रविवार, 16 अक्टूबर 2016


Sexual potency fitness checkup before or after marriage is also provided at our centre by detailed history, examination for male sex hormones, penile blood supply tests, nerves of penis so that they can go for marriage with confidence. They are explained in detail every aspect of sexuality. We provide detail sex education, sex counseling, & sex therapy so that they don't fail & perform coitus with confidence. We tell the patient about female sexual organ as vulva, clitoris, vaginal opening. Then we also teach the correct technique of penile insertion for the first time with a virgin wife. We also tell the G spot in the vagina. This is an approximately one-centimeter size spot on front wall of vagina. This is a very sensitive part of female body. When this part of female body is stimulated, then women get highly aroused & get multiple orgasms. Thus all the men must know these highly erogenous areas of female. After learning these techniques you'll become an expert lover & your partner will always crave for your company. INVESTIGATIONS i.e. DIAGNOSTIC TESTS: At our centre we have all the facility for complete investigation of various causes of Erection difficulties & other sex problems. So we perform following tests, step by step depending on their need based on history & examination. The various diagnostic tests needed/performed are as follows: - Step- I: Hormone Testing: There are two types of hormones in body some stimulates penile hardness whereas there are other hormones which inhibit penile stiffness. Male & Female sex hormones & other associated Hormones are tested by latest-immunoassay techniques. These hormones includes total Testosterones, free testosterones, Prolactins, LH, FSH, T3, T4, TSH others as Cortical, E2, Free testosterones SHBG etc.. Among above tests relevant hormones are tested in that particular patient. Results are available in 36 hours. In the hormone testing either stimulatory sex hormones may be low leading to less erection or those hormones which are inhibitory may be high leading to inhibition of penile erection. These hormones are tested by taking blood sample from forearm. When we find out any of above hormone disorder simply correction of these hormone disorders corrects the erectile dysfunctions in two months time. Blood glucose & other systemic test may be required depending on the need.

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शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016

सेक्स संबन्धी समस्याओं में सर्वश्रेष्ठ है अलसी

सेक्स संबन्धी समस्याओं में सर्वश्रेष्ठ है अलसी



आपकी सारी सेक्स सम्बंधी समस्याएं अलसी खा कर ही सही हो जाएँगी क्योंकि अलसी आधुनिक युग में स्तंभनदोष के साथ साथ शीघ्रस्खलन, दुर्बल कामेच्छा, बांझपन, गर्भपात, दुग्धअल्पता की भी महान औषधि है। आइये जाने पुरुष रोगो में अलसी कैसे काम करती हैं और इसके सेवन की विधि।

कैसे करती हैं अलसी काम।

सबसे पहले तो अलसी आप और आपके जीवनसाथी की त्वचा को आकर्षक, कोमल, नम, बेदाग व गोरा बनायेगी। आपके केश काले, घने, मजबूत, चमकदार और रेशमी हो जायेंगे।

अलसी आपकी देह को ऊर्जावान, बलवान और मांसल बना देगी। शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी गहेगी, न क्रोध आयेगा और न कभी थकावट होगी। मन शांत, सकारात्मक और दिव्य हो जायेगा।

अलसी में विद्यमान ओमेगा-3 फैट, जिंक और मेगनीशियम आपके शरीर में पर्याप्त टेस्टोस्टिरोन हार्मोन और उत्कृष्ट श्रेणी के फेरोमोन ( आकर्षण के हार्मोन) स्रावित होंगे। टेस्टोस्टिरोन से आपकी कामेच्छा चरम स्तर पर होगी। आपके साथी से आपका प्रेम, अनुराग और परस्पर आकर्षण बढ़ेगा। आपका मनभावन व्यक्तित्व, मादक मुस्कान और षटबंध उदर देख कर आपके साथी की कामाग्नि भी भड़क उठेगी।

अलसी में विद्यमान ओमेगा-3 फैट, आर्जिनीन एवं लिगनेन जननेन्द्रियों में रक्त के प्रवाह को बढ़ाती हैं, जिससे शक्तिशाली स्तंभन तो होता ही है साथ ही उत्कृष्ट और गतिशील शुक्राणुओं का निर्माण होता है। इसके अलावा ये शिथिल पड़ी क्षतिग्रस्त नाड़ियों का कायाकल्प करते हैं जिससे सूचनाओं एवं संवेदनाओं का प्रवाह दुरुस्त हो जाता है।

नाड़ियों को स्वस्थ रखने में अलसी में विद्यमान लेसीथिन, विटामिन बी ग्रुप, बीटा केरोटीन, फोलेट, कॉपर आदि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ओमेगा-3 फैट के अलावा सेलेनियम और जिंक प्रोस्टेट के रखरखाव, स्खलन पर नियंत्रण, टेस्टोस्टिरोन और शुक्राणुओं के निर्माण के लिए बहुत आवश्यक हैं। कुछ वैज्ञानिकों के मतानुसार अलसी लिंग की लंबाई और मोटाई भी बढ़ाती है।

* आपने देखा कि अलसी के सेवन से कैसे प्रेम और यौवन की रासलीला सजती है, जबर्दस्त अश्वतुल्य स्तंभन होता है, जब तक मन न भरे सम्भोग का दौर चलता है, देह के सारे चक्र खुल जाते हैं, पूरे शरीर में दैविक ऊर्जा का प्रवाह होता है और सम्भोग एक यांत्रिक क्रीड़ा न रह कर एक आध्यात्मिक उत्सव बन जाता है, समाधि का रूप बन जाता है।

अलसी सेवन का तरीकाः-


  • * हमें प्रतिदिन 30 – 60 ग्राम अलसी का सेवन करना चाहिये। 30 ग्राम आदर्श मात्रा है। अलसी को रोज मिक्सी के ड्राई ग्राइंडर में पीसकर आटे में मिलाकर रोटी, पराँठा आदि बनाकर खाना चाहिये। डायबिटीज के रोगी सुबह शाम अलसी की रोटी खायें। कैंसर में बुडविग आहार-विहार की पालना पूरी श्रद्धा और पूर्णता से करना चाहिये। इससे ब्रेड, केक, कुकीज, आइसक्रीम, चटनियाँ, लड्डू आदि स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाये जाते हैं।
  • अगर इसको पीस कर रखे तो इसको सात दिन के अंदर सेवन कर ले अन्यथा इसके गुण खत्म हो जाते हैं। नहीं तो इसके बीजो को भून कर रखिये और कभी भी खाइये।
  • * अलसी को सूखी कढ़ाई में डालिये, रोस्ट कीजिये (अलसी रोस्ट करते समय चट चट की आवाज करती है) और मिक्सी से पीस लीजिये. इन्हें थोड़े दरदरे पीसिये, एकदम बारीक मत कीजिये. भोजन के बाद सौंफ की तरह इसे खाया जा सकता है .
  • * अलसी बांझपन, पुरूषहीनता, शीघ्रस्खलन व स्थम्भन दोष में बहुत लाभदायक है।
  • * लिगनेन वनस्पति जगत में पाये जाने वाला एक उभरता हुआ सात सितारा पोषक तत्व है जो स्त्री हार्मोन ईस्ट्रोजन का वानस्पतिक प्रतिरूप है और नारी जीवन की विभिन्न अवस्थाओं जैसे रजस्वला, गर्भावस्था, प्रसव, मातृत्व और रजोनिवृत्ति में विभिन्न हार्मोन्स् का समुचित संतुलन रखता है। लिगनेन मासिकधर्म को नियमित और संतुलित रखता है। लिगनेन रजोनिवृत्ति जनित-कष्ट और अभ्यस्त गर्भपात का प्राकृतिक उपचार है। लिगनेन दुग्धवर्धक है। लिगनेन स्तन, बच्चेदानी, आंत, प्रोस्टेट, त्वचा व अन्य सभी कैंसर, एड्स, स्वाइन फ्लू तथा एंलार्ज प्रोस्टेट आदि बीमारियों से बचाव व उपचार करता है।
  • * सेक्स संबन्धी समस्याओं के अन्य सभी उपचारों से सर्वश्रेष्ठ और सुरक्षित है अलसी। बस 30 ग्राम रोज लेनी है। गर्मियों में इसका सेवन थोड़ा कम करना चाहिए और पानी अधिक पीना चाहिए। नहीं तो गर्मी की वजह से घमोरियां वगैरह हो सकती हैं।

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बुधवार, 12 अक्टूबर 2016

शिलाजीत के फायदे

शिलाजीत के फायदे




शिलाजीत एक गुणकारी औषधी है, जो कई परेशानियों या बीमारियों में हमारे लिए फायदेमंद है. यह हिमालय की पहाड़ियों में पाया जाता है. यह चार प्रकार का होता है, और प्रत्येक के गुण और लाभ अलग-अलग होते हैं. शिलाजीत एक ऐसी औषधी है, जो स्वस्थ्य रहने में हमारी बहुत मदद करता है. शिलाजीत का स्वाद बहुत कड़वा और कसैला होता है. और यह बहुत काला होता है. शिलाजीत का सेवन फायदेमंद है, लेकिन साथ हीं कुछ सावधानियों का भी ध्यान रखना पड़ता है. और खानपान में भी कुछ चीजों के प्रति संयम बरतना पड़ता है. तो आइए जानते है कि शिलाजीत के क्या-क्या फायदे हैं और कैसे इसका उपयोग किया जा सकता है.

शिलाजीत के फायदे :

  • यह नपुंसकता खत्म करता है, और यह स्वप्न दोष को भी दूर करता है.
  • यह सेक्स पॉवर बढ़ाता है और यौन इच्छा में भी वृद्धि करता है.
  • इसका प्रयोग अत्यंत लाभकारी तो है, लेकिन किसी डॉक्टर की सलाह लिए बिना इसका प्रयोग करना आपको नुकसान पहुँचा सकता है.
  • आयु और पाचन क्षमता के अनुसार हीं आपको शिलाजीत का सेवन करना चाहिए.
  • दूध या मधु के साथ इसका सेवन सूरज उगने से पहले करना फायदेमंद रहता है. और इसे खाने के 3-4 घंटे बाद हीं कुछ और चीज खाना चाहिये.
  • मानसिक मजबूती पाने के लिए घी के साथ इसका सेवन करना चाहिए. यह आपको तनावमुक्त रखेगा.
  • जिन लोगों को शीघ्रपतन की समस्या का सामना करना पड़ता है, उन्हें इसका कुछ दिनों तक नियमित सेवन करना चाहिए. इससे शीघ्रपतन किस समस्या खत्म हो जाती है.
  • जब आप शिलाजीत का सेवन कर रहे हों, इस दौरान आपको मांसाहार, सिगरेट, शराब, मसालेदार या खटाई युक्त भोजन नहीं करना चाहिए. आपको रात में ज्यादा देर तक नहीं जगना चाहिए और दिन में नहीं सोना चाहिए.
  • शिलाजीत के उपयोग से शरीर की सूजन भी खत्म हो जाती है.
  • इसके सेवन से महिलाओं के पीरियड की अनियमितता खत्म हो जाती है.
  • यह सुगर रोगियों के सुगर लेवल को सही बनाए रखने में उनकी बहुत मदद करता है.
  • यह आपकी त्वचा को जवान रखने में भी आपकी मदद करता है.
  • ऐसा नहीं है कि इसका सेवन केवल कोई बीमार व्यक्ति हीं कर सकता है, इसका सेवन एक सामान्य स्वस्थ्य व्यक्ति भी कर सकता है. इससे उसका शरीर मजबूत होता है और तंदुरुस्ती बढ़ती है.
  • यह ब्लडप्रेशर में भी फायदा पहुंचाता है.
  • यह सिर दर्द खत्म करने में भी कारगर होता है.
  • शिलाजीत का उपयोग अवश्य करें, लेकिन डॉक्टर की सलाह लिए बिना इसका उपयोग आपके लिए नुकसान दायक हो सकता है. क्योंकि इसकी मात्रा आपकी आयु आपके रोग इत्यादि के आधार पर तय होती है.
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बुधवार, 5 अक्टूबर 2016

श्वेत प्रदर ( सफेद पानी ) का घरेलू इलाज

श्वेत प्रदर ( सफेद पानी ) का घरेलू इलाज 




स्त्रियों की योनी से सफेद पानी का बहना एक साधारण समस्या है. इसमें योनी से पानी जैसा स्त्राव होता है. य़ह खुद कोई रोग नहीं है. लेकिन यह स्त्रियों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन जाता है. इसके कारण चिड़चिड़ापन, पैर-हाथ में दर्द इत्यादि का सामना करना पड़ता है. तो आइए हम जानते हैं कि घरेलू उपायों द्वारा कैसे श्वेत प्रदर को खत्म किया जा सकता है. आपको क्या-क्या करना चाहिए और क्या-क्या नहीं.

श्वेत प्रदर ( सफेद पानी ) की समस्या खत्म करने के घरेलू उपाय :


  • हर दिन कच्चा टमाटर खाना शुरू करें.
  • सुबह-शाम 2 चम्मच प्याज का रस और उतनी हीं मात्रा में शहद मिलाकर पिएँ.
  • जीरा भूनकर चीनी के साथ खाने से फायदा होगा.

  • आंवले का रस और शहद लगातार 1 महीने तक सेवन करें. इससे श्वेत प्रदर ठीक हो जायेगा.
  • हर दिन केला खाएँ, इसके बाद दूध में शहद डालकर पिएँ. इसके आपकी सेहत भी अच्छी होगी और श्राव के कारण होने वाली कमजोरी भी दूर होगी. कम-से-कम तीन महीने तक यह उपाय करें, दूध के ठंडा हो जाने के बाद उसमें शहद डालें.
  • कच्चे केले की सब्जी खाएँ.
  • अगर आपके शरीर में खून की कमी है, तो खून बढ़ाने के लिए हरी सब्जियाँ, फल, चुकन्दर इत्यादि खाएँ.
  • 1 केला लें, उसे बीच से काट लें. उसमें 1 ग्राम फिटकरी भर दें, इसे दिन या रात में एक बार खाएँ. लेकिन ध्यान रखें कि अगर दिन में खाना शुरू किया तो, दिन में हीं खाएँ. और अगर रात में खाना शुरू किया हो, तो रात में हीं खाएँ.
  • तले-भूने चीज या मसालेदार चीज नहीं के बराबर खाएँ.
  • योनी की साफ-सफाई का ध्यान रखें.
  • मैदे से बनी चीजें न खाएँ.
  • एक बड़ा चम्मच तुलसी का रस लें, और उतनी हीं मात्रा में शहद लें. फिर इसे खा लें. इससे आपको आराम मिलेगा.
  • . अनार के हरे पत्ते लें, 25-30 पत्ते…. 10-12 काली मिर्च के साथ पीस लें. इसमें आधा ग्लास पानी डालें, फिर छानकर पी लीजिए. ऐसा सुबह-शाम करें.
  • भूने चने में खांण्ड (गुड़ की शक्कर) मिलाकर खाएँ, इसके बाद 1 कप दूध में देशी घी डाल कर पिएँ.
  • 10 ग्राम सोंठ का, एक कप पानी में काढ़ा बनाकर पिएँ. ऐसा एक महीने तक करें.
  • पीपल के 2-4 कोमल पत्ते लेकर, पीस लें. फिर इसे दूध में उबालकर पिएँ.
  • 1 चम्मच आंवला चूर्ण लें और 2-3 चम्मच शहद लें. और इन्हें आपस में मिलाकर खाएँ. ऐसा एक महीने तक करें.
  • खूब पानी पिएँ.
  • सिंघाड़े के आटे का हलुआ और इसकी रोटी खाएँ.
  • 3 ग्राम शतावरी या सफेद मूसली लें, फिर इसमें 3 ग्राम मिस्री मिलाकर, गर्म दूध के साथ इसका सेवन करें.
  • नागरमोथा, लाल चंदन, आक के फूल, अडूसा चिरायता, दारूहल्दी, रसौता, इन सबको 25-25 ग्राम लेकर पीस लें. पौन लीटर पानी में उबालें, जब यह आधा रह जाय तो छानकर उसमें 100 ग्राम शहद मिलाकर दिन में दो बार 50-50 ग्राम सेवन करें.
  • माजू फल, बड़ी इलायची और मिस्री को बराबर मात्रा में पीस लें. एक सप्ताह तक दिन में तीन बार लें. एक सप्ताह के बाद फिर दिन में एक बार 21 दिन तक लें.
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मंगलवार, 4 अक्टूबर 2016

गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण

गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण



अगर आपने अभी हाल हीं में बिना गर्भनिरोधक या बिना कन्डोम के सम्भोग किया है, तो आप गर्भवती हो सकती हैं. आपमें आने वाले कुछ बदलाव आपको यह बता देंगे कि गर्भ ठहरा है या नहीं. अगर आप अपनी इच्छा से गर्भवती हुई हैं, तो यह आपके लिए एक अच्छी खबर है. गर्भवती होने पर एक स्त्री के शरीर, मन और Mood में कई बदलाव आने लगते हैं. तो आइए जानते हैं क्या हैं, गर्भवती होने के लक्षण.

वैसे Period असमान्य अवस्था में भी बंद हो सकता है. लेकिन अगर आप पूरी तरह स्वस्थ्य हैं और आपका मासिक स्राव बंद हो गया है, तो यह आपके गर्भवती होने का एक लक्षण है.

  • कुछ स्त्रियाँ जब गर्भवती हो जाती है, तो उनके स्तनों से दूध का रिसाव शुरू हो जाता है. स्तनों से दूध का रिसाव होना भी गर्भ ठहरने का एक लक्षण है. स्तन भारी हो जाते हैं, और साथ हीं थोड़े बड़े भी हो जाते हैं.
  • गर्भ ठहरने पर निपल्स चौड़े और थोड़े बड़े हो जाते हैं. और स्तन भी बड़े होने लगते हैं. निपल्स का रंग गाढ़ा होने लगता है. स्तनों में सूजन महसूस होने लगता है, उन्हें हल्का सा भी दबाने पर दर्द होने लगता है.
  • गर्भधारण करने के बाद गर्भावस्था के शुरूआती 3 महीनों में सेक्स करने की इच्छा बढ़ जाती है. इस दौरान सेक्स किया जा सकता है, लेकिन कुछ सावधानियों के साथ.
  • खट्टे या चकदार चीजें खाने की बहुत ज्यादा इच्छा होना. हमेशा कुछ न कुछ खाने की इच्छा होना.
  • गर्भवस्था के पहले तीन महीने में बार-बार पेशाब जाना भी, गर्भ ठहरने का एक लक्षण है.
  • थोड़ा-बहुत काम करने पर भी बहुत ज्यादा थकान, या ज्यादा अनावश्यक चिड़चिड़ापन आना भी गर्भावस्था में एक सामान्य बात है.
  • खानपान में बिना किसी बड़े बदलाव के उल्टी या बदहजमी होना भी गर्भ ठहरने का एक लक्षण है.
  • गर्भाशय में ऐथन और पेट में उसी प्रकार की पीड़ा जैसा Periods के दौरान होता है. दर्द तो ठीक है, लेकिन योनी से अगर खून आए तो आपको डॉक्टर से जरुर मिलना चाहिए.
  • Period में ज्यादा रक्त आना भी गर्भवती होने का लक्षण है.गर्भवस्था में आपको विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. और कुछ खास चीजों का पालन करना चाहिए. और इस बात कि पूरी जानकारी जुटानी चाहिए कि आपके खानपान से लेकर आपके विचारों तक का आपने होने वाले बच्चे पर कैसा प्रभाव पड़ेगा.


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रविवार, 2 अक्टूबर 2016

शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने के उपाय आइए जानते है ड़ा० बी०के० कश्यप से

शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने के उपाय आइए जानते है ड़ा० बी०के० कश्यप से 


आजकल की अस्त-व्यस्त जीवनशैली के कारण अनेक पुरुष शुक्राणुओं की कमी की समस्या का सामना कर रहे हैं. साथ हीं उनके शुक्राणुओं ( स्पर्म ) की क्षमता भी कम हो रही है. इसके कारण पुरुषों को पिता बनने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. तो आइए जानते हैं कि आपको अपने शुक्राणुओं की संख्या और क्षमता बढ़ाने के लिए आपको क्या-क्या करना चाहिए और क्या-क्या नहीं करना चाहिए. और हम यह भी जानेंगे कि कौन-कौन सी आदतें अपनाकर आप इस समस्या से बच सकते हैं.

स्पर्म काउंट बढ़ाने और शुक्राणुओं की गुणवत्ता बरकरार रखने के टिप्स :

  • शराब और सिगरेट न पिएँ. ये आपकी सेक्स क्षमता को बुरी तरह करेंगे.
  • हर दिन व्यायाम करें. ज्यादा भारी-भरकम व्यायाम करने से बचें.
  • अपने शरीर का वजन संतुलित रखें. आपका वजन न तो बहुत अधिक होना चाहिए और न बहुत कम.
  • स्‍टीम बाथ से बचें.
  • लैपटॉप का उपयोग अपनी जांघ पर रखकर न करें.
  • मोबाइल को हमेशा अपने पैंट के पॉकेट में न रखें.
  • रात में जींस पहनकर न सोएँ, इसके बदले आपको रात में सोते समय पायजामा ( Trousers ) पहनना चाहिए.
  • कसी हुई अंडरवियर न पहनें.
  • रात में सोने से पहले अंडरवियर खोल लें, केवल पायजामा पहनकर सोएँ.
  • अत्यधिक लूब्रकन्ट का उपयोग न करें.
  • ज्यादा कॉफी न पिएँ.
  • हर दिन दो अन्डे खाएँ.
  • रोज लहसून की 3-4 कलियाँ खाएँ.
  • हर दिन 75 ग्राम अखरोट खाने से स्पर्म काउंट बढ़ती है.
  • गाजर का जूस नियमित रूप से पीने से शुक्राणुओं की संख्या बढ़ती है.
  • हर दिन एक ग्लास अनार का जूस पीने से भी शुक्राणुओं की संख्या बढ़ती है.
  • हर दिन टमाटर खाना भी आपके लिए फायदेमंद रहेगा.
  • लगातार पालक साग खाने से भी स्पर्म काउंट बढ़ता है.
  • डब्बाबंद खाना, खाना बंद करें.
  • सोया मिल्क का सेवन न करें, ये शुक्राणुओं को नुकसान पहुँचाता है.
  • ज्यादा कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन न करें, ऐसा करना भी नुकसानदायक है.
  • घोंघा का मांस खाने से स्पर्म काउंट चमत्कारी ढंग से बढ़ता है.
  • केले का नियमित सेवन भी स्पर्म काउंट बढ़ाता है.
  • हर दिन अपने भोजन में थोड़ी मात्रा में कद्दू के बीज को शामिल करें, यह भी आपको लाभ पहुँचायेगा.


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शुक्रवार, 30 सितंबर 2016

खतरनाक सेक्स पोजीशन

खतरनाक सेक्स पोजीशन



सेक्स का आनंद लेने के लिए अलग-अलग सेक्स पोजीशन ट्राई करना कोई बुरी बात नहीं. इससे सेक्स लाइफ में नयापन आता है. लेकिन कुछ सेक्स पोजीशन जोखिम भरे हो सकते हैं. तो आइए हम ऐसे सेक्स पोजीशन के बारे में जानते हैं जिन्हें करने से आपको बचना चाहिए क्योंकि वे आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं.

खतरनाक सेक्स पोजीशन :


  • वूमन ऑन टॉप- सेक्स करने के दौरान अक्सर पुरुष की दिलचस्पी महिलाओं को ऊपर ( वूमन ऑन टॉप ) रखने की होती है, लेकिन ऐसा करना पुरुषों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि पुरुषों के जननांग में फ्रैक्‍चर ( पेनाइल फ्रैक्चर ) के अधिकांश मामले इसी सेक्स पोजिशन के कारण सामने आते हैं.
  • कनाडा में हुए रिसर्च के अनुसार, वूमन ऑन टॉप पोजिशन सबसे खतरनाक सेक्स पोजिशन है, जो पुरुष जननांग में फ्रैक्‍चर ( पेनाइल फ्रैक्चर ) का मुख्य कारण बनती है. जननांग में फ्रैक्‍चर होने के बाद पेनिस में दर्द या सूजन होने की शिकायत रहती है. वूमेन ऑन टॉप पोजिशन में प्राय: महिला अपने पूरे वजन के साथ गति को नियंत्रित करती है. इसमें महिला के अचानक गलत दिशा में चले जाने के कारण पेनाइल फ्रैक्चर होता है.
  • बॉडी बिल्डर पोजीशन – बॉडी बनाने में यह पोजीशन उपयोगी है, लेकिन सेक्स में यह पोजीशन आपको और आपके साथी को नुकसान पहुंचा सकती है. इसमें इंटरकोर्स के दौरान महिला साथी के लिए  स्थिर रहना थोड़ा मुश्किल होता है. इस पोजीशन में पुरुष महिला को अपने हाथों और थाइस पर पूरी तरह से रोक कर रखता है, जिससे उसके पैरों पर अधिक जोर पड़ता है. वहीं यदि महिला की कमर को ठीक से सहारा ना मिले तो वह गिर सकती है.
  • ब्‍लम्‍पिकन पोजीशन – यह पोजीशन सेक्स पोजीशन से ज्यादा सेक्स एक्ट है. इस पोजीशन में ब्लोजॉब यानी ओरल सेक्स अधिक होता है. इस पोजीशन को करने में महिला की आँखों को नुकसान पहुँच सकता है. ब्लोजॉब के दौरान यदि सीमन के छीटें महिला की आंखों में पड़ जाए, तो महिला को आंखों से संबंधित समस्या हो सकती है.
  • पाइल ड्राइवर पोजीशन – इस पोजीशन को बेड या जमीन पर किया जाता है. लेकिन इसे करते समय महिला का आधा शरीर बिस्तर पर टिका होता है और पैर घूमकर महिला की मुँह की तरफ आते हैं. इस पोजीशन में इंटरकोर्स आनंददायक होता है. लेकिन इसे करते समय पुरुष का पूरा वजन महिला के ऊपर आ जाता है और संतुलन बिगड़ने से इस पोजीशन से महिला की गर्दन को चोट लग सकती है.
  • ऐनल टू वैजाइना – ऐनल सेक्स के साथ-साथ मेन इंटरकोर्स जोखिम भरा होता है. यदि पुरुष सेक्स के बीच में ऐनल सेक्स करने लगे और फिर दोबारा सेक्स करने लगे तो ये सेक्स एक्ट महिला के लिए खतरनाक हो सकता है. क्योंकि सेक्स के साथ-साथ ऐनल सेक्स करने से कई बैक्टीरिया शरीर में चले जाते हैं जिससे महिला को बैक्टीरियल इंफेक्‍शन हो सकता है.
  • पेयर ऑफ टॉन्‍ग पोजीशन – इस पोजीशन में महिला पूरी तरह से पुरुष के सहारे पर होती है और महिला का केवल एक हाथ ही जमीन पर टिका होता है. और ऐसे में यदि महिला का हाथ जमीन से हट जाए या संतुलन बिगड़ जाए तो दोनों को ही गंभीर चोट लग सकती है. क्योंकि इस पोजीशन में मसल्स पर बहुत भार पड़ता है, महिला को इसे करते समय या बाद में दर्द भी हो सकता है.
  • स्टैडिंग काउगर्ल पोजीशन – इस पोजीशन को महिलाएं और पुरुष दोनों ही भी खूब पसंद करते हैं, क्योंकि इससे उन्हें ऑर्गेज्म जल्दी होता है. लेकिन इस पोजीशन में भी महिला का पूरा वजन पुरुष पर होता है. और यदि पुरुष का संतुलन बिगड़ जाए तो महिला को चोट लगने की आशंका बढ़ जाती है.
  • स्टैंडिंग 69 पोजीशन – कई जोड़ों को यह पोजिशन बहुत आनंददायक लगती है. इसमें महिला पुरुष साथी के ऊपर पीठ करके बैठ जाती है जिससे पूरा वजन एक ही पार्टनर पर आ जाता है. इस अवस्था में थकान अधिक होती है और पसीना भी ज्यादा आता है जिस कारण शरीर फिसलने लगता है. और ऐसे में यदि गलती से भी कोई फिसल जाए तो उसे गंभीर चोट लग सकती है.


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