का उपयोग करते हैं। बल्कि उनको यह समझने की आवश्यकता है कि क्या वाकई उनको लिंग का साइज बढ़ाने की जरूरत है?

लिंग साइज बढ़ाने से जुड़े भ्रम पैदा करने वाले तमाम सवालों के जवाब जिसकी जानकारी सेक्सोलॉजिस्ट डॉ0 बी0 के0 कश्यप द्वारा दी गई ताकि कोई भी पुरुष अपनी इस परेशानी से निजात पा सके।


पुरुष लिंग की लंबाई कितनी होनी चाहिए?

मेडिकल साइंस के अनुसार प्रत्येक पुरुष के पेनिस की औसतन लंबाई 4-5 इंच होती है। वह इरेक्शन / उत्तेजित होने पर करीब 6 इंच तक बढ़ सकता है। मगर इसके बाद भी कुछ पुरुष अपने लिंग को और लंबा करना चाहते हैं। जबकि, लिंग लंबा करने की जरूरत उनको है जिनके पेनिस की लंबाई 4 इंच से कम होती है।
यहां पर हमें यह भी समझने की जरूरत है कि यौन संतुष्टि (Sexual Satisfication) के लिए लिंग का लंबा होना जरूरी है या मोटा होना। ऐसी ही जरूरी बातों की जानकारी नीचे दिए सवालों के जरिए समझने की कोशिश करेंगे।


क्या पार्टनर करती हैं शिकायत?

डॉ0 कश्यप बताते है की हमारे पास ऐसे कई केस आते हैं। जिसमें पुरुष बताते हैं कि उनकी पार्टनर पेनिस साइज़ से खुश नहीं है। आगे चलकर कुछ महिलाएं इसको लेकर ताना भी मारने लगती हैं। हालांकि, कई बार पुरुष खुद ही अपने पेनिस के साइज से खुश नहीं होते हैं। इस वजह से वे अच्छी तरह से सेक्स नहीं कर पाते हैं। हालांकि यह बात साबित हो चुकी है कि ऑर्गेज्म (Orgasm) को लेकर भारतीय महिलाएं खुश नहीं। इस मामले में 70 प्रतिशत पुरुष फेल हैं।



पुरुष क्यों बढ़ाना चाहते हैं लिंग की साइज?

कई पुरुष पोर्न में देखे गए पेनिस साइज को सही मान लेते हैं। उनको साउथ अफ्रीका या अन्य देशों के पुरुषों की तरह लिंग को बढ़ाने की चाहत होती है। इसलिए हमे लिंग साइज़ से जुड़े मिथ की जानकारी कर लेनी चाहिए।



मिथ 1. छोटे या पतले लिंग का संबंध सेक्शुअल बीमारी से है?

अगर लिंग में किसी प्रकार की अपंगता जैसे लक्षण नहीं हैं। इस तरह की समस्या को बीमारी नहीं कह सकते हैं। लिंग की लंबाई इरेक्शन और मोटाई ब्लड फ्लो से बढ़ती है। इसलिए हर बार पेनिस के साइज को लेकर गलत नहीं ठहरा सकते। इसके लिए आपको अपना रक्त प्रवाह भी सही करना होगा। इसके लिए प्रतिदिन योग करने के साथ ही हेल्दी डाइट लेने की जरूरत है।

मिथ 2. क्रीम या वैक्यूम पंप से लिंग का साइज 100 प्रतिशत बढ़ सकता है?

पेनिस एनलार्जमेंट के लिए बाजार में कई भ्रामक उत्पाद बिक रहे हैं। जिसका इस्तेमाल भी धड़ल्ले से हो रहा है। मगर अब तक इन चीजों को मेडिकल अप्रूवल नहीं मिला है। इसलिए इनकी ओर से किया गया 100 प्रतिशत का दावा लुभावना है।

पेनिस एनलार्जमेंट सर्जरी में सक्सेस मिली है। लेकिन यह थोड़ी महंगी और जोखिम भरी है। हालांकि इसको भी मेडिकल अप्रूवल मिलना बाकी है।

इसलिए हम किसी प्रकार के दावे पर यकीन नहीं कर सकते। पेनिस एनलार्जमेंट क्रीम, तेल या वैक्यूम पंप के कारण कई बार लिंग को चोट पहुंच जाती है और गंभीर रूप से संक्रमण भी फैल जाता है। इसलिए ऐसी चीजों का प्रयोग करने से पहले डॉक्टर से मिलें। साथ ही सेक्शुअल वेलनेस प्रोडक्ट्स (Sexual Wellness Products) का इस्तेमाल करने की आदत डालें।



मिथ 3. लिंग का साइज बढ़ाने से सेक्शुअल संतुष्टि अधिक मिलती है?

सेक्स एक साइकोलॉजिकल और मूड का गेम है। लिंग के छोटा होने से उतनी दिक्कत नहीं, जितनी उसकी मोटाई कम होने से होती है। क्योंकि पतला लिंग योनी में घर्षण पैदा नहीं कर पाता है। इस वजह से सेक्स के दौरान मजा नहीं आता।


मिथ 4. क्या शादी से पहले ऐसा करना बहुत जरूरी है?

लोगों के दिमाग में ऐसे वहम भर दिए जाते हैं और अधिकतर भारतीय पुरुष शादी से पहले इस चीज को लेकर टेंशन में आ जाते हैं। जबकि दिक्कत उनके सेक्स टाइमिंग, पेनिस इरेक्शन, शीघ्रपतन को लेकर होती है न कि लिंग के साइज से कोई दिक्कत होती है।


मिथ 5. क्या किसी भी उम्र में लिंग को बड़ा या मोटा करना संभव है?

इलास्टिक टिश्यू से बने होने के कारण पुरुषों के लिंग को मोटा करना या लंबा करना संभव है। यह कम से कम 50 साल की उम्र तक किया जा सकता है। मगर इसके लिए पहले कोई सटीक दवाई बनने दें।

मिथ 6. मोटे और पतले लोगों के लिंग साइज की समस्या?

ऐसा नहीं है कि मोटे लोगों का लिंग मोटा, लंबे और पतले लोगों के लिंग उनकी बॉडी साइज की तरह ही होता हैं। बॉडी साइज़ का, पेनिस साइज़ से कोई खास कनेक्शन नहीं होता है। लेकिन ये चीजें जेनेटिक्स पर ज्यादा निर्भर करती हैं।

लेकिन एक बात कहना चाहूंगा कि पतले पुरुषों के मुकाबले मोटे पुरुषों में लिंग के साइज को लेकर दिक्कत ज्यादा देखने को मिलती है। मोटे पुरुषों को लगता है कि उनका लिंग छोटा है। मगर ऐसे लोगों को अपने फैट को कम करने की जरूरत है जिसके बाद उनका लिंग साइज का भ्रम भी मिट सकता है।


निष्कर्ष :-

पेनिस एनलार्जमेंट की सही जानकारी न होने के अभाव में कुछ लोग नीम-हकीम या झोलाछाप डॉक्टर के चक्कर में पड़ जाते हैं। इस वजह से उनको आर्थिक और शारीरिक नुकसान उठाना पड़ता है। हालांकि कई पुरुषों को इसकी जरूरत भी नहीं होती फिर भी वे भ्रामक बातों के चक्कर में पड़ जाते हैं।



रविवार, 9 अप्रैल 2023

एसटीडी (सेक्शुअल ट्रांसमिटेड डिजीस )'ह्यूमन पेपीलोमा वायरस (एचपीवी)'

                      



ह्यूमन पेपीलोमा वायरस (एचपीवी)  क्या है?

एचपीवी (HPV) एक आम सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (Sexually transmitted infection (STI)) है। HPV का इंफेक्शन, इन्फेक्टेड व्यक्ति (महिला या पुरुष) के संपर्क में आने से होता है। खास बात यह कि इस वायरस के कारण होने वाली बीमारी के लक्षणों का पता भी नहीं चलता, क्योंकि वह बेहद मामूली होते हैं। जिससे पीड़ित को खुद यह पता नहीं चल पाता की वह एचपीवी (HPV) से संक्रमित है और सेक्स के दौरान पार्टनर को भी संक्रमित कर देता है इसकी वजह से शरीर के कुछ खास ऑर्गन जैसे हाथ (Hand), पैर (Feet) और प्राइवेट ऑर्गन (Genital Organ) में मस्से बनने लगते हैं। HPV संक्रमण (HPV Infection) इंटरकोर्स की वजह से भी एक त्वचा से दूसरे व्यक्ति की त्वचा में फैल सकता है। एचपीवी कई प्रकार के होते हैं और इसके कुछ टाइप से जेनिटल वॉर्टस (Genital warts) और कैंसर (Cancers) भी हो सकता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि वैक्सीन के जरिए इन स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। साथ ही यौन संबंध बनाने के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करके भी एचपीवी के संक्रमण से बचा जा सकता है।


एचपीवी कैसे फैलता है?

एचपीवी संक्रमित व्यक्ति के साथ सेक्स करने से यह पार्टनर को भी संक्रमित कर देता है। आमतौर पर एचपीवी का संक्रमण वजाइनल, एनल या ओरल सेक्स से फैल सकता है। ज्यादातर यह वजाइनल (Vaginal) या एनल सेक्स (Anal sex) के जरिए ही फैलता है। यदि आप एचपीवी (HPV) संक्रमित के साथ यौन संबंध बनाते हैं और उस व्यक्ति में भले ही उसके कोई संकेत या लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं, फिर भी आप संक्रमित हो सकते हैं। सेक्शुअली एक्टिव (Sexually active) किसी भी व्यक्ति को एचपीवी (HPV) हो सकता है, भले ही वह एक ही पार्टनर के साथ संबंध स्थापित करे। इतना ही नहीं संक्रमित होने के बाद आपको एक साल के बाद लक्षण आ सकते हैं, इसी वजह से इस बीमारी का पता लगाना और समय पर इलाज कराना मुश्किल हो जाता है। हालांकि अच्छी बात यह है कि हर किसी में यह खतरनाक नहीं होता। कई बार यह अपने आप ही चला जाता है। सेक्स और एचपीवी (Sex and HPV) एक दूसरे से कनेक्टेड है, लेकिन यौन संबंध (Sex) के दौरान सुरक्षा का ध्यान रखकर इस संक्रमण से पूरी तरह बचा जा सकता है।

हाई रिस्क एचपीवी में भी नहीं दिखते लक्षण (High-risk HPV symptoms)

इस वायरस से होने वाली बीमारी में सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि माइल्ड और गंभीर होने पर भी इसके कोई लक्षण नजर नहीं आते हैँ। लो रिस्क वाले लोगों में तो एचपीवी (HPV) समय के साथ अपने आप चला जाता है, लेकिन हाई रिस्क एचपीवी में भी लक्षण न दिखना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। इसलिए समय-समय पर चेकअप कराते रहना बहुत जरूरी है। बहुत से मामलों में कोशिकाओं (cell) में होने वाले असामान्य बदलाव का पता लगाकर सर्वाइकल कैंसर (cervical cancer ) से बचाव किया जा सकता है, यदि समय पर इसका उपचार न किया जाए तो कैंसर हो सकता है।


गर्भाशय ग्रीवा (cervix) की असामान्य कोशिकाओं का पता पैप टेस्ट (Pap test) से लगाया जा सकता है। हालांकि पैप टेस्ट सीधे तौर पर कैंसर या एचपीवी का पता नहीं लगता है, लेकिन यह कोशिकाओं में होने वाले असामान्य बदवाव को पता लगाता है जो एचपीवी (HPV) के लिए जिम्मेदार हो सकता है।
वुल्वा (vulva), पेनिस (penis), एनस (anus) और गले में हाई रिस्क एचपीवी (high-risk HPV) के लिए कोई टेस्ट नहीं है और एचपीवी का कोई लक्षण नहीं होता है। ऐसे में यदि यह कैंसर बन जाता है, तो कुछ लक्षण नजर आ सकते हैं। 

लड़कियों के लिए HPV वैक्सीन क्यों जरूरी है? 

HPV वैक्सीन ह्यूमन पेपिलोमा वायरस से बचाव के लिए प्रिस्क्राइब की जाती है। ह्यूमन पेपिलोमा वायरस के कारण महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर (Cervical cancers) का खतरा बढ़ने के साथ ही एनस, वल्वा, वजायना और थ्रोट के पिछले हिस्से को अपना शिकार तेजी से बनाता है। HPV वैक्सीन ह्यूमन पेपिलोमा वायरस के किसी भी प्रकार से बचाव में मददगार मानी गई है। वहीं महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के खतरे को ध्यान में रखते हुए सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Center for Disease Control and Prevention) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार लड़कियों के लिए HPV वैक्सीन को अनिवार्य बताया गया है। 

किन लोगों में ह्यूमन पेपीलोमा वायरस का खतरा ज्यादा होता है? 

ह्यूमन पेपीलोमा वायरस का खतरा निम्नलिखित लोगों में ज्यादा देखी जा सकती है। जैसे:

· अत्यधिक एल्कोहॉल का सेवन करना।

· पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है HPV खतरा।

· एक से ज्यादा लोगों के साथ यौन संबंध बनाना।

· इम्यूनसिस्टम (Immune system) कमजोर होना। इन स्थितियों में ह्यूमन पेपीलोमा वायरस का खतरा बढ़ जाता है।


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