शनिवार, 8 जून 2019

पुरुष बांझपन (Male Infertility)




पुरुष बांझपन के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव

पुरुषों में स्पर्म की गुणवत्ता और उसकी मात्रा गर्भ धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है हर दंपत्ति अपने जीवन में संतान का सुख चाहता है लेकिन कई महिलाओं को प्राकृतिक रूप से गर्भ धारण करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अगर 1 साल नियमित प्रयास करने पर भी गर्भधारण में सफलता नहीं मिले तो इसे इनफर्टिलिटी कहते हैं  आमतौर पर ये देखा गया है कि सोसाइटी में इनफर्टिलिटी को सिर्फ महिलाओं से जुड़ी समस्या समझा जाता है लेकिन निःसंतान दंपत्तियों में 30-40 % मामलों में पुरुष नि: संतानता की वजह हो सकते हैं ।

जब पुरुष का स्पर्म काउंट कम हो या उसके स्पर्म एग को फर्टिलाइज करने के योग्य न हों तब उसे मेल इनफर्टिलिटी कहते हैं।
इसके अलावा पुरुषों में बांझपन की समस्या के पीछे खराब जीवनशैली, बीमारी, चोट, गंभीर स्वास्थ्य समस्या आदि कारक जिम्मेदार  होते हैं । 

पुरुष बांझपन के कारण

मेल इनफर्टिलिटी के लिए तीन (या अधिक) प्राथमिक कारक हो सकते हैं । 
ओलिगोजोस्पर्मिया (शुक्राणुओं की कम संख्या), टेराटोजोस्पर्मिया (शुक्राणुओं की असामान्य रूपरेखा) और स्पर्म ट्रांसपोर्ट डिसआर्डर । 
मेल फैक्टर इनफर्टिलिटी के करीब 20 प्रतिशत मामलों में स्पर्म ट्रांसपोर्ट डिसआर्डर ही जिम्मेदार होते हैं । 

पुरुष का सीमेन (Semen) एक दूधिया तरल पदार्थ जैसा होता है जो संभोग के चरम अवस्था पर लिंग (penis) से निकलता है । इसी सीमेन में पुरुष का स्पर्म होता है । जब पुरुष के स्पर्म की संख्या कम होती है तो वह महिला के अंडे से नहीं मिल पाता है इस कारण पुरुष महिला को प्रेगनेंट करने में असमर्थ हो जाता है।

यदि पुरुष का स्पर्म असामान्य आकार (abnormal size) का होता है तब भी वह महिला के अंडे के साथ निषेचित नहीं हो पाता है । इसके अलावा यदि पुरुष का सीमेन असामान्य है तो वह स्पर्म को प्रभावी तरीके से पहुंचा नहीं पाता है ।

वेरिकोसिल (varicocele) के कारण भी पुरुषों में बांझपन की समस्या हो जाती है । वेरिकोसिल नसों में एक प्रकार का सूजन है जिसके कारण पुरुष का वृषण (testicle) या अंडकोश सूख जाता है और वे बांझपन के शिकार हो जाते हैं । यह समस्या होने पर स्पर्म कमजोर हो जाते हैं ।

पुरुषों के गुप्तांगों में इंफेक्शन होने से भी उन्हें बांझपन की समस्या हो सकती है । कुछ इंफेक्शन ऐसे होते हैं जो स्पर्म बनने में बाधा उत्पन्न करते हैं और स्पर्म की नली को अवरूद्ध कर देते हैं । 

अधिवृषण (epididymis) और पुरुष के अंडकोश (testicles) में सूजन होने या यौन संचारित संक्रमण जैसे गोनोरिया एवं एचआईवी होने के कारण भी पुरुष वीर्य़कोष क्षतिग्रस्त हो जाता है जिसके कारण शुक्राणु पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते हैं । 

यदि किसी पुरुष को ट्यूमर की समस्या हो तो हार्मोन का उत्पादन करने वाली ग्रंथियां जैसे पिट्यूटरी ग्लैंड और उसके प्रजनन अंग इससे सीधे प्रभावित होते हैं । इसके कारण पुरुष बांझ हो जाता है । 

पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की कमी एवं अन्य हार्मोन संबंधी दिक्कतों के कारण भी उन्हें बांझपन की समस्या हो सकती है

स्पर्म काउंट में कमी होना,  शुक्राणु का बनना लेकिन बाहर नहीं आ पाना 
। 
Hormone deficiency के चलते पुरुषों में Testosterone की मात्रा घट जाती है जिससे sperm count कम या nil यानि शून्य भी हो सकता है ।

Anemia, Thyroid Diabetes जैसी बीमारियों से भी पुरुषों की fertility पर काफी असर पड़ता है ।

इन सभी कारणों में सबसे मुख्य कारण कम स्पर्म काउंट को माना गया है तो आइये जनते हैं स्पर्म काउंट से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी और साथ ही अगर पुरुष में स्पर्म की मात्रा कम हो तो क्या हैं उसके इलाज़।

स्पर्म काउंट कम होना


पुरुषों में स्पर्म की गुणवत्ता और उसकी मात्रा गर्भ धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है 
। 
 स्पर्म काउंट 15 मिलियन या इससे अधिक होना सामान्य माना जाता है लेकिन 15 मिलियन से कम होने पर स्पर्म काउंट असमान्य होने के श्रेणी में आता है ।

अधिक रेडिएशन और एक्सरे के प्रभाव से भी पुरुषों में स्पर्म बनना कम हो जाता है जिससे वे महिला को गर्भवती करने में असमर्थ हो जाते हैं । 

अधिक एल्कोहल के सेवन, धूम्रपान, शरीर का वजन बढ़ना एवं ड्रग्स के सेवन से भी पुरुषों को बांझपन हो सकता है । 

पुरुष बांझपन के लक्षण

पुरुषों में बांझपन का मुख्य लक्षण यह है कि वह असुरक्षित यौन संबंध बनाने के बाद भी  महिला को गर्भवती नहीं कर पाते हैं । पुरुषों के शरीर में पहले से ही बांझपन के कुछ लक्षण जैसे हार्मोन का असंतुलन, वृषण की नसें फैल जाना या शुक्राणु नली का अवरूद्ध हो जाना, आनुवांशिक विकार आदि संकेत उन्हें महसूस होते हैं लेकिन वे इसपर शुरूआत में ही अधिक ध्यान नहीं दे पाते हैं । 
पुरुषों में बांझपन के लक्षण निम्न हैं:-

यौन संबंध बनाने में समस्या, स्खलित होने में कठिनाई और स्खलन (ejaculation) में कम मात्रा में तरल पदार्थों का निकलनासेक्स करने की इच्छा में कमी, उत्तेजना में कमी (erectile dysfunction) आदि पुरुषों में बांझपन के लक्षण हो सकते हैं । 

वृषण (testicle) और इसके आसपास की जगहों में दर्द, सूजन और गांठ की समस्या बांझपन का लक्षण हो सकता है । 

बार-बार श्वसन तंत्र में इंफेक्शन होना, सूंघने की क्षमता में कमी आदि बांझपन के लक्षण होते हैं । 

पुरुषों में असामान्य रूप से स्तन का विकास (gynecomastia), शरीर और चेहरे पर बालों का कम होना गुणसूत्र या हार्मोनल असामान्यता का लक्षण है । जिससे वे बांझ हो सकते है । 

पुरुषों के प्रति मिली लीटर सीमेन में शुक्राणुओं को संख्या 15 लाख से कम होना या स्खलन के दौरान कुल शुक्राणुओं की संख्या 39 लाख से कम होना पुरुषों में बांझपन का संकेत है 

पुरुष बांझपन का निदान

सबसे पहले डॉक्टर पुरुष का शारीरिक परीक्षण करते हैं और कुछ टेस्ट के जरिए पुरुषों में बांझपन की समस्या का निदान करते हैं डाक्टर पुरुषों के सीमेन का टेस्ट करते हैं और स्पर्म के गुणवत्ता और संख्या का पता लगाते हैं । 
इसके अलावा पेनिस से तरल पदार्थ निकालकर संक्रमण की जांच की जाती है ।
 फिर लिंग, अंडकोश (scrotum) और प्रोस्टेट ग्रंथि की जांच करते हैं। 
पुरुषों में बांझपन के जांच के लिए सीमेन का परीक्षण करना बहुत आवश्यक होता है । बांझपन के निदान के लिए निम्न टेस्ट किए जाते हैं 

ब्लड टेस्ट

टेस्टोस्टीरोन के स्तर और अन्य हार्मोन की जांच करने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है 

सीमेन की जांच

सीमेन का सैंपल लिया जाता है और इसकी सांद्रता, रंग एवं गुणवत्ता का परीक्षण किया जाता है 

अल्ट्रासाउंड

अल्ट्रासाउंड के जरिए अंदरूनी समस्याओं और खराब स्खलन के बारे में पता लगाया जाता है 
पुरुष बांझपन का इलाज- पुरुषों बांझपन दूर करने का इलाज बहुत सामान्य तरीके से किया जाता है । इलाज से पहले डॉक्टर बांझपन का निदान करते हैं और उसके कारणों के बारे में पता लगाते हैं । फिर इसी आधार पर पुरुषों में बांझपन का इलाज किया जाता है 

अधिक स्पर्म के उत्पादन के लिए पुरुषों को आयुर्वेद  दवाएं दी जाती हैं 

इसके अलावा  आयुर्वेद दवाओं के द्वारा ही पुरुषों में सेक्स के लिए उत्तेजना को भी बढ़ाया जाता है 

इंफेक्शन को दूर करने के लिए आयुर्वेद एंटीबायोटिक्स दिया जाता है 
हार्मोन असंतुलन को दूर करने के लिए हार्मोनल आयुर्वेद दवाएं दी जाती  है 

इसके अलावा भी बांझपन (banjhpan ) को दूर करने के लिए कई प्रकार के उपचार किये  जाते हैं । 

यदि किसी पुरुष में स्पर्म की संख्या कम है तो कृत्रिम तरीके से वीर्यारोपण (insemination) किया जाता है । इस प्रक्रिया में कई बार स्खलन कराकर स्पर्म एकत्र किया जाता है । इसके बाद इसे मैनुअली उस स्पर्म को महिला के गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब में प्रवेश कराया जाता है 
पुरुषों में बांझपन को दूर करने के लिए विट्रो फर्टिलाइजेशन (VF) भी एक तरीका है । इस प्रक्रिया में पुरुषों के स्पर्म और महिलाओं के अंडे को एक प्रयोगशाला में निषेचित किया जाता है उसके बाद निषेचित अंडे को महिला के गर्भाशय में रखा जाता है 

यदि टेस्ट में यह पता चलता है कि किसी पुरुष के शरीर में स्पर्म बिल्कुल नहीं बन रहा है तो दाता शुक्राणु (doner sperm) की  सहायता से महिला को गर्भवती कराया जाता है । इस प्रक्रिया में स्पर्म बैंक से डोनर स्पर्म लिया जाता है और कृत्रिम वीर्यारोपण से महिला के गर्भाशय में डाला जाता है 

पुरुषों में बांझपन से बचाव

आमतौर पर पुरुषों में आनुवांशिक समस्या और बीमारी के कारण हुए बांझपन से बचने का कोई उपाय नहीं है । लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर पुरुषों में बांझपन की संभावना को जरूर कम किया जा सकता है 
यौन संचारित संक्रमण से होने वाले रोगों से बचें और यह समस्या हो जाए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं 
नशीली दवाओं और ड्रग्स के सेवन से बचें 
विषाक्त और हानिकारक पदार्थों (toxins) के संपर्क में आने से बचें 
जहां तक संभव हो रेडिएशन से दूर रहें 
अधिक और लगातार एल्कोहल का सेवन करने से बचें 
अधिक देर तक गर्म पानी में स्नान करने से बचें, इससे वृषण गर्म हो सकता है 
अंडरवियर थोड़ी ढीली पहनें 
मानसिक तनाव से दूर रहें और वजन को नियंत्रित रखें 


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