शनिवार, 3 अगस्त 2019

यौन संचारित रोग (STD) (Sexually transmitted disease )






यौन संचारित रोग (STD) (Sexually transmitted disease )

असुरक्षित यौन संबंध स्थापित करने से फैलने वाले यौन संचारित रोग कई प्रकार के होते हैं। जिनमें जान जाने तक का खतरा होता है। असुरक्षित यौन संपर्क के माध्यम से 20 से ज्यादा अलग-अलग इंफेक्शन होते हैं। यौन संचारित रोगों से महिलाओं में बांझपन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। एचआईवी के अलावा भी कई यौन संचारित रोग होते हैं जिनसे जान को खतरा रहता है।
एसटीडी या सेक्‍सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज Sexually transmitted disease (यौन सं‍चारित संक्रमण/रोग) वे संक्रमण/रोग हैं जो, यौन संपर्क द्वारा एक व्‍यक्ति से दूसरे में सं‍चारित हो सकते हैं। एसटीडी सेक्स संबंधी रोग है जिसके कई सारे कारण हो सकते हैं जो महिला और पुरुष दोनों के शरीर को नुकसान पहुंचाने में कोई भी कसर नहीं छोड़ते हैं। एसटीडी पुरुष और महिला दोनों में हो सकता है कुछ यौन संचारित संक्रमण जन्‍म से, अंत: शिरा सुइयों अथवा स्‍तनपान के द्वारा भी संचारित होते हैं। इसके अलावा सेक्स से जुड़े ऐसे कई पहलू हैं जिनकी जानकारी का अभाव यौन संचारित रोग व संक्रमण (एसटीडी या एसटीआई) की वजह बन सकता है। जिसके अलग-अलग लक्षण होते है और उन लक्षणों को जानना सभी को जरूरी है ताकि एसटीडी से पीड़ित लोग इसका अच्छी तरह से इलाज करा सके।
योन संबंधो द्वारा संचारित रोग कैसे फैलते है?
योनी संभोग, मौखिक सम्भोग और गुदापरक सम्भोग जैसे अन्तरंग संबंध और योन संपर्क से एसटीडी एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति तक संचारित होते है। 
एसटीडी के लक्षण क्या होते है?
सेक्‍सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज के लक्षणों में निम्नलिखित कारक शामिल है
·         औरतो में योनि के आसपास खुजली यो योनि से स्त्राव। 
·         पुरषों में लिंग से स्त्राव। 
·         सम्भोग या मूत्र त्याग करते समय पीड़ा। 
·         जननेंद्रिय के आसपास पीढ़ाविहीन लाल जख्म। 
·         मुलायम त्वचा बाले लाल रंग के मस्से जननेन्द्रियो के आसपास हो जाते है। 
·         गुदा परक सम्भोग वालो  को गुदा के अन्दर और आसपास पीड़ा का होना। 
·         असामान्य छूत के रोग , न समझ आने वाली थकावट और रात  को पसीना आना , वजन घटना आदि। 
क्या यह संभव है की किसी व्यक्ति को एसटीडी हो और उसे पता भी ना हो ?
पुरषों में तो एसटीडी के लक्षण सामान्यतः दिख जाते है जिससे वो जागरूक हो जाते है की उनको योन से सम्बंधित रोग हुआ है, जबकि औरतो के संक्रमण के लक्षण दिखाई नहीं देते जबकि उन्हें यह रोग लग चुका होता है। 
 पुरुषों में पाएं जाने वाले एसटीडी सेक्‍सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज (STD) जिसके बारे में हर पुरुष को मालूम होना जरुरी है।
1- क्लैमाइडिया:
      क्लैमाइडिया एक आम यौन संचारित रोग है जो बैक्टीरियम क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस के कारण होता है। क्लैमाइडिया ग्रसित साथी के साथ वजाइनल और ओरल संपर्क से क्लैमाइडिया होता है। काफी लोगों को इसके लक्षणो का अनुभव नहीं होता है। क्लैमाइडिया बुखार, पेट में दर्द और वेजाइना से असामान्य डिसचार्ज के कारण भी होता है। महिलाओं में क्लैमाइडिया से पेलविक इन्फ्लैमटॉरी डिसीज हो जाता है। अगर महिलाएं यौन संचारित रोगों का उपचार ना करें, तो यह उनके शरीर के दूसरे भागों यूट्रस, फैलोपिएन ट्यूब में भी फैलने लगता है। इससे महिलाओं में प्रजनन अंग को नुकसान पहुंचता है, जिससे महिलाओं में बांझपन होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर महिला प्रेग्नेंट है तो उससे बच्चे के विकास पर खतरा होता है, क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान क्लैमाइडिया से बच्चे की आंखों में खराबी होने का डर लगता है। अगर क्लैमाइडिया का पता शुरुआत में ही पता चल जाए तो एंटीबायोटिक के जरिए उसे ठीक किया जा सकता है। 
2- गोनोरिया:
नेइसेरिया गोनोरिया बैक्टीरिया के कारण यह रोग होता है। यह बहुत ही तेजी के साथ बढ़ता है। इसका सबसे आम लक्षण यूरिनेशन में परेशानी और वेजाइन से डिसचार्ज होता है। क्लैमाइडिया की तरह गोनोरिया में भी सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती है। प्रेग्नेंसी के दौरान परेशानी और बांझपन जैसी गंभीर समस्या होती है। गोनोरिया से मुंह, गले ,आंख में इंफेक्शन हो जाता है। जो एक जानलेवा बीमारी बन सकती हैं। साथ ही गोनोरिया से ग्रसित व्यक्ति को एचआईवी की संभावना ज्यादा होती हैं।
3- जेनिटल हर्पीज़:
जेनिटल हर्पीज एक संक्रामक इंफेक्शन है जो हर्पीज सिंपलेक्स वाइरस के कारण होता है। हर्पीज सिंपलेक्स वाइरस दो तरह के होते हैं। हर्पीज सिंपलेक्स वाइरस-1 और हर्पीज सिंपलेक्स वाइरस-2। दोनों से गुप्तांग में दाद हो सकती है। एचएसवी-1 में गुप्तांग के आस-पास घाव हो जाते है और एचएसवी-2 में गुप्तांग के आस-पास पानी वाले फफोले हो जाते हैं, जिनसे व्यक्ति को बहुत दर्द होता है। इस तरह के वायरस के लक्षण बहुत कम होते है। साथ ही इन्हें ठीक नहीं किया जा सकता है और अगर इस समय में लक्षण ना पता चले तो यह वायरस शरीर के तंत्रिका कोशिकाओं को तक प्रभावित करते हैं। प्रेग्नेंट महिलाएं जिन्हें जेनिटल हर्पीज की परेशानी होती है। यह इंफेक्शन उनके बच्चे को भी होने का डर रहता है। साथ ही बच्चे के दिमाग, त्वचा और बाकि अंगो पर भी इसका प्रभाव होने का डर रहता है।
4- एचआईवी/एड्स:
एचआईवी एक ऐसा वायरस है जिससे एड्स होता है। एचआईवी आपके शरीर के इंफेक्शन से लड़ने वाले रक्त कोशिकाओं को खत्म कर देता है। एक बार एचआईवी आपके शरीर के रक्त कोशिकाओं को खत्म कर देता हो तो शरीर के इंफेक्शन से लड़ने की क्षमता खत्म हो जाती है। एचआईवी इंफेक्शन की इस अवस्था को एड्स कहते हैं। एड्स एक बहुत ही संवेदनशील बीमारी है। जिसके बारे में अगर शुरुआत में पता चल जाए तो थैरेपी करके रोका जा सकता है।
5- ह्यूमन पॅपिलोमावाइरस:
ह्यूमन पॅपिलोमावाइरस एक आम यौन संचारित रोग है। ह्यूमन पॅपिलोमावाइरस के 40 से ज्यादा प्रकार होते हैं जो पुरुषों और महिलाओं दोनो को प्रभावित करते हैं। इससे जाननांगो के साथ शरीर के बाकि भागों जैसे मुंह, गले, गर्भाशय ग्रीवा और लिंग में कैंसर होने का खतरा भी रहता है। इसका कोई उपचार नहीं है। रोज पैप स्मीयर टेस्ट से इसे रोका जा सकता है। ह्यूमन पॅपिलोमावाइरस से कई लोगों को सर्विकल कैंसर भी हो जाता है।
6- सिफलिस:
सिफलिस इंफेक्शन ट्रीपोनिमा पैनीडम बैक्टीरिया के कारण होता है। यह ओरल सेक्स के दौरान एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में होता है। सेंट्रल फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक 2001-2009 के डाटा में सिफलिस से ग्रसित लोगों की दर लगातार बढ़ी है, जो हर साल बढ़ती जा रही है। यह परेशानी उन पुरुषों के साथ ज्यादा होती है जो महिलाओं और पुरुषों दोनो के साथ सेक्स करते हैं। इसका पहला लक्षण गुप्तांग के पास बिना दर्द वाले घाव हो जाते हैं। यह घाव बिना किसी इलाज के ठीक हो जाते हैं। मगर यह इंफेक्शन शरीर से बाहर नहीं निकलता है और कुछ समय बाद सिफरिल शरीर के बाकि भागों लीवर, हड्डियों, त्वचा और दिल में फैलने लगता है। अगर अब भी इसका इलाज ना किया जाएगा एक साल बाद यह आंखों दिमाग पर इसका असर होने लगता है। जिससे मौत का खतरा बढ़ जाता है।
7- बैक्टीरियल वेजिनोसिस:
बैक्टीरियल वेजिनोसिस एक आम यौन संचारित रोग है। वैसे वेजाइना में बैक्टीरिया का होना आम बात है मगर कुछ अलग तरह के बैक्टीरिया से परेशानी हो सकती है। बैक्टीरियल वेजिनोसिस तब होता है जब प्रोब्लिमैटिक बैक्टीरिया जिनका शरीर में होना सामान्य होता है कि मात्रा बढ़ जाती है। जो सामान्य वेजाइनल लैक्टोबेसिली को बदल देते हैं और संतुलन बिगड़ जाता है। बैक्टीरियल वेजिनोसिस इंफेक्शन का सबसे आम लक्षण सफेद पानी का डिसचार्ज होना होता है। बैक्टीरियल वेजिनोसिस से यौन संचारित रोग का खतरा दूसरे व्यक्ति को भी बढ़ जाता है।
8- ट्रिकोमोनालिसिस:
ट्रिकोमोनालिसिस12 इंफेक्शन एक कोशिकीय प्रोटोजोआ पैरासाइट ट्रिकोमोनास वेजाइनली के कारण होता है। यह युवाओं में सबसे ज्यादा होता है। खासकर यौन सक्रिय महिलाओं में। यह पैरासाइट महिलाओं की तुलना में पुरुषों को कम प्रभावित करते हैं। शारीरिक संबंधों से यह एक से दूसरे इंसान में संचारित होते हैं। ट्रिकोमोनालिसिस के लक्षण लगातार यूरिनेशन में जलन और दर्द, गुप्तांगों में घाव खुजली और निशान आदि हो सकते हैं। एनआईसीएचजी की रिसर्च के मुताबिक प्रेग्नेंसी के दौरान यह इंफेक्शन होने से बच्चे को भी यह इंफेक्शन हो जाता है साथ ही बच्चे के वजन में कमी का भी डर रहता है।
9- वायरल हेपेटाइटिस:
यह लीवर की एक गंभीर बीमारी है। जो शरीर में बहुत सारे वायरस के कारण होती है। यह तीन तरह के होते हैं।
1.      हेपेटाइटिस ए वायरस में थोड़े समय के लिए लीवर में इंफेक्शन होता है जो काफी गंभीर होता है। हालांकि यह पुराने इंफेक्शन के कारण नहीं होता है। यौन गतिविधि के दौरान यह एक से दूसरे इंसान में जाते हैं। जिसे वैक्सीनेशन से रोका जा सकता है।
2.      हेपेटाइटस बी से लीवर की गंभीर बीमारी होती है जिसका परिणाम लंबे समय तक परेशानी हो सकती है। इससे लीवर कैंसर, लीवर फेल और मौत हो सकती है। यह ड्रग्स, टैटू और पियरसिंग के द्वारा भी हो सकता है।
3.      हेपेटाइटस सी से बहुत जल्द ही लीवर पर असर पड़ता है। कुछ समय बाद यह लीवर कैंसर का रूप ले लेता है। हेपेटाइटस सी का कोई भी उपचार नहीं है।

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शनिवार, 27 जुलाई 2019

पुरुषो की जटिल सेक्स समस्या फाइमोसिस (phimosis)


फाइमोसिस क्या है

फाइमोसिस से तात्पर्य पुरुषों से जुड़ी एक ऐसी समस्या है जिसमें लिंग के ऊपर की चमड़ी लिंग के शीर्ष या ग्लांस से पीछे नहीं हट पाती है। हर पुरुष में लिंग के ऊपर की चमड़ी को पीछे खिंचने की सीमा अलग अलग होती है। कुछ पुरुषों में यह पूरी तरह आसानी से पीछे खिंच जाती है जिसके कारण लिंग का गुलाबी रंग का शीर्ष स्पष्ट दिखायी देने लगता है। जबकि कुछ पुरुषों की फोरस्किन बहुत टाइट होती है और ग्लांस के चारों ओर इस तरह जकड़ी होती है कि उनके लिंग का सिर्फ मूत्र छिद्र ही दिखायी देता है।
 यह समस्या ज्यादातर छोटे बच्चों में होती है क्योंकि शुरूआत के कुछ वर्षों तक उनके लिंग की फोरस्किन ग्लांस से जुड़ी होती है, लेकिन बड़े होने के बाद भी यदि यह ऐसे ही बनी रहे तो पुरुषों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में तुंरत इलाज कराना ही बेहतर विकल्प होता है क्योंकि थोड़ी भी देरी करना किसी भी पुरूष को मुसीबत में डाल सकता है। चूंकि कुछ धर्म में खतना की प्रथा है इसलिए उस धर्म के बच्चों में फाइमोसिस कभी नहीं होती है क्योंकि एक बार खतना हो जाने के बाद फोर स्किन आसानी से आगे पीछे खिसकने लगती है।

फाइमोसिस होने के कारण  


बार-बार मूत्र मार्ग संक्रमण का होना 
फाइमोसिस की बीमारी उस पुरूष को होने की संभावना अधिक रहती है, जिसे बार-बार मूत्र मार्ग संक्रमण होता है।

त्वचा संक्रमण होना 
फिमोसिस की बीमारी उस स्थिति में हो सकती है, जब किसी पुरूष को त्वचा संक्रमण की समस्या होती है।हालांकि, इसका इलाज त्वचा संबंधी उपचार के माध्यम से किया जा सकता है।
 
एक्जिमा का होना
 यदि कोई पुरूष एक्जिमा से पीड़ित है, तो उसे फाइमोसिस होने की संभावना अधिक होती है। इसी कारण एक्जिमा से पीड़ित पुरूष को अपना इलाज सही से कराना चाहिए।

यौनिक संक्रमण का होना
यदि यौनिक गतिविधियों को बिना प्रोटेक्शन से किया जाए, तो इससे कई सारे संक्रमण हो सकते हैं। लिंग को बार-बार खींचने और हाथों से पकड़कर सीधा करने की कोशिश के कारण लिंग सूज जाता है जिसके कारण फाइमोसिस हो जाता है। यदि आपको बहुत कम उत्तेजना होती है तो इस कारण आपको फाइमोसिस हो सकता है। 
यदि आप मधुमेह रोगी हैं तो आपके लिंग के द्वार (tip) पर संक्रमण हो सकता है जिसके कारण फाइमोसिस होने की संभावना बढ़ सकती है।

 

फाइमोसिस के लक्षण क्या हैं?


किसी भी अन्य बीमारी की तरह फाइमोसिस के भी कुछ लक्षण होते हैं -
1-  रोग का सबसे महत्वपूर्ण लक्षण लिंग के सिर को खोलने में असमर्थता या ऐसा करने की कोशिश करते समय उत्पन्न होने वाली कठिनाइयां हैं।
2-  पेशाब करते समय दर्द होना, आमतौर पर इसे यूरिन इंफेक्शन का कारण समझता जाता है, लेकिन हर बार ऐसा सोचना गलत है क्योंकि कई बार यह फिमोसिस का लक्षण भी हो सकता है।
3-  पेशाब करते समय फोरस्किन गुब्बारे की तरह फैल जाती है जिसके कारण दर्द का अनुभव होता है।
4-  सेक्स करते समय उत्तेजना के बाद भी लिंग में दर्द होना।
5-  यदि किसी पुरूष के लिंग पर सूजन हो जाती है, तो उसे इसे नज़रअदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि यह फाइमोसिस का लक्षण हो सकता है।
6-  कई बार फाइमोसिस होने पर लिंग पर लाल दब्बे भी हो जाती है। 

यदि किसी पुरूष को लिंग में दर्द होता है और इसके साथ में पेशाब करते समय जलन भी होती है, तो उसे डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।

 

फाइमोसिस से बचाओ एवं उपचार कैसे करें?


हालांकि, फाइमोसिस के मरीजों की तादात दिन-प्रति-दिन बढ़ती जा रही है, किसी भी अन्य बीमारी की तरह फिमोसिस से बचाओ संभव है।


1. लिंग की सफाई करना-  फाइमोसिस की बीमारी शरीर की सफाई न करने की वजह से भी हो सकती है। इसी कारण सभी पुरूषों को यह कोशिश करनी चाहिए कि वे अपने शरीर (विशेषकर लिंग) की सफाई प्रतिदिन करें ताकि उसे कोई बीमारी न हो।
 
2.  पौष्टिक भोजन करना-  हमारे खान-पान का शरीर पर सीधा असर पड़ता है। यह बात फाइमोसिस के संदंर्भ में सटीक बैठती है, इसी कारण सभी पुरूषों को अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए और केवल पौष्टिक भोजन ही करना चाहिए।
 
3.  व्यायाम करना- सभी लोगों के लिए व्यायाम करना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि व्यायाम केवल उनकी मांसपेशियों को ही मजबूत नहीं बनाता है बल्कि उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Immunity System) को भी बेहतर बनाता है।
 
4.  वायरस या बैक्टीरिया से बचाव करना-  फाइमोसिस की बीमारी वायरस या बैक्टीरिया के संक्रमण की वजह से भी हो सकती है। सभी लोगों को यह कोशिश करनी चाहिए कि वे किसी वायरस या बैक्टीरिया के संपर्क में न आएं, हालांकि वे इसके लिए एंटीबायोटिक दवाईयों का सेवन कर सकते हैं।
 
5.  मलहम लगाना-  फाइमोसिस की बीमारी में पुरूष के लिंग में खुजली होती है।
अत: इसका इलाज मलहम का इस्तेमाल करके भी किया जा सकता है।
 
6.  यूरिन टेस्ट कराना- कई बार, डॉक्टर फाइमोसिस का इलाज करने के लिए पुरूष का यूरिन टेस्ट भी कराते हैं।इस टेस्ट के माध्यम से इस बात की पुष्टि की जा सकती है कि यह बीमारी यूरिन में किस हद तक बढ़ चुकी है।
 
7.  खतना कराना- अक्सर, डॉक्टर पुरूष को खतना कराने की भी सलाह देते हैं।
हालांकि, ऐसा उसी मामले में किया जाता है, जब पुरूष को उपचार के किसी अन्य तरीके से आराम नहीं मिलता है।


 

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शुक्रवार, 19 जुलाई 2019

पेनिस को सेहतमंद रखने के जरूरी उपाय


पेनिस को सेहतमंद रखने के जरूरी उपाय


सेहतमंद रहने के लिए आपको जितना अपने बॉडी के दूसरे पार्ट्स का ध्यान रखना चाहिए उतना ही ख्याल पेनिस का भी रखना चाहिए।, पेनिस के साथ-साथ टेस्‍टीकल्‍स यानि अंडकोष भी होते हैं उन्‍हें भी देखरेख की आवश्‍यकता होती है, इन्‍हें भी साफ रखना जरूरी होता है। शरीर के इन हिस्‍सों में गंदगी होती है और साफ न करने पर संक्रमण हो जाता है। यानि अपने प्राइवेट पार्ट्स को साफ रखना बहुत ज़रूरी होता है विशेषकर सेक्स करने के बाद नहीं तो इंफेक्शन होने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। शरीर के संवेदनशील हिस्‍सों को साफ और सूखा रखना चाहिए, ताकि आपको किसी भी प्रकार का संक्रमण न होने पाएं।
कुछ पुरूष सोचते हैं कि जननांग को पानी और साबुन से धो लेना ही पर्याप्‍त होता है, लेकिन ऐसा बिल्‍कुल नहीं है। एक्‍सपर्ट मानते हैं कि सिर्फ साबुन और पानी से ही नहीं बल्कि जननांग को साफ और बालरहित रखना भी आवश्‍यक होता है।

हर पुरूष को पेनिस साफ करते समय निम्‍न बातों को ध्‍यान में रखना चाहिए

नहाने के समय पेनिस को साफ करना न भूलें। अगर पेनिस का खतना (circumcised) नहीं हुआ है तो फोरस्किन को हटाकर साफ करने की ज़रूरत होती है। सफेद रंग का लिक्विड जो फोरस्किन के नीचे जम जाता है जिसको स्मेग्मा कहते हैं उसको साफ करना चाहिए नहीं तो हार्बर बैक्टिरीया हो सकता है। यहां तक कि इस बैक्टिरीया का इंफेक्शन आपके पार्टनर को भी हो सकता है। इसलिए नहाते समय पेनिस के स्किन के नीचे भी साफ करें ।
अगर आपको पेनिस के आस-पास के एरिया या प्यूबिक हेयर को शेव करना अच्छा नहीं लगता तो ट्रिम कर लें। क्योंकि कुछ लोग शेव करते समय उस एरिया को चोट पहुँचा देते हैं। इसलिए इस प्रॉबल्म से बचने के लिए 
प्यूबिक हेयर को ट्रिम करना ही सेफ होता है। इसके अलावा इस एरिया को साबुन और पानी से रोज साफ करें नहीं तो फंगल इंफेक्शन होने की बहुत ज्यादा संभावना रहती है।
अक्सर पुरूष एक आम गलती करते हैं वह ये है कि हमेशा टाइट अंडरवियर पहनते हैं। जब आप टाइट अंडरवियर पहनते हैं तब ये ऑर्गन सही तरह से सांस नहीं ले पाते हैं साथ ही टेस्टिकल में दबाव पड़ता है। रिसर्च के अनुसार टाइट अंडरवियर पहनने से स्पर्म काउन्ट लो होता है साथ ही टेस्टास्टरोन का लेवल कम होने के कारण इंफर्टिलिटी की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए रात को अंडरवियर पहन कर न सोयें और पेनिस को अच्छी तरह से सांस लेने दें।
सबसे ज़रूरी और महत्वपूर्ण बात याद रखने की ये है कि कभी भी ज्यादा गर्म पानी से न ही नहायें और न ही स्टीम बाथ लें ।  टेस्टिकल्स का टेम्परेचर बॉडी के नॉर्मल टेम्परेचर से दो डिग्री कम ही होता है इसलिए गर्म पानी में बैठने पर इसके फंक्शन में प्रॉबल्म होता है। इसलिए हमेशा अपने प्राइवेट पार्ट्स को ठंडे पानी से धोयें । स्पर्म काउन्ट को बढ़ाने के लिए और गर्म पानी के साइड इफेक्ट को कम करने के लिए ठंडे पानी में 15 मिनट तक बैठने की सलाह दी जाती है जिससे कि प्राइवेट पार्ट्स ठंडे पानी में डुबे रहें।

पेनिस को साफ करने के लिए कुछ बातों को अवश्‍य ध्‍यान में रखना चाहिए

Ø किस प्रकार करे सफाई और धुलाई

पेनिस के आस पास का स्‍थान बहुत संवेदनशील होता है जिसे काफी केयर की आवश्‍यकता होती है। पेनिस के आसपास सफाई रखने के लिए साबुन या वी-वॉश का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
 संक्रमण न हों, इसके लिए पेनिस और आसपास के हिस्‍से को गुनगुने पानी से धो लें। साबुन को हाथों में अच्‍छे से मलें और उसे पेनिस पर लगाकर अच्‍छे से धो लें। धोने के बाद तौलिए से पोंछ लें।

Ø बालो को ट्रिम करें

पेनिस के आसपास के बालों को हटाने के लिए उन्‍हें छोटी कैंची से ट्रिम कर लें। इससे उनमें पसीना नहीं भरेगा और न ही संक्रमण होगा। कई बार बड़े हुए बालों की वजह से गंदगी हो जाती है और बैक्‍टीरिया पनपते हैं।

Ø सेक्‍स करने से पहले और बाद में धुलाई करें

सेक्‍स करने से पहले और बाद में पेनिस को धुलना कतई न भूलें। दोनों ही पार्टनरों को सेक्‍स से पहले और बाद में योनि को अवश्‍य धुलना चाहिए। वरना, स्‍पर्म के फैलने से वहां ड्राईनेस हो जाती है और संक्रमण भी हो जाता है। जहां भी स्‍पर्म गिरा हो, वहां भी साबुन से धुल लेना चाहिए।

Ø हस्‍तमैथुन के बाद धुलाई करें

हस्‍तमैथुन करने के बाद भी पेनिस को अच्‍छी तरह धुल लेना चाहिए। इससे संक्रमण होने का खतरा नहीं रहता है।

Ø खतना पुरूषों को रखनी चाहिए विशेष देखभाल

अगर आपका खतना हुआ हो, तो आपको पेनिस की विशेष देखभाल करनी चाहिए। आपको पेनिस की स्किन को अच्‍छे से साफ करना चाहिए और तौलिए से पोंछ भी लेना चाहिए। वरना खतने के कारण त्‍वचा अधिक संक्रमण की चपेट में आ सकती है।

Ø रात में अंडरवियर न पहनें

सारा दिन पेनिस कपड़े में रहता है, ऐसे में आप रात्रि को उसे खुला भी छोड़ सकते हैं यानि रात को अंदर के वस्‍त्र न पहनें या अंडरवियर आदि को उतार दें। इससे वहां पसीना नहीं होगा। दिन में कॉटन अंडरवियर पहनें, साटन या अन्‍य प्रकार के फैब्रिक के अंडरवियर न पहनें।

Ø जांच करते रहना भी जरूरी है

अपने जननांग और अंडकोष की जांच करते रहें, अगर किसी प्रकार का कोई परिवर्तन या  अवांछित ग्रोथ नजर आती है तो तुरंन्त डॉक्‍टर से सम्‍पर्क करें।



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शादी से पहले यौन शिक्षा का महत्व | एक स्वस्थ, सफल और खुशहाल वैवाहिक जीवन की पहली सीढ़ी

              शादी से पहले यौन शिक्षा का महत्व |  एक स्वस्थ , सफल और खुशहाल वैवाहिक जीवन की पहली सीढ़ी परिचय भारतीय समाज में आज भी यौन श...