मंगलवार, 20 फ़रवरी 2024

धात गिरने की समस्या (धातुरोग) और समाधान



धात गिरने की समस्या (धातुरोग)और समाधान


व्यक्तियों में बिना किसी से यौन संबंध बनायें वीर्य के अत्यधिक स्राव का होना धात गिरना, स्पर्मेटोरिया, शुक्राणु रोग या धातु रोग कहलाता है। सरल शब्दों में, यौन क्रिया में शामिल हुए बिना ही  स्खलन होना ‘धातु रोग’ कहलाता है।

यह घटना पेशाब या मल त्याग के दौरान भी देखी जा सकती है। इस स्थिति के साथ लिंग में जलन और कमजोरी जैसे विशिष्ट लक्षण भी आ सकते हैं।

आयुर्वेदिक के अनुसार, "धातु" शारीरिक ऊतक प्रणालियों का प्रतीक है। शरीर के भीतर सात अलग-अलग ऊतक प्रणालियाँ होती हैं, जिन्हें "सप्त धातु" कहा जाता है। प्रजनन ऊतकों की पहचान "शुक्र" (वीर्य) धातु के रूप में की जाती है। सात धातुओं में से, शुक्र धातु सबसे परिष्कृत है और इसमें अन्य सभी धातुओं की सर्वोत्कृष्टता समाहित होती है।


वीर्यपात के कारण


यौन गतिविधियों में कभी-कभार शामिल होने से स्पर्मेटोरिया का विकास हो सकता है।
अत्यधिक शराब का सेवन इस स्थिति की शुरुआत में योगदान कर सकता है।
हस्तमैथुन में अत्यधिक लिप्तता भी एक कारण हो सकता है ।
 
शुक्रमेह या धातु रोग के लक्षण

· वीर्य का अनैच्छिक स्राव,

· बेचैनी, रात में हल्का पसीना,

· अनिद्रा (नींद न आना),

· पेशाब करने में कठिनाई,

· हल्की भावनात्मक गड़बड़ी,

· चक्कर आना,

· ऊर्जा की कमी,

· एकाग्रता में कमी

स्पर्मेटोरिया का तुरंत समाधान करने में विफलता से विभिन्न प्रजनन संबंधी विकारों के साथ-साथ कई शारीरिक और मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी हो सकती हैं।
धातु रोग या स्पर्मेटोरिया का आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद के अनुसार, पुरुषों में पाया जाने वाला घना, सफेद, चिपचिपा पदार्थ शुक्र, प्रजनन में अपनी भूमिका के कारण जीवन के सार का प्रतिनिधित्व करता है।

इसके अलावा, यह मनुष्य की शारीरिक शक्ति, बुद्धि, स्मृति और समग्र रूप को बढ़ाता है। इसलिए, वीर्य की कमी को जीवन शक्ति की हानि, स्मृति में कमी के साथ जोड़ा गया है।

शुक्र धातु में संतुलन बहाल करने के लिए, शमन (शांति) और शोधन (शुद्धि) उपचारों का संयोजन नियोजित किया जाता है।
धातु रोग से राहत पाने के लिए सर्वोत्तम आयुर्वेदिक औषधियां

आयुर्वेद धातु रोग का समग्र रूप से इलाज करने की वकालत करता है, जिसमें आहार समायोजन, जीवनशैली में बदलाव और विशिष्ट हर्बल उपचार शामिल हैं।

यहां कुछ आयुर्वेदिक औषधियां हैं जो अक्सर धातु रोग के उपचार के लिए निर्धारित की जाती हैं:
 
1. शिलाजीत

शिलाजीत एक चिपचिपा राल जैसा आयुर्वेदिक दवा है जो सहस्राब्दियों से हिमालय के ऊंचे इलाकों में पौधे और सूक्ष्मजीवी मलबे के टूटने से उत्पन्न होता है। इसमें खनिज, फुल्विक एसिड और अन्य लाभकारी पदार्थों की उच्च सांद्रता होती है। शिलाजीत को आयुर्वेद में एक प्रभावी रसायन (कायाकल्प करने वाला) पौधा माना जाता है।

ऐसा माना जाता है कि शिलाजीत शरीर को पुनर्जीवित करता है, सहनशक्ति बढ़ाता है और शक्ति बहाल करता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है, सामान्य स्वास्थ्य में सुधार करता है। शिलाजीत में सूजन-रोधी गुण होते हैं, जो प्रजनन प्रणाली में सूजन और दर्द को कम करने में सहायता कर सकते हैं। यह एक कामोत्तेजक है और माना जाता है कि यह प्रजनन स्वास्थ्य को बढ़ाकर यौन प्रदर्शन में सुधार करता है।

2. अश्वगंधा


अश्वगंधा, जिसे अक्सर "इंडियन जिनसेंग" के नाम से जाना जाता है, और ये बिना किसी संदेह के, भारत में स्वप्नदोष की सर्वोत्तम आयुर्वेदिक दवा है। यह कई फायदे प्रदान करता है जो धातु रोग और संबंधित समस्याओं से निपटने में बहुत फायदेमंद हो सकते हैं।

अश्वगंधा एक इम्यूनोमॉड्यूलेटिंग और पुनर्जीवन देने वाला पौधा है। यह शुक्राणु हानि के इलाज के लिए एक प्रभावी और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली जड़ी-बूटी है क्योंकि यह पुरुष प्रजनन प्रणाली को बढ़ाती है। यह शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाता है और शुक्राणु की गतिशीलता और चिपचिपाहट को भी बढ़ाता है।

यह तनाव और उदासी का मुकाबला कर सकता है, ये दोनों ही स्पर्मेटोरिया के कारण हैं। इसके अलावा, यह पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर और प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है। इसका सेवन सीधे या तेल, पाउडर या काढ़े के रूप में किया जा सकता है।

3. सफेद मूसली


सफेद मूसली एक पौधा है जिसका उपयोग लंबे समय से कामोत्तेजक और अनुकूलन के रूप में किया जाता रहा है। सफेद मूसली यौन इच्छा और प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए एक शक्तिशाली कामोद्दीपक है। यह शुक्राणु की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर सकता है, जो धातु रोग प्रबंधन के लिए आवश्यक है। कहा जाता है कि सफेद मूसली शक्ति को बढ़ाती है।
 
4. गोक्षुरा

गोक्षुरा अपने मूत्रवर्धक और प्रजनन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले गुणों के लिए एक लोकप्रिय आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है। गोक्षुरा अच्छे मूत्र क्रिया को बढ़ावा देता है, जो धातु रोग के इलाज में सहायता कर सकता है। यह स्वस्थ शुक्राणु उत्पादन और गुणवत्ता को प्रोत्साहित करके पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाता है। गोक्षुरा एक कामोत्तेजक है जो यौन इच्छा को बढ़ाने में मदद कर सकता है।
 
5. चन्द्रप्रभा वटी

चंद्रप्रभा वटी एक आयुर्वेदिक हर्बल फॉर्मूलेशन है जो अपने मूत्र और प्रजनन प्रणाली प्रभावों के लिए पहचाना जाता है। चंद्रप्रभा वटी अच्छे मूत्र क्रिया को बढ़ावा देती है, जो धातु रोग से निपटने के लिए आवश्यक है। यह प्रजनन अंगों को सही ढंग से संचालित करके सामान्य प्रजनन स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।
 
6. शतावरी

शतावरी एक टॉनिक है जो गुर्दे संबंधी विकारों के इलाज में बेहद उपयोगी है। यौन दुर्बलता के सबसे प्रचलित कारणों में से एक गुर्दे की बीमारी है। परिणामस्वरूप, रात्रिकालीन उत्सर्जन, यौन दुर्बलता और बांझपन का इलाज करने में इसकी दृढ़ता से सलाह दी जाती है।

यह शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता और जीवन शक्ति को बढ़ाने के लिए भी जाना जाता है। यह सबसे प्रभावी प्राकृतिक प्रतिरक्षा बूस्टर है। शतावरी को सीधे आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में लिया जा सकता है, या इसे व्यापक रूप से सुलभ हर्बल फॉर्मूलेशन, पाउडर, तेल या काढ़े के रूप में लिया जा सकता है।
 

नेचुरल ट्रीटमेंट फॉर स्पर्मेटोरिया


स्पर्मेटोरिया का इलाज न कराने से बांझपन और विभिन्न यौन विकार हो सकते हैं।

· पोषक तत्वों से भरपूर और अच्छी तरह से संतुलित आहार लेने से शुक्राणु रोग के इलाज में पर्याप्त सहायता मिल सकती है।

· यह देखते हुए कि अवसाद और तनाव शुक्राणु रोग के लिए महत्वपूर्ण ट्रिगर हैं ऐसे में ध्यान, योग और नियमित व्यायाम से लाभ होता है ।

· भारत में वीर्यपात को कम करने के लिए कई घरेलू उपचार मौजूद है। इन उपचारों में केसर (केसर), बादाम, काली फलियाँ, अनार का रस और शतावरी की जड़ शामिल हैं।

· शुक्राणु रोग से पीड़ित व्यक्तियों को शराब, धूम्रपान और कड़वे और मसालेदार भोजन से बचना चाहिए।





शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2024

सेक्स के बाद महिलाओं में नजर आने वाले साइड इफेक्ट


                                     

सेक्स के बाद महिलाओं में नजर आएं ये लक्षण तो जरूर लें डॉक्टर से सलाह


1- योनि में जलन


सेक्स के बाद योनि में जलन महसूस होना किसी इंफेक्शन का संकेत हो सकता है। दरअसल, ल्यूब्रिकेशन की कमी, बर्निंग सेंसेशन का कारण बनने लगते हैं। वेजाइनल टिशूज में आने वाला खिंचाव भी जलन का कारण साबित होता है, जिसे पेनफुल सेक्स भी कहा जाता है। अगर लंबे समय तक इस तरह की समस्या परेशान कर रही है तो डॉक्टरी जांच करवाएं।
 

2- मसल क्रैंप्स


कुछ महिलाओं को सेक्स के बाद मांसपेशियों में ऐंठन बढ़ने लगती है। सेक्स के दौरान मसल्स में खिंचाव बढ़ने से हाथों, पैरों, काफ मसल्स और हिप्स में ऐंठन बढ़ जाती है। ऐसे में सेक्स से पहले पानी पीने से इस समस्या से बचा जा सकता है। इसके अलावा कुछ योगासनों को अभ्यास भी मसल्स क्रैंप के जोखिम को कम कर देते हैं।


3- वेजाइनल इचिंग


सेक्स के दौरान यीस्ट इंफे्क्शन और एसटीआई संक्रमण योनि में खुजली का कारण बन जाते हैं। इसके अलावा स्किन सेंसटीविटी और कण्डोम के इस्तेमाल से भी इचिंग की समस्या बढ़ने लगती है। ऐसी समस्या को दूर करने के लिए सेक्स के बाद वेजाइना को अवश्य क्लीन कर लें।
 

4- स्पॉटिंग


सेक्स के दौरान स्पॉटिंग होना सामान्य लक्षण नहीं है। वेजाइनल टिशू टियर होने या किसी प्रकार के इंफेक्शन से ग्रस्त होने से ये समस्या बढ़ने लगती है। अगर हर बार इस समस्या का सामना करना पड़ता है, तो डॉक्टरी जांच अवश्य करवाएं।


5- मूड स्विंग होना


सेक्स के बाद साइन ऑफ रिलीफ नज़र आता है। इसके बाद रोना और मूड सि्ंवग होना स्वाभाविक है। इसे हैप्पी टियर्स भी कहा जाता है। ऐसी स्थिति को पोस्ट कोईटल डिस्फोरिया कहा जाता है। इसके चलते महिलाएं अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर पाती है। ऐसे में सेक्स के बाद मूड स्विंग होना और रोना पूरी तरह से सामान्य है।





सोमवार, 29 जनवरी 2024

धूम्रपान बर्बाद कर सकती है आपकी सेक्शुअल लाइफ जानिए धूम्रपान के नुकसान


              

धूम्रपान बर्बाद कर सकती है आपकी सेक्शुअल लाइफ जानिए धूम्रपान के नुकसान 

सिगरेट आज के समय में अधिकांश लोगों के नियमित लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है। बहुत छोटी उम्र से ही लोग सिगरेट के आदी हो रहे हैं। ऑफिस में आलस महसूस होने पर लोगों को सिगरेट चाहिए, तो कॉलेज में लेक्चर से बोर होने के बाद स्टूडेंट्स को भी सिगरेट चाहिए। यह तो आप सभी को मालूम होगा की सिगरेट आपकी सेहत के लिए कितना हानिकारक हो सकती है, वहीं यह जानने के बावजूद भी लोग शौक से स्मोकिंग करते हैं।
सिगरेट न केवल आपके लंग्स और हार्ट को प्रभावित करती है, बल्कि आपके सेक्सुअल और रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर भी नकारात्मक असर डालती है।

सेक्सुअल हेल्थ को किस तरह प्रभावित कर सकती है स्मोकिंग


1. इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का कारण बनती है स्मोकिंग

स्मोकिंग ब्लड वेसल्स को संकुचित कर देता है, जिसकी वजह से पेनिस तक पर्याप्त मात्रा में ब्लड नहीं पहुंचता और पेनिस के लिए इरेक्शन मुश्किल हो जाता है। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन केवल पुरुषों के सेक्सुअल लाइफ को प्रभावित नहीं करता, बल्कि यह महिलाओं को भी प्रभावित करता है। क्योंकि यदि पुरुष इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का शिकार है, तो जाहिर सी बात है महिलायें सेक्सुअल प्लेजर एंजॉय नहीं कर पाएंगी।

2. स्पर्म और एग क्वालिटी को प्रभावित करती है स्मोकिंग

स्मोकिंग आपकी फर्टिलिटी यानी कि रिप्रोडक्टिव हेल्थ को प्रभावित कर सकती है। यह महिला एवं पुरुष दोनों पर लागू होता है, पुरुषों में स्मोकिंग करने से डीएनए फ्रेगमेंटेशन बढ़ जाता है, जो स्पर्म को डैमेज करते हैं और उन्हें इनफर्टाइल बनाते हैं। साथ ही इससे एंब्रियो डेवलपमेंट और एंब्रियो इंप्लांटेशन में परेशानी होती है और मिसकैरेज का खतरा भी बढ़ जाता है।

महिलाओं में स्मोकिंग ओवेरियन फंक्शन को प्रभावित कर सकती है, जिससे महिलाओं के रिप्रोडक्टिव हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं और मेच्योर एग काउंट कम होते जाते हैं। साथ ही साथ यह एग की फर्टिलिटी को भी प्रभावित करती है। स्मोक ओवरी में टॉक्सिक सब्सटेंस क्रिएट करते हैं, जिसकी वजह से एग्स ओवरी में ही खत्म होने लगते हैं।

3. ब्रेस्ट सैगिंग (ढीलापन) का कारण बन सकता है स्मोकिंग

महिलाओं में स्मोकिंग की आदत से ब्रेस्ट सैगिंग की समस्या हो सकती है। हालांकि, बढ़ती उम्र के साथ ब्रेस्ट सैगिंग होना बिल्कुल नॉर्मल है, परंतु यदि आप स्मोकिंग करती हैं, तो यह प्रीमेच्योर सैगिंग का कारण बन सकता है। इसके साथ ही स्मोकिंग ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को भी बढ़ा देता है। ब्रेस्ट सेक्सुअल एक्टिविटीज में एक अहम भूमिका निभाता है, और इसके प्रभावित होने से सेक्सुअल लाइफ पर नकारात्मक असर पड़ता है।

4. प्रीमेच्योर मेनोपॉज का कारण बन सकती है स्मोकिंग

स्मोकिंग जैसे लाइफस्टाइल फैक्टर मेनोपॉज के समय को प्रभावित करते हैं। सिगरेट पीने से ओवेरियन एजिंग की प्रक्रिया समय से पहले शुरू हो जाती है और परिप्रोडक्टिव हार्मोंस भी प्रभावित होते हैं। साथ ही ओवेरियन जर्म सेल्स पर स्मोकिंग का टॉक्सिक प्रभाव होता है, जो समय से पहले मेनोपॉज का कारण बन सकता है। इसके अलावा तंबाकू में मौजूद टॉक्सिंस एस्ट्रोजन प्रोडक्शन और सर्कुलेशन को प्रभावित करते हैं।

5. बढ़ जाता है वेजाइनल डिस्चार्ज का स्मेल और इन्फेक्शन का खतरा

स्मोकिंग करने से महिलाओं में हार्मोंस असंतुलित हो जाता है, जिसकी वजह से वेजाइनल माइक्रोबायोम असंतुलित हो जाता है और यह हानिकारक बैक्टीरिया को अपनी ओर आकर्षित करता है। जिससे कि संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही बॉडी में टॉक्सिंस के बढ़ने से वेजाइनल डिस्चार्ज से अधिक स्मेल आ सकता है। यह फैक्टर महिलाओं के रिप्रोडक्टिव और सेक्सुअल हेल्थ को नकारात्मक रूप में प्रभावित करता है।





गुरुवार, 28 दिसंबर 2023

चालीस के बाद सेक्शुअल हेल्थ को कैसे रक्खे सही


चालीस के बाद सेक्शुअल हेल्थ को कैसे रक्खे सही

 
उम्र बढ़ने पर कपल्स के मन में कई तरह की शंकाएं और बीमारिया बढ़ने लगती हैं। इसकी वजह से उनकी सेक्स लाइफ खराब होने लगती है। खासतौर पर 40 के बाद कपल्स के बीच इस तरह की परेशानियां कॉमन हैं। उनकी लाइफ में धीरे-धीरे सेक्सुअल एक्टिविटी खत्म होने लगती है। अपने शरीर को फिट रखिए। 40 के बाद बहुत सी बीमारियों जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल आदि का खतरा बढ़ जाता है। ये बीमारियां आपकी सेक्शुअल परफॉरमेंस को भी घटाती हैं। इसलिए योग, एक्सरसाइज, जॉगिंग, जुम्बा, कुछ भी करिए लेकिन अपने शरीर का ध्यान रखिए। ऐसे में आपको 40 के बाद सेक्सुअली एक्टिव रहना बहुत ही जरूरी है।
 

40 के बाद सेक्स क्यों है जरूरी

 
कुछ रिसर्च के अनुसार, जो कपल्स को सप्ताह में कम से कम 3 बार सेक्स करते हैं, उनके नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है। साथ ही इससे उनका मानसिक तनाव भी कम होता है। वहीं, इससे महिलाओं में मेनोपॉज के बाद होने वाली ड्राईनेस, दर्द इत्यादि को कम किया जा सकता है। ध्यान रखें कि 40 के बाद सेक्सुअली एक्टिव रहने का मतलब सिर्फ इंटीमेसी नहीं होता है, बल्कि आप एक-दूसरे के प्यार से गले लगाएं और किस करें, तो यह भी आपके लिए काफी है।
 

संवाद को न दें ब्रेक


40 के बाद आपके बीच का कम्यूनिकेशन नहीं टूटना चाहिए। कपल्स को हमेशा एक-दूसरे के साथ खुलकर बातचीत करते रहना चाहिए। इससे न सिर्फ आप एक-दूसरे की समस्याओं का हल कर सकते हैं, बल्कि इससे सेक्सुअली एक्टिव रहने में भी मदद मिलती है। साथ ही यह आपके मेंटल हेल्थ के लिए भी जरूरी है।

बीमारियों को न आने से सेक्सुअल हेल्थ के बीच


कुछ एक्सपर्ट्स की मानें तो कपल्स सेक्स लाइफ को 80 से 90 साल तक एक्टिव रख सकते हैं। इसमें किसी भी तरह की परेशानी नहीं होती है, लेकिन कई बार बढ़ती उम्र के साथ बीमारियों की वजह से सेक्सुअल लाइफ खराब होने लगता है। ऐसे में आपको अपने लाइफस्टाइल और हेल्थ पर ध्यान देने की जरूरत है। 
अपने शरीर को फिट रखिए। 40 के बाद बहुत सी बीमारियों जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल आदि का खतरा बढ़ जाता है। ये बीमारियां आपकी सेक्शुअल परफॉरमेंस को भी घटाती हैं। इसलिए योग, एक्सरसाइज, जॉगिंग, जुम्बा, कुछ भी करिए लेकिन अपने शरीर का ध्यान रखिए। बढ़ती उम्र के साथ होने वाली बीमारियों की समय-समय पर जांच कराते रहें। साथ ही समय पर अपनी दवाएं लें। इससे आपको सेक्सुअली एक्टिव रहने में काफी हद तक मदद मिलेगी।


रोजाना करें एक्सरसाइज


एक्सरसाइज हर एक वर्ग के लिए जरूरी होता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका शरीर लंबे समय तक स्वस्थ रहे तो नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। उम्र बढ़ने पर एक्सरसाइज को इग्नोन न करें। अगर आप नियमित रूप से एक्सरसाइज करते हैं, तो इससे सेक्सुअली एक्टिव रहने में मदद मिलेगी। दरअसल, एक्सरसाइज करने से सेक्सुअल एक्टिविटी के दौरान होने वाली परेशानी जैसे- कमर दर्द, पीठ दर्द की परेशानियों से राहत मिल सकता है। वहीं, एक्सरसाइज से ब्रेन का वर्कआउट भी बेहतर होगा, जो आपके मूड को अच्छा करता है। इससे आपके सेक्स लाइफ बेहतर होगी।

सेक्स लाइफ में ट्राई करें कुछ नया


कई बार कपल्स सोचते हैं कि अब उम्र हो चुका है, तो इन सब की कुछ जरूरत नहीं है। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि युवा या फिर वयस्क ही सेक्स लाइफ के दौरान नई-नई चीजों को ट्राई करें। आप अपनी बढ़ती उम्र के साथ भी सेक्सुअल एक्टिविटी को बेहतर करने के लिए कुछ नया कर सकते हैं। इससे आपका सेक्स लाइफ काफी अच्छा होगा।
बढ़ती उम्र के साथ सेक्सुअल लाइफ को बेहतर करने के लिए आप इन आसान से उपायों का सहारा ले सकते हैं। हालांकि, ध्यान रखें कि अगर आपकी सेक्स लाइफ की परेशानियां बढ़ रही हैं तो इस स्थिति में एक्सपर्ट से सलाह लें।

हेल्दी भोजन करें


मर्दाना ताकत बढ़ाने के लिए आपको संतुलित भोजन का सेवन करना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पानी पीना चाहिए क्योंकि ये शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है। इसके अलावा सभी प्रकार के मौसमी फलों और सब्जियों का सेवन करें। मर्दाना ताकत को कमजोर करने वाले फूड्स जैसे प्रोसेस्ड फूड और जंक फूड से दूरी बनाना ही सही होगा।



बुधवार, 29 नवंबर 2023

आयुर्वेद में वाजीकरण थेरेपी

                         



                                                                          

आयुर्वेद में वाजीकरण थेरेपी क्या है?

 

वाजीकरण थेरेपी


वजीकरण थेरेपी, आयुर्वेद को जानने वाले इस्तेमाल करते हैं। इसके जरिये शरीर में असंतुलित चीजों को संतुलन में लाकर ऊर्जा और शक्ति का संचार किया जाता है। ये थेरेपी लोगों में एंग्जायटी को कम कर के सेक्स ड्राइव को बढ़ाने का काम करती है और प्रजनन यानी रिप्रोडक्शन के हॉर्मोन को भी बढ़ाती है।

वाजीकरण


वाजीकरण आयुर्वेद की वो शाखा है जो सीधे-सीधे आपके यौन स्वास्थ्य पर आधारित है | वाजीकरण विषय स्वस्थ एवं सुदृढ़ काया, कामोत्तेजना, पौरुष शक्ति, शीघ्रपतन, स्तम्भन दोष एवं संतान प्राप्ति से सम्बंधित है |
    मह्रिषी चरक के अनुसार यौन स्वस्थता के लिए उचित खान पान, सही दिनचर्या एवं अच्छी नींद बहुत जरुरी है |

स्वस्थ एवं सुखी जीवन के तीन मुख्य आधार हैं 

· शुद्ध एवं संतुलित आहार |

· अच्छी नींद |

· स्वस्थ यौन संबंधो से भरा वैवाहिक जीवन |

यह तीनों आधार एक दुसरे से इतने जुड़े हैं कि किसी एक में कमी होने से बाकि दोनों भी प्रभावित होते हैं, एवं व्यक्ति मानसिक एवं शारीरिक असंतुष्टि महसूस करता है

आयुर्वेदानुसार किसी व्यक्ति की यौन क्षमता को चार भागो में विभाजित किया गया है 

1. चटक (Sparrow) :- इस प्रकृति का व्यक्ति कम समय तक सहवास कर पाता है एवं वीर्य की मात्रा भी कम होती है |

2. गज (Elephant) :- इस प्रकृति का व्यक्ति बहुत अधिक समयांतराल में यौन सम्बन्ध बनाता है | वीर्य स्खलन की मात्रा बहुत अधिक होती है |

3. वरुषा(Bull) :- इस प्रकृति का व्यक्ति अधिक मात्रा में वीर्य के साथ नियमित एवं अधिक समय तक सहवास की क्षमता |

4. अश्व (Horse) :- इस प्रकृति का व्यक्ति यौन शक्ति का प्रतिक माना जाता है, अच्छी स्तम्भन शक्ति एवं यौन क्षमता से भरपूर होता है |

घोड़े एवं बैल जैसी यौन शक्ति प्राप्त करने के लिए वाजीकरण में बताये गए योगो (दवाओं), खान-पान एवं दिनचर्या का कड़ाई से पालन करना बहुत आवश्यक है |
    वाजीकरण में बताये गए उपायों का उपयोग करके व्यक्ति 8 साल के घोड़े जैसी अच्छी काया, सामर्थ्य, कामोत्तेजना एवं यौन शक्ति प्राप्त कर सकता है | चरक संहिता के अनुसार यौन संतुष्टि, सुख की प्राप्ति एवं संतानोत्पति के लिए वाजीकरण का सहारा लेना चाहिए | वाजीकरण का प्रमुख लक्ष्य स्वस्थ मैथुन एवं प्रजनन क्षमता विकसित करना है | इसकी सहयता से व्यक्ति महिला के साथ घोड़े जैसी शक्ति से सम्भोग कर सकता है |

वाजीकरण में त्रिदोष एवं सप्त धातु के असंतुलन का प्रभाव 


आयुर्वेदानुसार मनुष्य ब्रह्माण्ड का एक अभिन्न अंग है | हमारा शरीर ब्रह्माण्ड का एक अंश है | त्रिदोष (वात, पित्त एवं कफ) व्यक्ति की प्रकृति को दर्शाते हैं | इन तीनों दोषों में असंतुलन हो जाये तो व्यक्ति के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है |

· वात :- धरती एवं हवा (Earth + Air)

· पित्त :- अग्नि एवं पानी (Fire + Water)

· कफ :- पानी एवं अग्नि (Water + Fire)

ख़राब दिनचर्या, अनुचित खान-पान एवं खाद्य पदार्थो का अनुचित संगम त्रिदोष असंतुलन का मुख्य कारण है | इससे व्यक्ति का स्वास्थय एवं यौन शक्ति प्रभावित होती है |

इसके साथ ही आयुर्वेद में सप्त धातु का वर्णन है | ये धातुएं एक नियमित संतुलन में शरीर में मौजूद होती है | इनमें किसी भी तरह की गड़बड़ी या असंतुलन बीमारियों का कारण बनता है | ये धातुएं हैं :-

· रस (Plazma)

· रक्त (Blood)

· स्नायु (Muscle)

· वसा (Fat)

· अस्थि (Bone)

· मज्जा (Bone Marrow)

· शुक्र (Reproductive liquid)
 

वाजीकरण अपनाकर पायें घोड़े जैसी अपार यौन शक्ति 


संस्कृत में वाजी का अर्थ है घोड़ा, वाजीकरण यानि घोड़े जैसे ताक़त एवं यौन शक्ति प्राप्त करना | आयुर्वेद की इस शाखा में उन सभी उपायों एवं उपचारों का उल्लेख है जिनका उपयोग करके व्यक्ति अपार यौन सामर्थ्य एवं बल प्राप्त कर सकता है | इस विषय में ऐसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों एवं रसायनों की जानकारी दी गयी है जो शीघ्रपतन, यौन दुर्बलता, धात की कमी, शुक्राणु की कमी, स्तम्भन दोष एवं कामोत्तेजना में कमी जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करने का सामर्थ्य रखती हैं |

लेकिन इनका पुर्णतः लाभ तभी मिल पाता है जब आप स्वस्थ जीवनशैली, उचित खान-पान एवं परहेज अपनाते हैं | इसलिए वाजीकरण द्रव्यों का इस्तेमाल करने के साथ अपनी जीवनशैली में बदलाव करना भी जरुरी है |

बाजार में मिलने वाले बहुत से वाजीकरण रसायन एवं दवाइयां इसलिए अपेक्षित लाभ नहीं करती क्योंकि या तो उनमे मिलावट होती है, या फिर आप उपयुक्त आहार एवं जीवनशैली नहीं अपना रहें है |

वाजीकरण में 100 से भी ज्यादा रसायनों एवं दवाओं का वर्णन है जो कामशक्ति बढाने के लिए बेहद लाभदायी हैं | यहाँ पर हम आपको वाजीकरण में वर्णित सबसे प्रभावशाली रसायनों एवं दवाओं के बारे में बतायेंगे | अगर ये रसायन आप को शुद्ध एवं मिलावट रहित मिल जाए तो आप अपनी यौन कमजोरियों को बड़ी आसानी से दूर कर सकते हैं |


1.वृहनी गुटिका (VRIHANI GUTIKA)


यह सबसे शक्तिशाली वाजीकरण रसायन है | वाजीकरण रसायन विशेष श्रेणी के रसायन होते हैं | ये हमारे मस्तिष्क एवं शरीर पर इस तरह से असर करते हैं की कामशक्ति एवं प्रजनन क्षमता दोनों में वृधि होती है | इनके सेवन से मानसिक तनाव एवं शारीरिक कमजोरी भी दूर होती है | वृहनी गुटिका सबसे ताक़तवर रसायन है, आइये जानते हैं इसके बारे में :-

वृहनी (Vrihani) गुटिका घटक द्रव्य 

· शारा जड़ (Roots of Saccharum Munja), इक्षु जड़ (Roots of Saccharum officinarium)

· कांदेक्शु (Asteracantha longifolia), इक्शुवालिका (Hygrophila spinosa)

· शतावरी (Asperagusracemosus), पयास्य (Holostemmarheedianum)

· विदारीकन्द (Diascoreabulbifera), काँटाकरिका (Solanum indicum)

· जीवंती (Leptadonia reticulata), जीवक (substitute Pueraria tuberosa)

· मेदा (substitute Asparagus racemosus), ग्वारपाठा (Aloe Vera)

· रिश्भाक (substitute Pueraria tuberosa), बला (Sida cordifolia)

· रिद्धि (substitute Diascoreabulbifera), गोक्षुर (Tribulus terrestris)

· रसना (Pluchea lanceolata), कपिकच्छु (Mucuna pruriens)

· पुनर्नवा (Boerhaaviadiffusa), घी (clarified butter)

· दूध (Milk), वंशलोचन (Bambusaerandinacia), पिप्पली (Piper longum)

· मरीच (Piper nigram), त्वक (Cinnamomum zeyliicum)

· एला (Ellataria cardamomum), नागकेसर (Nagkesar)

· शहद (Honey)

 
वृहनी गुटिका के फायदे एवं लाभ (Benefits of VrihaniGutika)


यह अद्भुद रसायन निम्न रोगों को जड़ से उखाड़ फेंकने का सामर्थ्य रखता है

· स्तम्भन दोष (Erectile Dysfunction)

· स्वपन दोष (Nightfall)

· वीर्य का पतलापन (watery Sperm)

· शीघ्रपतन (Pre-mature ejaculation)

· कामोत्तेजना की कमी (sexual desire)

 

2. वाजीकरण घृतं (Vajikaran Ghritam)


ये भी बहुत गुणकारी औषधि है | यह वाजीकरण रसायन मुख्यतः व्यक्ति के जननांग (Penis) की ताक़त बढाता है | इसमें निम्न घटक द्रव्यों का उपयोग होता है :-

· उड़द, कपिकच्छु, जीवक, रिश्भक, ग्वारपाठा

· मेदा, रिद्धि, शतावरी, मधुक, अश्वगंधा

· विदारीकन्द एवं इक्षु जूस

· शहद, वंशलोचन, शक्कर, पिप्पली

इस औषधि को रोजाना उपयोग करने से स्तम्भन दोष जड़ से ख़त्म हो जाता है | इसके साथ ही यह अन्य यौन कमजोरियों में भी फायदा पहुंचता है |
 

3. कामसुधा योग (Kamsudha Yog)


यह वर्त्तमान समय में यौन कमजोरियों के लिए सबसे गुणकारी एवं विश्वसनीय रसायन है | कामसुधा योग 20 से भी अधिक वाजीकरण द्रव्यों एवं खनिजों का अद्भुद योग है | यह सभी प्रकार की यौन समस्यों एवं शारीरिक क्षमता बढाने के लिए बहुत उपयोगी है |
सबसे अच्छी बात ये है की इसमें औषधियों को उनके सामान्य रूप में नहीं लेके उनका एक्सट्रेक्ट (सार द्रव्य) उपयोग में लिया जाता है | इस कारण यह सुरक्षित एवं प्रभावी वाजीकरण रसायनों में से एक है |

कामसुधा योग के फायदे 

· शीघ्रस्खलन या शीघ्रपतन को जड़ से खत्म कर देता है |

· स्तम्भन में वृद्धि करता है |

· कामोत्तेजना का संचार करता है |

· आंशिक एवं पूर्ण नपुंसकता में लाभदायी है |

· वीर्य को गाढ़ा करता है |

· शुक्राणुओं की कमी को दूर करता है |
 

4. मेदादी योग (Medadi Yog)


यह वृद्धों में कामोत्तेजना बढाने एवं यौन शक्ति का संचार करने के लिए सबसे उपयुक्त वाजीकरण दवा है | उम्र बढने के साथ साथ व्यक्ति अपनी कामशक्ति में भी कमी का एहसास करता है | मेदादी योग का सेवन करने से वृद्ध भी पुनः नवयुवको वाला जोश एवं कामशक्ति प्राप्त कर सकते हैं | आइये जानते हैं इसके घटक द्रव्य :-

· मेदा ( Asparagus racemosus)

· पयस्या (Holostemmarheedianum),

· जीवंती(Leptadonia reticulata)

· विदारीकन्द (Pueraria tuberosa)

· कंटकारी (Solanum xanthocarpum)

· गोक्षुर (Tribulus terrestris)

· उड़द (Black gram)

· गेंहू (wheat)

· चावल (Shali rice)










शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2023

फ्लूइड बान्डिंग क्या है और क्या है इसके रिस्क फैक्टर -डॉ0 बी0 के0 कश्यप (Psycho sexologist )




                                     


फ्लूइड बान्डिंग क्या है और क्या है  इसके रिस्क फैक्टर -डॉ0 बी0 के0 कश्यप (Psycho sexologist )


सेक्स के दौरान व्यक्ति कई तरह की सावधानियां बरतना भूल जाता है, तो ऐसे में अनचाहा गर्भ ठहरना, सेक्शुअल ट्रांसमिटेड डिजीज आदि होने का जोखिम बढ़ जाता है। 
    कुछ लोग सेक्स के दौरान बॉडी का तरल पदार्थ एक-दूसरे के साथ आदान प्रदान करते हैं। जिसमें सीमन, लार, ब्लड और इजैकुलेट भी शामिल है। इस तरह के बॉन्डिंग को फ्लूइड बॉन्डिंग कहते हैं।
    सेफ सेक्स के दौरान कॉन्डम, डेंटल डैम आदि का इस्तेमाल बैरियर की तरह काम करता है। जिससे कई तरह की सेक्शुअल ट्रांसमिटेड डिजीज से रोकथाम होती है।


फ्लूइड बॉन्डिंग लोग क्यों करते हैं?

फ्लूइड बॉन्डिंग में बहुत सारे लोगों का मानना है कि बैरियर मेथेड से वो अपनी सेक्स लाइफ एंजॉय नहीं कर पाता है, लेकिन जो लोग फ्लूइड एक्सचेंज करते हैं, वे लोग सिर्फ एक व्यक्ति के साथ कमिटेड रहते हैं। ऐसे लोगों में अगर फ्लूइड बॉन्डिंग होती है तो वे काफी आत्मविश्वास के साथ एक दूसरे के साथ रिलेशनशिप का आनंद लेते हैं, लेकिन इसका कोई प्रमाण नहीं है कि फ्लूइड एक्सचेंज से कोई खास भावनात्मक जुड़ाव होता है।


क्या बॉडी फ्लूइड ट्रांसफर से इमोशनल बॉन्डिंग बढ़ती है?

कुछ कपल्स का मानना है कि बॉडी फ्लूइड ट्रांसफर करने से हमारे बीच में इमोशनल बॉन्डिंग बढ़ती है। उनका ये भी मानना है कि ऐसा करने से उनके रिश्ते को एक नई दिशा मिलती है। बॉडी फ्लूइड ट्रांसफर करने से डीपर फिजिकल कनेक्शन का एहसास होता है। लेकिन फिर भी सेक्सुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन होने का जोखिम तो होता ही है।

फ्लूइड बॉन्डिंग बहुत सारे लोग एक से अधिक लोगों के साथ भी करते हैं। इससे यौन संचारित रोग फैलते हैं, लेकिन ऐसा करने के पीछे उनकी साइकोलॉजी जिम्मेदार होती है। ऐसा करने से उन्हें लगता है कि उन्होंने सेक्स के सभी स्टेप्स को बिना किसी बैरियर के कम्प्लीट किया है।

क्या सभी प्रकार के असुरक्षित यौन संबंध फ्लूइड बॉन्डिंग है?

असुरक्षित यौन संबंध का मतलब होता है कि बिना किसी बैरियर के पार्टनर के साथ सेक्स करना, लेकिन फ्लूइड बॉन्ड सभी तरह के अनसेफ सेक्स में नहीं होता है। फ्लूइड बॉन्ड कपल जानबूझ कर बनाते हैं। वहीं, कई बार सेफ सेक्स होने के बावजूद कॉन्डम फटने के कारण जो फ्लूइड ट्रांसफर होता है, उसे फ्लूइड बॉन्ड नहीं कहते हैं। वहीं विथड्रा सेक्स मेथेड को अपनाने के बाद भी फ्लूइड ट्रांसफर नहीं होता है, लेकिन ये एक असुरक्षित सेक्स ही माना जाएगा।

 
फ्लूइड बॉन्डिंग कितनी सुरक्षित है?

सभी सेक्शुअल एक्टिविटीज जोखिम भरी होती है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि रिलेशनशिप में बैरियर का इस्तेमाल करने से बर्थ कंट्रोल होता है। अगर आप एक ही पार्टनर के साथ इस तरह की बॉन्डिंग का फैसला करते हैं, तो कुछ ऐसी चीजें हैं जो आपके रिस्क को कम कर सकती हैं :


अपने साथी के लिए ईमानदार बनें

अपने पार्टनर के लिए ईमानदार बनें। इसके लिए आपको "पहले और वर्तमान" में किसी और के साथ रिलेशनशिप में नहीं रहना चाहिए। ये विश्वास आपके और आपके रिश्ते के लिए अच्छा होता है।
 
अपनी जांच कराएं

क्या आपको कोई सेक्सुअल डिजीज है? अगर नहीं पता है तो जरूर अपनी जांच कराएं। बेसिक स्क्रीनिंग कराने से सभी तरह की सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन का पता नहीं चलता है। इसलिए अपनी सेक्शुअल हिस्ट्री के बारे में डॉक्टर से जरूर बात कर लें। क्योंकि अगर आप ओरल सेक्स करते हैं तो आपको मुंह की भी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में आपको अपने मुंह से लेकर गले तक की जांच करानी पड़ सकती है।


कुछ बैरियर का इस्तेमाल जरूर करें

सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन आसानी से ना फैलें इसलिए आपको थोड़े बैरियर इस्तेमाल करने की जरूरत है। जैसे- एचआईवी किस करने से नहीं फैलता है, लेकिन ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) और हर्पीस किस करने से भी फैल सकता है।

फ्लूइड बॉन्ड में सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन के रिस्क को कैसे कम करें?

फ्लूइड बॉन्डिंग के लिए सबसे बड़ा नियम है विश्वास रखना। किसी एक ही व्यक्ति के साथ हमेशा कमिटेड रहना। ऐसे में अगर आपको फ्लूइड ट्रांसफर करते हुए अपनी सेक्स लाइफ को बिना किसी रिस्क के एंजॉय करना है तो आपको सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन की जांच समय-समय पर करानी होगी। सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन की जांच ना सिर्फ आपके लिए जरूरी है, बल्कि आपके पार्टनर के लिए भी जरूरी है।
यूं तो आपको हर महीने पर सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन का टेस्ट जरूर कराना चाहिए, लेकिन अगर संभव ना हो तो एक साल में जरूर टेस्ट कराएं। 

कुछ सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन के टेस्ट आपको जल्दी-जल्दी कराने की जरूरत है :

· एचआईवी की जांच फ्लूइड ट्रांसफर के तीन हफ्ते बाद कराएं।

· गोनोरिया का टेस्ट फ्लूइड ट्रांसफर के दो हफ्ते बाद कराएं।

· क्लैमाइडिया की जांच फ्लूइड ट्रांसफर के दो हफ्ते बाद कराएं।

· सिफिलिस की जांच फ्लूइड ट्रांसफर के छह हफ्ते, तीन महीने और छह महीने बाद कराएं।

· जेनाइटल हर्पीस का टेस्ट फ्लूइड ट्रांसफर के तीन हफ्ते बाद कराएं।

· जेनाइटल वार्ट की जांच लक्षणों के प्रदर्शित होने पर कराएं।

नोट :-
अगर आपका टेस्ट पॉजिटिव आता है तो अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें और साथ ही अपने पार्टनर के साथ भी इस बात को शेयर करें। अगर जरूरत न हो तो फ्लूइड ट्रांसफर न करें।  अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।










बुधवार, 11 अक्टूबर 2023

बेहतरीन सेक्स लाइफ के लिए उपयोगी सेक्शुअल वेलनेस प्रोडक्टस

                 


बेहतरीन सेक्स लाइफ के लिए उपयोगी सेक्शुअल वेलनेस प्रोडक्टस


सेक्शुअल वेलनेस प्रोडक्ट्स क्या होते है?

एक बेहतरीन और स्वस्थ सेक्स जीवन के लिए सेक्शुअल वेलनेस प्रोडक्ट्स बनाए जाते हैं। ये एलोपैथ और आर्युवेद दोनों ही प्रकार के मिलते हैं। जिनका उपयोग करने से आपको सेक्स करने से पहले या दौरान होने वाली दिक्कत से निजात मिल सकती है। जैसे :

· गुप्तांगों में खिंचाव न आना

· गुप्तांग में दर्द

· लिंग का न खुलना

· योनि में सूखापन

· लिंग से बदबू आना

इस तरह की तमाम परेशानियां सेक्स लाइफ को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। इस वजह से कई बार सेक्स का मूड बीच में ही गड़बड़ हो जाता है। खासकर, महिलाओं की यौन इच्छा मर जाती है। इसलिए सेक्शुअल वेलनेस प्रोडक्ट का उपयोग करने की सलाह डॉक्टर देते हैं।


सेक्शुअल वेलनेस प्रोडक्ट्स के फायदे (Benefits Of Sexual Wellness Products)

आपकी सेक्स लाइफ में अगर उपरोक्त किसी भी प्रकार की समस्या है। जिसकी वजह से आप सेक्स एंजॉय नहीं कर पा रहे हैं तो इन चीजों का प्रयोग करें। इससे आपको एक नहीं कई फायदे मिलेंगे।

1. कंडोम और कॉन्डम

सेक्शुअल वेलनेस प्रोडक्ट्स की लिस्ट से कंडोम को कोई भी नंबर 1 पोजिशन से नहीं हटा सकता। यह कई फायदे देता है और सबसे सस्ता भी मिलता है। मगर, उपयोग के आधार पर कंडोम कई प्रकार के होते हैं। इसलिए यहां पर कंडोम से जुड़ी खास जानकारी जान लें।

2. लुब्रिकेंट जेल (Lubricant Gel)

कई बार सेक्स के दौरान योनि सूखी रहती है। इसके बाद भी अगर सेक्स किया गया तो योनि और पुरुष का लिंग छिलने का डर रहता है। यह काफी दर्दभरा होता है। इसलिए चिकनाहट की जरूरत होती है।

ऐसी परिस्थिति के लिए लुब्रिकेंट जेल का उपयोग सुरक्षित माना जाता है। कई लोग लार या थूक का इस्तेमाल करते हैं जो कि सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

3. मालिश करने का तेल (Herbals Stress Relief Massage Oil)

तनाव के कारण सेक्स का आनंद नहीं ले पाते हैं तो उसको दूर करने के लिए कुछ इस तरह के ऑयल का प्रयोग सही माना जाता है। सामान्य तेल की जगह इस तरह के खास ऑयल से पार्टनर की मालिश करें।

4. शिलाजीत गोल्ड कैप्सूल (Shilajit Gold Capsules)

शिलाजीत, क्रांच पाक, अश्वगंधा जैसी चीजों को घर पर रखें। इनका सेवन आप नियमित रूप से या सेक्स करने के कुछ घंटे पहले भी कर सकते हैं। इससे आपको नेचुरल एनर्जी मिल सकती है। जिससे कि आप पहले की तुलना में ज्यादा देर तक सेक्स कर सकते हैं।







शादी से पहले यौन शिक्षा का महत्व | एक स्वस्थ, सफल और खुशहाल वैवाहिक जीवन की पहली सीढ़ी

              शादी से पहले यौन शिक्षा का महत्व |  एक स्वस्थ , सफल और खुशहाल वैवाहिक जीवन की पहली सीढ़ी परिचय भारतीय समाज में आज भी यौन श...